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गुटबाजी में उलझी कांग्रेस : अनुशासनहीनता पर तीन नेताओं को कारण बताओ नोटिस

पिथौरागढ़ में गोदियाल के सामने फूटा कांग्रेस का अंदरूनी संकट
पिथौरागढ़। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी अब खुले मंच पर सामने आने लगी है। मंगलवार को पिथौरागढ़ में जिला पंचायत सभागार में आयोजित परिवर्तन संकल्प सम्मेलन में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की मौजूदगी में विधायक मयूख महर के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। अनुशासनहीनता की घटना के बाद कांग्रेस संगठन ने भी सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश महामंत्री राजेंद्र भंडारी ने महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष भावना नगरकोटी, पूर्व जिलाध्यक्ष महेंद्र बिष्ट और पीसीसी सदस्य दीपक कांडपाल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में मंच पर अनुशासनहीनता, वरिष्ठ नेताओं के समक्ष अव्यवस्था फैलाने तथा संगठन की छवि धूमिल करने का आरोप लगाया गया है। तीनों नेताओं से तीन दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर पार्टी संविधान के तहत छह वर्ष तक निष्कासन की कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। कार्यक्रम के दौरान हुए घटनाक्रम ने न केवल कांग्रेस की अंदरूनी कलह को उजागर किया, बल्कि चुनाव से पहले संगठन की एकजुटता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए। सम्मेलन की शुरुआत महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष भावना नगरकोटी के संबोधन से हुई। उन्होंने नगर निकाय चुनाव में पार्टी को हुए नुकसान के लिए विधायक मयूख महर को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर ऐसे लोगों को आगे बढ़ाया गया, जिनका पार्टी से कोई सरोकार नहीं था। उनके संबोधन के दौरान सभागार में मौजूद कई कार्यकर्ता और पदाधिकारी भी विधायक के विरोध में खुलकर सामने आ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। बढ़ते विरोध और हंगामे के बीच विधायक मयूख महर अपने समर्थकों के साथ कार्यक्रम छोड़कर बाहर निकल गए।प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, विधायक हरीश धामी, जिलाध्यक्ष मुकेश पांती सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं ने कार्यकर्ताओं को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन काफी देर तक माहौल तनावपूर्ण बना रहा। इसके बाद गोदियाल ने मंच से कार्यकर्ताओं को अनुशासन का संदेश देते हुए कहा कि संगठन की ताकत एक-दूसरे के खिलाफ नहीं, बल्कि भाजपा के खिलाफ दिखाई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि निकाय चुनाव में पार्टी पूरी तरह एकजुट रहती तो कई स्थानों पर परिणाम अलग हो सकते थे।गोदियाल ने माहौल बिगाड़ने वाले कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं को ष्गाइडेड मिसाइलष् बताते हुए कहा कि ऐसे लोग संगठन के लिए शुभ संकेत नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस को आगामी चुनावों में मजबूती के साथ उतरना है तो व्यक्तिगत मतभेद भुलाकर संगठन को मजबूत करना होगा।राजनीतिक दृष्टि से यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आगामी विधानसभा चुनाव अब दूर नहीं हैं। ऐसे समय में कांग्रेस का परिवर्तन संकल्प सम्मेलन संगठन की ताकत दिखाने के बजाय गुटबाजी का मंच बन गया। सार्वजनिक रूप से सामने आए इस विवाद ने विपक्ष की चुनावी तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिथौरागढ़ की घटना कोई अकेला मामला नहीं है। कांग्रेस के भीतर प्रदेश की कई विधानसभा सीटों पर इसी तरह की गुटबाजी और आपसी खींचतान की स्थिति बनी हुई है। यदि समय रहते संगठन इन मतभेदों को दूर कर अनुशासन कायम नहीं कर पाया, तो आगामी विधानसभा चुनाव में इसका सीधा राजनीतिक खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ सकता है। संगठन के भीतर अनुशासन बनाए रखने और असंतोष को समय रहते दूर करना कांग्रेस नेतृत्व के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।दूसरी ओर, सत्तारूढ़ भाजपा विधानसभा चुनाव को लेकर पूरी सक्रियता के साथ तैयारियों में जुटी हुई है। पार्टी संभावित प्रत्याशियों के चयन, संगठनात्मक बैठकों और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में लगी है। भाजपा का फोकस चुनावी मजबूती पर है, जबकि कांग्रेस अभी भी अंदरूनी कलह और संगठनात्मक असंतोष से जूझती दिखाई दे रही है। ऐसे में यदि कांग्रेस समय रहते अपने संगठन को एकजुट नहीं कर पाती है तो चुनावी मुकाबले में उसे नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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