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प्रत्येक स्वयंसेवक के लिए परिवार प्रबोधन, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण और सामाजिक समरसता महत्वपूर्ण

रुद्रपुर। ग्राम भूरारानी के अमर इंटरनेशनल स्कूल के सभागार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष मनाया गया। जिसका शुभारंभ मुख्य अतिथि जिला शासकीय अधिवक्ता और आरएसएस के सहकार्यवाह बरीत सिंह, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वयोवृद्ध सुंदरलाल चोटमुरादा ने विधिवत रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए अधिवक्ता बरीत सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देशभर में शताब्दी वर्ष मना रहा है। वर्ष 1925 में डॉक्टर केशव राव बलिराम हेडगेवार ने इसकी स्थापना की थी ।नाममात्र स्वयंसेवकों के साथ बना हुआ यह संगठन आज एक विशाल वट वृक्ष का रूप ले चुका है। आरएसएस के देश और दुनिया में करोड़ों स्वयंसेवक हैं जो राष्ट्र भक्ति से ओतप्रोत है। उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य राष्ट्र प्रथम है और राष्ट्र के निर्माण के लिए स्वयंसेवक सदैव आगे रहते हैं। उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष के अवसर पर संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कुछ संकल्पों का उल्लेख किया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि परिवार प्रबोधन, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण और सामाजिक समरसता कितनी महत्वपूर्ण है। जिसका उद्देश्य परिवार प्रबोधन के तहत परिवार के प्रत्येक सदस्य को हर संभव प्रयास करना चाहिए कि वह अधिक से अधिक समय परिवार के साथ बिताए ताकि आपसी प्रेम और सामंजस्य बना रहे। प्रत्येक व्यक्ति को नागरिक कर्तव्य के प्रति जागरूकहोना चाहिए कि वह सफाई व्यवस्था पर ध्यान दें और समाज में फैल रही कुरीतियों को दूर करें। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की रक्षा प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है क्योंकि पर्यावरण के असंतुलन से विपदाएं आती हैं। ऐसे में पर्यावरण के संतुलन के लिए हर आदमी को अपना योगदान देना चाहिए। समाज में सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना चाहिए और प्रत्येक व्यक्ति को एक दूसरे के सुख दुख का सहभागी बनना चाहिए और मजबूत राष्ट्र के निर्माण के लिए अपना योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म सदेव सेवा कार्य में बढ़-चढ़कर प्रतिभाग करता है और स्वयंसेवक इसका उदाहरण है जो हर समय राष्ट्र की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए 94 वर्षीय सुंदरलाल चोटमुरादा ने कहा कि कई दशक बीत चुके हैं लेकिन आज भी आरएसएस अपने राष्ट्रभक्ति के सिद्धांत को लेकर अडिग है ।उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी आरएसएस के सिद्धांतों को आत्मसात कर राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान दे। इस दौरान भारत भूषण चुघ,सुरेश गांधी, काशीराम छाबड़ा ,उदयभान कालड़ा, देवेंद्र अरोड़ा ,मिथिलेश, सुखदेव कुमार ,जीएस तिवारी ,गुलशन चावला ,बंटी कटारिया, पारस चुघ ,चंदर चुघ, लक्ष्मण, मोहन, जितेंद्र, संजय कुशवाहा, एके दास, भावना जोशी, अंजू यादव, पूजा प्रसाद, ब्यूटी मलिक, आरती ,शेखर जोशी, राजकुमार, पुष्कर भटनागर, पूजा श्रीवास्तव, इशा अरोड़ा, शीला देशवाल ,सरिता सक्सेना, श्रद्धा, ममता सक्सेना, अनुपम, रचित, कनिष्का, दीक्षा पंत, काजल, संगीता, अंजनी भट्ट, लीला ,नीमा सामंत, विनीता कक्कड़, शीतल आर्य ,ललिता प्रसाद, रत्नेश, हिमांशु, राकेश ,अशोक, नीतू, नंदी, मीरा, अलंकृता, अंजू, रीता ,मोनिका आर्य, मंजू मौर्य, चंदर चोटमुरादा ,आनंद कुमार समेत तमाम स्वयंसेवक मौजूद थे

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