सूबे की ‘स्वास्थ्य सेवाओं’ पर फ़िर लगा ‘दगाबाजी का दाग’ : टिहरी में एंबुलेंस की ऑक्सीजन रास्ते में खत्म होने से सफाई कर्मी की मौत
तीन दिन पहले समय पर एंबुलेंस न मिलने के कारण श्रीनगर में भी हुई थी गर्भवती व उसके अजन्मे बच्चे की मौत
टिहरी/ श्रीनगर। सरकार की तमाम प्रयासों के बावजूद राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं का ऐन मौके पर दगा देने का सिलसिला खत्म नहीं हो पा रहा है। ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना में कार्यरत विनोद की पत्नी शिखा और उसके 32 सप्ताह के अजन्मे बच्चे की समय पर एंबुलेंस ना मिलने के कारण हुई मौत की त्रसदी अभी स्मृति पटल से उतरी भी न थी, कि टिहरी के जिला अस्पताल में पहले हायर सेंटर रेफर करने में देरी, फिर एंबुलेंस में ऑक्सीजन खत्म होने के कारण नगर पालिका की सफाई कर्मी रेखा देवी की मौत से, प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर दगाबाजी का दाग एक बार फिर लगने के साथ-साथ पहाड़ की आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं की भी असलियत सामने आ गई । सफाई कर्मी की मौत से गुस्साए परिजनों एवं नगर पालिका के कर्मचारियों ने पालिका अध्यक्ष मोहन सिंह रावत के नेतृत्व में अस्पताल गेट पर धरना दिया। हासिल जानकारी के मुताबिक तबीयत बिगड़ने पर रेखा देवी को बोराडी जिला अस्पताल ले जाया गया था ।जहां, पहले तो बीमार को हायर सेंटर रेफर करने में विलंब किया गया, उसके बाद मरीज को हायर सेंटर ले जाने के लिए जो एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई वह बेहद खस्ता हाल थी और रास्ते में ही एम्बुलेंस के ऑक्सीजन सिलेंडर की ऑक्सीजन खत्म हो गई। जिसके चलते सफाई कर्मी रेखा देवी की मौत हो गई। इसके पहले ऋषिकेश -कर्णप्रयाग रेल परियोजना में कार्यरत और यूपी निवासी विनोद की 31 वर्षीय पत्नी शिखा और उनके 32 सप्ताह के अजन्मे बच्चे की मौत सिर्फ इसलिए हो गई, क्योंकि वक्त पर एम्बुलेंस नहीं मिली। जब अस्पताल में खड़ी गाड़ी को चलाने के लिए एक मददगार आगे आया, तो अस्पताल प्रशासन ने ‘स्टेयरिंग खराब’ होने की बात कह दी। ज्ञात हो कि पीड़ित परिवार अस्थायी तौर पर देवप्रयाग में रहता था। बुधवार शाम को सात बजे 31 साल की शिखा खाना बना रही थी, तभी कमरे से अचानक चीख पुकार की आवाजें आने लगी। पड़ोस में रहने वाले दुकानदार शीशपाल भंडारी चिल्लाने की आवाज सुनकर कमरे में पहुंचे तो देखा कि शिखा लहूलुहान हालत में थीं। उन्होंने तुरंत पास के मेडिकल स्टोर वाले को बुलाया और अपनी गाड़ी से शिखा को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागी ले गए।इसी दौरान मेडिकल स्टोर संचालक ने 108 को कॉल कर दी थी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागी पहुंचने तक शिखा होश में थी और बातचीत कर रही थीं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागी के डॉक्टरों ने शिखा की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे हायर सेंटर रेफर करने की बात कही।बड़ी विडंबना यह कि अस्पताल परिसर में एम्बुलेंस खड़ी होने के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने यह कहकर हाथ खड़े कर दिए कि चालक छुट्टðी पर है और गाड़ी का स्टेयरिंग खराब है। मदद के लिए आगे आए शीशपाल ने जब खुद गाड़ी चलाकर ले जाने की पेशकश की, तो उसे भी अनसुना कर दिया गया। मरीज के करीब दो घंटे तक तड़पने के बाद रात 9 बजे 108 एम्बुलेंस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और श्रीनगर ले जाते समय रास्ते में ही जच्चा और बच्चा दोनों ने दम तोड़ दिया।इस घटना ने पहाड़ में आपातकालीन सेवाओं के खोखले दावों की पोल खोल कर रख दी है।जहां, एक एम्बुलेंस के चालक की अनुपस्थिति और मशीनरी की खराबी दो जिंदगियों पर भारी पड़ गई।
