उत्तराखंड में ऊधमसिंह नगर यौन उत्पीड़न के मामलों में शीर्ष पर
सरकारी आंकड़े करते हैं इसकी पुष्टि,पिछले कुछ समय में महिला अपराध के 660 मुकदमों में से अकेले उधम सिंह नगर में 374 मामले
रुद्रपुर। ‘देवभूमि’ के नाम से प्रसि( उत्तराखंड का यह मैदानी और औद्योगिक जिला हाल के वर्षों में बच्चियों और युवतियों के खिलाफ बढ़ते जघन्य अपराधों के कारण चिंता का मुख्य केंद्र बन चुका है।पुलिस और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के विभिन्न विश्लेषणों के अनुसार, पूरे कुमाऊं मंडल में महिला व बाल उत्पीड़न के सर्वाधिक मामले अकेले ऊधमसिंह नगर में दर्ज किए जाते हैं। कुमाऊं मंडल पुलिस कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, एक निर्धारित 5 महीने की अवधि में दर्ज महिला अपराध के कुल 660 मुकदमों में से अकेले ऊधमसिंह नगर जिले में सर्वाधिक 374 मामले ;लगभग 56»द्ध दर्ज किए गए, जबकि दूसरे स्थान पर रहे नैनीताल में यह संख्या 149 थी।कुमाऊं क्षेत्र के तुलनात्मक पुलिस आंकड़ों के अनुसार, क्षेत्र में दर्ज अधिकांश मामले इसी जिले से आते हैं। वर्ष 2021 की एक अवधि में जिले में बलात्कार के 194 मामले दर्ज किए गए थे, जो राज्य के अन्य पहाड़ी जिलों की तुलना में बेहद चिंताजनक स्तर पर थे।नाबालिगों के खिलाफ अपराध रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में पोस्को एक्ट और नाबालिगों से दुष्कर्म के मामलों की संख्या निरंतर बनी हुई है। इसके अतिरिक्त, अनैतिक देह व्यापार के मामलों में भी यह जिला कुमाऊं में सबसे आगे दर्ज किया गया है। हाल ही में रुद्रपुर क्षेत्र में एक 13 वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की बेहद शर्मनाक घटना सामने आई, जिसके बाद राज्य सरकार और प्रशासन से त्वरित व निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। जिले में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया जो नाबालिगों को गायब कर उनसे दुष्कर्म और अनैतिक देह व्यापार करवाता था। पुलिस ने आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता और पोस्को एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की है।जिले के भूरारानी इलाके में एक सौतेले पिता द्वारा ही अपनी 17 वर्षीय बेटी के साथ अश्लील हरकतें करने का मामला दर्ज हुआ है, जो यह दिखाता है कि बेटियां घरों के भीतर भी असुरक्षित महसूस कर रही हैं।उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे होने और औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण यहां की आबादी मिश्रित और अत्यधिक सघन है। फ्रलोटिंग पॉपुलेशन ;लगातार आने-जाने वाले लोगद्ध अधिक होने से अपराधियों को छिपने और भागने का मौका आसानी से मिल जाता है।ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में रहने वाले कई मजदूर और कम आय वर्ग के परिवारों में बेटियों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को शुरुआत में सामाजिक बदनामी के डर से दबा दिया जाता है, जिससे अपराधियों के हौसले बढ़ते हैं।जिले में साइबर यौन अपराध के मामले भी तेजी से बढ़े हैं, जिसमें किशोरियों को ऑनलाइन जाल में फंसाकर उनका शारीरिक व मानसिक शोषण किया जाता है।बढ़ते अपराधों को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस और महिला आयोग की सक्रियता बढ़ी है। जिले में मानव तस्करी और नाबालिगों को बचाने के लिए विशेष टीमों को सक्रिय किया गया है। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल स्वयं पीड़ित परिवारों से मिलकर उन्हें कानूनी सहायता दिलाने और आरोपियों को फास्ट-ट्रैक कोर्ट के माध्यम से कठोरतम सजा दिलाने के लिए पैरवी कर रही हैं। स्थानीय सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों द्वारा सुरक्षा व्यवस्था और पुलिसिंग को मजबूत करने की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन किए जा रहे हैं। ऊधमसिंह नगर में बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल कड़े कानून ही काफी नहीं हैं, बल्कि पुलिस गश्त बढ़ाने, स्कूल-कॉलेजों में सुरक्षा और काउंसलिंग सत्र आयोजित करने तथा बालिकाओं की छुट्टðी के समय सादे कपड़ों में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती तथा समाज को अपनी बेटियों के प्रति अधिक संवेदनशील और जागरूक बनाने की तत्काल आवश्यकता है।
