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राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने दिया इस्तीफा,उत्तराखण्ड में बढ़ी राजनैतिक हलचल

तीन साल में कई विवादों को लेकर चर्चाओं में रहे कोश्यारी
मुम्बई ।महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। रविवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया है। उनकी जगह रमेश बैस को महाराष्ट्र का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। कोश्यारी के इस्तीफे से उत्तराखण्ड में राजनैतिक हलचल तेज हो गयी है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को साल 2019 में महाराष्ट्र का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया था। उससे पहले कोश्यारी नैनीताल के सांसद भी रह चुके हैं। महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल सी रविशंकर का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें यहां का नया राज्यपाल बनाया गया था। नवंबर 2000 में उत्तराखंड को देश का 27 वां राज्य बनाया गया। उस समय पहले मुख्यमंत्री रहे नित्यानंद स्वामी की सरकार में कोश्यारी को ऊर्जा मंत्री बनाया गया था। इसके बाद अक्टूबर 2001 में भाजपा आलाकमान ने कोश्यारी को स्वामी के उत्तराधिकारी के रूप में मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी। कोश्यारी केवल पांच महीने ही मुख्यमंत्री रहे। साल 2002 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को पराजित कर कांग्रेस सत्ता में आ गई। उसके बाद 2002 से 2007 तक वे उत्तराखंड विधानसभा में नेता विपक्ष भी रहे। वर्ष 2008 से 2014 तक वे उत्तराखंड से राज्यससभा के सदस्य चुने गए थे। भगत सिंह कोश्यारी आरएसएस के काफी नजदीकी रहे हैं। कोश्यारी ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा देने की बात कही थी। इसके लिए उन्होंने पत्र लिखकर पद मुक्त किए जाने की मांग की थी। इसके साथ ही उन्होंने ट्वीट कर लिखा था, पीएम मोदी की हाल ही की मुंबई यात्रा के दौरान मैंने उन्हें अपनी सभी राजनीतिक जिम्मेदारियों से मुक्त होने और अपना शेष जीवन पढ़ने, लिखने और अन्य गतिविधियों में बिताने की अपनी इच्छा से अवगत कराया है। मुझे हमेशा पीएम मोदी से स्नेह मिला है और मुझे इस संबंध में भी ऐसा ही मिलने की उम्मीद है। राज्यपाल की कुर्सी पर लगभग 3 साल रहे कोश्यारी इस छोटे से कार्यकाल में अपने बयानों और फैसलों से कई बार विवाद खड़ा कर चुके हैं। अपने कार्यकाल के दौरान महाविकास अघाड़ी के साथ भी उनकी तनातनी खुलकर नजर आई। वहीं उनके बयानों को लेकर विपक्ष लगातार उन पर निशाना साधता रहा और बीजेपी के इशारे पर काम करने का आरोप लगाता रहा। उन्होंने कई बार ऐसे बयान दिए, जिसको लेकर विवाद छिड़ गया और माफी तक मांगनी पड़ी। इसी साल जनवरी में उन्होंने महाराष्ट्र राजभवन में आयोजित जैन समुदाय के एक कार्यक्रम में कहा था कि भले ही इस पद पर उन्हें कोई खुशी नहीं है, लेकिन जब आध्यात्मिक नेता गवर्नर हाउस में आते हैं और वे ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेते हैं तो उन्हें बहुत खुशी मिलती है। महाराष्ट्र के राज्यपाल के तौर पर भगत सिंह कोश्यारी का एक फैसला सबसे अधिक विवादों में रहा। जिसको लेकर वह विपक्ष के निशाने पर आ गए थे। राज्य में फडणवीस सरकार गिरने के बाद जब महाविकास अघाड़ी की सरकार बनी तो उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने। 28 नवंबर 2019 को ठाकरे ने सीएम पद की शपथ ली। हालांकि तब उद्धव ठाकरे राज्य विधानसभा या विधान परिषद में से किसी के भी सदस्य नहीं थे और संविधान के मुताबिक सीएम या मंत्री को शपथ लेने के छह महीने के अंदर विधानसभा या विधानपरिषद में से किसी भी एक सदन की सदस्यता लेनी होती है। ऐसा न होने की स्थति में उसे पद से इस्तीफा देना पड़ता है। इसी मामले में शिवसेना की ओर से कोश्यारी को प्रस्ताव भेजा गया था, जिस पर राज्यपाल ने पूरी तरीके से चुप्पी साध ली थी। जिसके बाद शिवसेना और कोश्यारी में तनातनी देखने को मिली थी। हालांकि बाद में राजनीतिक दखल के चलते यह विवाद सुलझ गया था और ठाकरे को एमएलसी बनाया गया था।गर्वनर के इस तरह शपथ कराने पर महाराष्ट्र में लंबे समय तक सियासत चली। वहीं इसके बाद उद्धव ठाकरे के मंत्रियों की शपथ के दौरान भी राज्यपाल से विवाद हो गया था। क्योंकि मंत्रियों के पद और गोपनीयता की शपथ लेने के दौरान कांग्रेस विधायक केसी पाडवी ने कुछ ऐसे शब्द कहे थे, जिससे राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी नाराज हो गए थे और उन्होंने पाडवी को नसीहत दी थी कि शपथ लेने की जो लाइनें निर्धारित हैं, उन्हें ही पढ़ें। पिछले साल कोश्यारी ने एक सार्वजनिक समारोह में मराठा साम्राज्य के संस्थापक शिवाजी महाराज को पुराने समय का प्रतीक कहकर विवाद खड़ा कर दिया था। इसके बाद राज्यपाल कोश्यारी की खूब आलोचना हुई थी। जिस पर उन्हें सफाई भी देनी पड़ी थी। भगत सिंह कोश्यारी ने 29 जुलाई को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मुंबई के विकास में गुजराती-राजस्थानी लोगों के योगदान की प्रशंसा कर विवाद खड़ा कर दिया था। जिस पर उन्हें माफी तक मांगनी पड़ी थी। अपनी सफाई में उन्होंने कहा था कि महाराष्ट्र ही नहीं पूरे देश के विकास में सभी का विशेष योगदान रहता है। संबंधित प्रदेश की उदारता व सबको साथ लेकर चलने की उज्ज्वल परम्परा से ही आज देश प्रगति की ओर बढ़ रहा है। मैंने महाराष्ट्र और मराठी भाषा का सम्मान बढ़ाने का पूरा प्रयास किया है लेकिन कार्यक्रम में भाषण देने के दौरान मुझसे कुछ भूल हो गई। महाराष्ट्र जैसे महान प्रदेश की कल्पना में भी अवमानना नहीं की जा सकती। इस राज्य सेवक को माफ कर जनता अपने विशाल हृदय का परिचय देगी। कोश्यारी ने पिछले साल मार्च 2022 में ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले के बाल विवाह पर टिप्पणी की थी, जिस पर खूब बवाल मच था। कोश्यारी ने कहा था कि सावित्रीबाई की शादी 10 साल की उम्र में हुई थी और उनके पति उस समय 13 साल के थे। अब, इसके बारे में सोचें कि शादी करने के बाद लड़की और लड़का क्या सोच रहे होंगे। हालांकि इस बयान का भी कोश्यारी ने खंडन किया था।

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