February 27, 2026

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अब हरिद्वार में भी कांवड़ यात्रा के रूट पर होटल और ढाबे वालों को लिखना होगा अपना नाम

सीएम योगी आदित्यनाथ ने दिया फरमान : अब पूरे उत्तर प्रदेश में कावड़ियों की पवित्रता के लिए कांवड़ मार्गों पर खुली सभी खाने-पीने की दुकानों पर ‘नामपट्ट’ लगाना अनिवार्य होगा
हरिद्वार । उत्तर प्रदेश की तरह अब उत्तराखंड में भी कांवड़ यात्रा के रूट पर दुकानदारों को होटल और ढाबे वालों को रेट लिस्ट के साथ ही अपना नाम भी लिखना होगा। हरिद्वार पुलिस प्रशासन ने रेस्तरां मालिकों को कांवड़ यात्रा मार्ग पर नाम प्रदर्शित करने का आदेश जारी किया है। हरिद्वार एसएसपी परमेंद्र डोबाल ने बताया कि कांवड़ मार्ग पर जो होटल, ढाबे, रेस्तरां हैं या जो रेड़ी-पटरी वाले हैं उन्हें उनके मालिक का नाम अनिवार्य रूप से लिखना होगा। ऐसा न करने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने कहा कि ढाबा और होटलों में कांवड़ यात्रा के दौरान लहसुन और प्याज का खाना नहीं परोसा जाएगा। साथ ही मांसाहार किसी भी स्थिति में नहीं बनाया जाएगा। यूपी में कांवड़ यात्रा मार्ग पर पड़ने वाली दुकानों पर उस दुकान को चलाने वालों के नाम लगाना अब अनिवार्य कर दिया गया है। इस संबंध में खुद सीएम योगी आदित्यनाथ ने आदेश दिया है। आपको बता दें कि मुजफ्फरनगर पुलिस पहले ही एक ऐसा आदेश जारी कर चुकी है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत अब पूरे उत्तर प्रदेश में कांवड़ मार्गों पर खुली सभी खाने-पीने की दुकानों पर ‘नामपट्ट’ लगाना अनिवार्य होगा। यानी दुकान के बाहर ये बताना जरूरी हो गया है कि दुकान कौन चला रहा है। सीएम ने आदेश दिया है कि जो इस आदेश को नहीं मानेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि कांवड़ियों की आस्था की शुद्धता बनाए रखने के लिए ऐसा कदम उठाना जरूरी हो गया है। यूपी सीएमओ ने बताया कि इस कदम का मकसद यात्रियों को शुद्ध और स्वच्छ भोजन प्रदान करना है। सीएम ने राज्य में हलाल सर्टिफाइड उत्पादों को बेचने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई का आदेश दिया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इस आदेश को स्पष्ट रूप से ‘भेदभावपूर्ण’ करार दिया और आरोप लगाया कि यह दर्शाता है कि सरकार उत्तर प्रदेश और पूरे देश में मुसलमानों को ‘दूसरे दर्जे’ का नागरिक बनाना चाहती है। सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस आदेश को “सामाजिक अपराध” करार दिया और अदालतों से मामले का स्वतः संज्ञान लेने को कहा।

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