यशपाल आर्य ने सरकार के दावों पर उठाये कई सवालः प्रदेश में 83 हजार से अधिक पद खाली, भ्रष्टाचार बना शिष्टाचार
देहरादून। प्रदेश में रोजगार को लेकर सरकार के दावों पर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार मंचों से भले ही युवाओं को रोजगार देने और नए अवसर पैदा करने के बड़े-बड़े दावे करती हो, लेकिन वास्तविक स्थिति इन दावों से बिल्कुल अलग है। ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में हुए बजट सत्र के बाद आज देहरादून में रविवार को कांग्रेस नेताओं ने प्रेसवार्ता की। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने बताया कि उत्तराखण्ड में शासन-प्रशासन की स्थिति अत्यंत चिंताजनक होती जा रही है। प्रदेश में भ्रष्टाचार अब अपवाद नहीं बल्कि शिष्टाचार बनता जा रहा है। सरकार भले ही फ्जीरो करप्शनय् का नारा देती हो, लेकिन वास्तविकता यह है कि भर्ती, ठेकों, योजनाओं के क्रियान्वयन और स्थानांतरण तक हर स्तर पर भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आ रही हैं। कई मामलों में शिकायतें मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुँचने के बावजूद समयबख कार्रवाई नहीं होती, जिससे जनता के बीच यह संदेश जाता है कि भ्रष्टाचार करने वालों को संरक्षण मिल रहा है।भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2018 से 2024 के बीच विभिन्न योजनाओं में वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर मामले सामने आए हैं। देहरादून स्मार्ट सिटी परियोजना, बिजली व्यवस्था, खनन और अन्य विभागों में वित्तीय कुप्रबंधन के उदाहरण राज्य की वित्तीय स्थिति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिर् िंखड़े करते हैं।वर्ष 2022 के बाद अपराधों की घटनाओं में उल्लेखनीय वृखि हुई है। राजधानी देहरादून में अल्प समय के भीतर कई हत्याओं की घटनाएँ होना अत्यंत चिंताजनक है। जब राजधानी में ही अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हों, तो प्रदेश की जनता में असुरक्षा की भावना स्वाभाविक है। कई मामलों में पीड़ित न्याय के लिए भटकते रहते हैं और पुलिस की निष्पक्षता व प्रशासनिक जवाबदेही पर लगातार प्रश्न उठ रहे हैं। राज्य में ईमानदार अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अवसर नहीं मिल रहा, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है। प्रस्तुत बजट भी प्रदेश की वास्तविक समस्याओं से मुंह मोड़ने वाला बजट है। इसमें न तो आर्थिक संसाधनों को मजबूत करने की स्पष्ट योजना दिखाई देती है और न ही बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का कोई ठोस खाका है। राज्य पर बढ़ते कर्ज, हजारों रिक्त सरकारी पदों, पलायन, किसानों की समस्याओं और ग्रामीण क्षेत्रों की चुनौतियों पर बजट में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। गैरसैंण के विकास, स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती, युवाओं के रोजगार, किसानों की आय बढ़ाने और पहाड़ी क्षेत्रों के गांवों को पुनर्जीवित करने के लिए ठोस नीति और बजटीय प्रावधानों की आवश्यकता है। भ्रष्टाचार, कानून व्यवस्था और आर्थिक प्रबंधन से जुड़े इन गंभीर मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए और प्रदेश की जनता को यह भरोसा दिलाना चाहिए कि शासन व्यवस्था पारदर्शी, जवाबदेह और न्यायपूर्ण है।नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार के अपने बजट दस्तावेज ही इन दावों की सच्चाई उजागर कर रहे हैं। बजट के आंकड़ों के अनुसार 1 अप्रैल 2025 तक सरकारी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और राज्य सहायतित संस्थानों में कुल 83 हजार 637 पद रिक्त पड़े हुए हैं। यह संख्या केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं की उम्मीदों का प्रतीक है जो वर्षों से सरकारी नौकरी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि रिक्त पदों की संख्या कम होने के बजाय हर साल बढ़ती जा रही है। इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार इन पदों को भरने के प्रति गंभीर नहीं है। एक ओर हजारों पद खाली हैं, वहीं दूसरी ओर लाखों शिक्षित युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं। आर्य ने कहा कि सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में पद खाली रहने से प्रशासनिक कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। अस्पतालों में डॉक्टरों के पद रिक्त हैं, स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है और पुलिस सहित कई विभागों में स्टाफ की कमी से कार्य प्रभावित हो रहा है। इसका सीधा नुकसान प्रदेश की आम जनता को उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का युवा शिक्षित, प्रतिभाशाली और मेहनती है, लेकिन रोजगार के अवसरों की कमी के कारण बड़ी संख्या में युवाओं को प्रदेश से बाहर पलायन करना पड़ रहा है। यदि यही स्थिति रही तो इसका असर राज्य के विकास पर भी पड़ेगा। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में युवाओं को रोजगार देने के प्रति गंभीर होती तो बजट में रिक्त पदों को शीघ्र भरने का स्पष्ट रोडमैप, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, कौशल विकास को बढ़ावा देने और उद्योगों तथा स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए ठोस योजनाएं दिखाई देतीं। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से मौजूदा बजट में रोजगार सृजन को लेकर कोई व्यापक और स्पष्ट रणनीति नजर नहीं आती, जिससे प्रदेश के युवाओं में निराशा बढ़ रही है।
