आईजी रिद्धिम अग्रवाल ने तोड़ा भू-माफियाओं का तिलस्म
सीएम धामी के ‘अपराध मुक्त उत्तराखंड’ संकल्प को धरातल पर उतारती कुमाऊँ पुलिस की बड़ी कार्रवाई
नैनीताल। कुमाऊँ में वर्षों से भोले-भाले लोगों की मेहनत की कमाई और जमीनों पर डाका डालने वाले संगठित भू-धोखाधड़ी सिंडिकेट पर आखिरकार पुलिस का शिकंजा कस गया। करोड़ों रुपये की ठगी, फर्जी दस्तावेजों और सुनियोजित साजिशों के सहारे लोगों को बर्बाद करने वाले इस नेटवर्क के खिलाफ अब ऐसी कार्रवाई शुरू हुई है जिसने पूरे प्रदेश में साफ संदेश दे दिया है कि उत्तराखंड में अपराध चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं हो सकता। करीब 25 करोड़ से अधिक की भूमि एवं वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े इस बड़े सिंडिकेट में अब तक कई मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, जबकि अनेक पीड़ित लगातार सामने आ रहे हैं। लेकिन इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि जब जांच में अपेक्षित गति दिखाई नहीं दी, तब कुमाऊँ की तेजतर्रार आईजी रिद्धिम अग्रवाल ने सख्त रुख अपनाते हुए पुरानी एसआईटी को भंग कर दिया। यही वह निर्णायक मोड़ था जिसने पूरे मामले की दिशा बदल दी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार अपराध और माफिया तंत्र के खिलाफ फ्जीरो टॉलरेंसय् की नीति की बात करते रहे हैं। कुमाऊँ में हुई यह कार्रवाई उसी सोच का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है। लंबे समय से आम जनता के बीच यह धारणा बन रही थी कि प्रभावशाली भू-माफियाओं तक कानून का हाथ शायद नहीं पहुंच पाता, लेकिन पुनर्गठित एसआईटी की कार्रवाई ने इस भ्रम को पूरी तरह तोड़ दिया। आईजी रिद्धिम अग्रवाल द्वारा जांच में शिथिलता पर तत्काल निर्णय लेते हुए नई एसआईटी का गठन करना यह दर्शाता है कि अब केवल औपचारिक जांच नहीं, बल्कि परिणाम देने वाली पुलिसिंग पर जोर दिया जा रहा है। यही कारण है कि पुनर्गठित एसआईटी ने बेहद कम समय में मुख्य अभियुक्त धनंजय गिरी तक पहुंच बनाकर उसे गिरफ्रतार कर लिया। इस पूरे प्रकरण की सबसे महत्वपूर्ण बात केवल गिरफ्रतारी नहीं, बल्कि अवैध संपत्तियों को चिन्हित कर उन्हें जब्त करने की तैयारी है। पुलिस अब उस आर्थिक साम्राज्य पर प्रहार कर रही है जो कथित रूप से ठगी और अवैध कमाई से खड़ा किया गया था। धारा 111 बीएनएस के तहत संगठित अपराध की कठोर धाराएं लगाने के साथ-साथ धारा 107 बीएनएसएस के अंतर्गत संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया शुरू होना इस कार्रवाई को और अधिक प्रभावी बनाता है। सूत्रों के अनुसार, चिन्हित संपत्तियों के क्रय-विक्रय पर रोक लगाने के लिए भी प्रशासनिक स्तर पर तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि कोई भी आरोपी अपनी संपत्ति बेचकर कानून से बच न सके। यदि यह प्रक्रिया सफल होती है तो भविष्य में पीड़ितों को राहत देने की दिशा में भी यह एक ऐतिहासिक कदम माना जाएगा। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति के सीधे पर्यवेक्षण और एसपी क्राइम जितेन्द्र चौधरी के नेतृत्व में गठित नई एसआईटी ने जिस तेजी और गंभीरता से कार्रवाई की, उसने साफ कर दिया कि अब कुमाऊँ में अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाने धीरे-धीरे खत्म होते जा रहे हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई अभी शुरुआत भर है। सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है और आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे संभव हैं। जनता में बढ़ा भरोसा, माफियाओं में बढ़ी बेचैनी: कुमाऊँ क्षेत्र में इस कार्रवाई के बाद आम लोगों के बीच पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ा है। जिन पीड़ितों ने वर्षों तक अपनी जमीन और धन वापस मिलने की उम्मीद छोड़ दी थी, उन्हें अब न्याय की उम्मीद दिखाई देने लगी है। वहीं दूसरी ओर, भू-माफिया और संगठित अपराध से जुड़े लोगों में बेचौनी साफ देखी जा रही है।
