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गैरसैंण पहाड़ की आकांक्षाओं,उम्मीदों और स्वाभिमान का प्रतीकर : धामी

मुख्यमंत्री ने विधानसभा में सरकार की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं का रखा विस्तृत खाका
भराड़ीसैंण । भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकार की उपलब्धियों, नीतियों और भविष्य की योजनाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार विकल्प रहित संकल्प के साथ उत्तराखंड को समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर राज्य बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत देवभूमि के देवी देवताओं, देश के लिए बलिदान देने वाले शहीदों और उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले आंदोलनकारियों के त्याग और संघर्ष के कारण ही आज उत्तराखंड विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के लिए गैरसैंण केवल भौगोलिक स्थान नहीं बल्कि यह पहाड़ की आकांक्षाओं, उम्मीदों और स्वाभिमान का प्रतीक है। गैरसैंण उस संकल्प का प्रतीक है जिसके लिए उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन चला था। इसलिए सरकार ने अपने कार्यकाल में न केवल गैरसैंण को अपने हृदय में बसाए रखा बल्कि यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि सरकार की प्रत्येक रीति और नीति में गैरसैंण की छाप हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के गठन का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को जाता है जिन्होंने इस राज्य की नींव रखी। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य को नई दिशा और गति मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2021 में केदारनाथ की पावन धरा से कहा था कि 21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा। राज्य सरकार इस संकल्प को साकार करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और विकास की योजनाओं को धरातल पर उतारने में जुटी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस बार प्रस्तुत बजट कई मायनों में ऐतिहासिक है। यह वर्तमान विधानसभा का अंतिम पूर्णकालिक बजट होने के साथ साथ राज्य के आगामी विकास की दिशा तय करने वाला दस्तावेज भी है। वर्ष 2026 27 के लिए प्रस्तुत बजट का आकार 1 लाख 11 हजार करोड़ रुपये है जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक है। यह बजट केवल आय व्यय का दस्तावेज नहीं है बल्कि राज्य के सवा करोड़ लोगों की आकांक्षाओं और उम्मीदों का प्रतिबिंब है। बजट में मातृशक्ति के सम्मान, युवाओं के उत्थान, किसानों के कल्याण, विज्ञान एवं नवाचार के विकास, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पर्यटन के विस्तार जैसे सभी क्षेत्रों में संतुलित विकास का प्रयास किया गया है। विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार केवल घोषणाएं नहीं करती बल्कि उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा भी करती है। मुख्यसेवक के रूप में की गई 3885 घोषणाओं में से 2408 घोषणाओं को धरातल पर उतारा जा चुका है और शेष पर तेजी से काम चल रहा है। सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं बल्कि उन्हें परिणामों में बदलना है ताकि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके। आर्थिक प्रगति का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राज्य की जीएसडीपी में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और प्रति व्यक्ति आय में लगभग 41 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य बजट का आकार भी 60 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 1 लाख 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इसके साथ ही निवेश, उद्योग और पर्यटन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। सरकार ने रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए 30 से अधिक नई नीतियां लागू की हैं जिसके परिणामस्वरूप राज्य में 20 हजार से अधिक नए उद्योग स्थापित हुए हैं और स्टार्टअप की संख्या 700 से बढ़कर लगभग 1750 हो गई है। पर्यटन, होटल और होमस्टे क्षेत्र में भी तेजी से वृद्धि हुई है जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। हेली सेवाओं और हेलीपोर्ट की संख्या बढ़ने से भी पर्यटन और कनेक्टिविटी को नई गति मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने राज्य में नकल माफिया और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। उत्तराखंड में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है जिसके बाद भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है। पिछले साढ़े चार वर्षों में 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार के मामलों में आईएएस और पीसीएस स्तर के अधिकारियों सहित 200 से अधिक लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां समान नागरिक संहिता लागू की गई है। इस कानून के माध्यम से महिलाओं को समान अधिकार मिले हैं और समाज में समानता तथा न्याय की भावना को मजबूती मिली है। सरकार ने राज्य की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए सख्त भू कानून और धर्मांतरण विरोधी कानून जैसे कदम भी उठाए हैं। इफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से उत्तराखंड में लगभग दो लाख करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विभिन्न विकास परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। सड़क, रेल, रोपवे और हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने के लिए ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना और चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना जैसी योजनाएं राज्य के विकास को नई गति देंगी। किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्हें तीन लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है और कृषि उपकरणों पर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए संचालित योजनाओं से प्रदेश की करीब 1 लाख 70 हजार महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन स्थापित करते हुए उत्तराखंड का समग्र विकास सुनिश्चित करना है।

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