निजी कॉलोनाइजर मार रहे हैं गरीबों का हक : ई डब्लूएस मकानों का नहीं हो रहा निर्माण
जिला विकास प्राधिकरण का रवैया सुस्त
रुद्रपुर। रूद्रपुर में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आवासों का निर्माण मुख्य रूप से उत्तराखंड आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण और जिला विकास प्राधिकरण द्वारा सरकारी योजनाओं के तहत कराया गया है। नियमों के मुताबिक निजी कॉलोनाइजरों को अपनी आवासीय योजनाओं में ईडब्लूएस वर्ग के लिए भूमि या फ्रलैट आरक्षित करने होते हैं, लेकिन रुद्रपुर में निजी कॉलोनाइजरों द्वारा लक्ष्य के अनुसार ईडब्लूएस मकान न बनाने और अवैध प्लॉटिंग करने की वजह से हाल ही में जिला विकास प्राधिकरण ने भूरारानी जैसे क्षेत्रों में 7 एकड़ से अधिक की अवैध कॉलोनियों पर बुलडोजर चलाकर बड़ी कार्रवाई की है।उत्तराखंड के प्रमुख औद्योगिक केंद्र रुद्रपुर ;ऊधमसिंह नगरद्ध में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग ईडब्लूएस के लिए किफायती आवासों की मांग लगातार बढ़ी है। राज्य की आवास नीति के अनुसार, किसी भी निजी कॉलोनाइजर को बड़ी आवासीय कॉलोनी विकसित करने के लिए कुल स्वीकृत क्षेत्र का एक निश्चित हिस्सा ;आमतौर पर 10» से 15»द्ध ईडब्लूएस और एलआईजी श्रेणी के लिए आरक्षित रखना या उसके बदले शेल्टर फंड देना अनिवार्य होता है।रुद्रपुर में किफायती आवास उपलब्ध कराने का सबसे बड़ा काम निजी कॉलोनाइजरों के बजाय उत्तराखंड आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण और केंद्र सरकार ने मिलकर किया है। वर्तमान में रुद्रपुर के ग्राम बागवाला में प्रधानमंत्री आवास योजना ;शहरीद्ध के तहत 1,872 ईडब्लूएस फ्रलैट्स का विशाल प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। कुल 1,872 फ्रलैट्स में से 832 फ्रलैट पूरी तरह बनकर तैयार हो चुके हैं और 512 फ्रलैट निर्माण के अंतिम चरण में हैं।इन फ्रलैटों की वास्तविक निर्माण लागत 6 लाख प्रति फ्रलैट है, लेकिन केंद्र और धामी सरकार की 3 लाख की संयुक्त सब्सिडी के बाद पात्र लाभार्थियों को यह मात्र 3 लाख में आवंटित किए जा रहे हैं।रुद्रपुर में दर्जनों मान्यता प्राप्त और सैकड़ों गैर-मान्यता प्राप्त निजी कॉलोनाइजर सक्रिय हैं। आंकड़ों के लिहाज से, अधिकांश बड़े निजी बिल्डर्स ;जैसे मेट्रोपोलिस सिटी या अन्य टाउनशिप बिल्डर्सद्ध ने लेआउट पास करवाते समय ईडब्लूएस श्रेणी के लिए कागजों पर जगह छोड़ी, लेकिन मौके पर फ्रलैट निर्माण करने में उनकी रुचि बेहद कम रही है। नियमों के उल्लंघन और ईडब्लूएस प्रावधानों को पूरा न करने के कारण रुद्रपुर में जिला विकास प्राधिकरण लगातार सख्त कदम उठा रहा है।जून 2026 में ही प्राधिकरण ने रुद्रपुर के भूरारानी क्षेत्र में करीब 7 एकड़ भूमि पर निजी कॉलोनाइजरों द्वारा नियमों के विपरीत काटी जा रही अवैध कॉलोनियों को जेसीबी मशीनों से ध्वस्त कर दिया।निजी बिल्डर्स द्वारा रुद्रपुर में ईडब्लूएस मकान न बनाने के पीछे कम मार्जिन मनी तथा उनका अपना निजी स्वार्थ छुपा रहता है । निजी कॉलोनाइजर प्रीमियम या मध्यम वर्ग के प्रोजेक्ट्स से अधिक मुनाफा कमाते हैं, जबकि ईडब्लूएस मकानों में दरें सरकार तय करती है।रुद्रपुर के बाहरी इलाकों ;जैसे दिनेशपुर रोड, किच्छा रोड और रामपुर रोड के आसपासद्ध में कॉलोनाइजर बिना लेआउट पास कराए ही कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनियां काट देते हैं, जिससे वे ईडब्लूएस मकान बनाने की कानूनी बाध्यता से बच जाते हैं।आंकड़ों से स्पष्ट है कि रुद्रपुर में गरीबों के लिए आवास का ढांचा मुख्य रूप से सरकारी परियोजनाओं ;जैसे बागवाला के 1,872 फ्रलैटद्ध के भरोसे ही चल रहा है। निजी क्षेत्र के कॉलोनाइजरों की भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए जिला विकास प्राधिकरण अब ‘रेरा’ और लेआउट निरस्तीकरण जैसी कड़ी कानूनी कार्रवाइयों का सहारा ले रहा है ताकि भविष्य में हर वैध प्राइवेट कॉलोनी में गरीबों के आशियाने का सपना भी सच हो सके।
