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अशुद्ध जल को हेपेटाइटिस, टाइफाइड, डायरिया व पेचिश जैसी बीमारियों के होने का कारण

वैज्ञानिक डॉ. मणिन्द्र मोहन शर्मा नें अशुद्ध पानी को सेहत के लिए हानिकारक बताया
रुद्रपुर। विश्व जल सप्ताह के उपलक्ष्य पर उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद (बॉयोटेक विभाग) हल्दी पंतनगर के वैज्ञानिक डॉ. मणिन्द्र मोहन शर्मा नें युवा छात्र-छात्राओं को जल गुणवत्ता जांच की जानकारी दी और सुखद व स्वस्थ जीवन के लिए जल के बूंद-बूंद के संरक्षण को जरूरी बताया।डॉ. शर्मा नें अशुद्ध पेयजल को सेहत का दुश्मन बताते हुए कहा कि 86 फीसदी से ज्यादा बीमारियां अशुद्ध जल के कारण होती है। उन्होंने अशुद्ध जल को हेपेटाइटिस, टाइफाइड, डायरिया व पेचिश इत्यादि जैसी घातक बीमारियों के होने का कारण बताया। विश्व जल सप्ताह के उपलक्ष्य पर एस.एस. पब्लिक स्कूल, ग़दरपुर में बतौर विशेषज्ञ उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद (बायोटेक विभाग) हल्दी, पंतनगर के वैज्ञानिक डॉ. मणिन्द्र मोहन शर्मा नें जल साक्षरता व जलस्रोतों की गुणवत्ता जाँच व निगरानी विषय पर छात्र-छात्राओं को जागरूक किया। उन्होंने नें तराई के जल स्रोतों जैसे हैण्डपम्प, आर्टीजन वेल, नदियों व झीलों की वर्तमान जल गुणवत्ता की स्थिति से अवगत कराया तथा जल गुणवत्ता जाँचने की विधि को विस्तार से बताया। मानवीय हस्तक्षेपों एवं कुप्रबंधन को जल उपलब्धता और उसकी गुणवत्ता हास का मुख्य कारण बताया। डॉ. शर्मा नें मानसून में अशुद्ध जल से होने वाली बीमारियों से बचाव के उपायों के बारे में विधिवत जानकारी दी।प्रधानाचार्य मनोज कांडपाल नें छात्र-छात्राओं को जल की बर्बादी को रोकने का आह्वान किया। हिना नेगी व इंदरजीत सिंह नें जल बचाने के लिए बच्चों को जल शपथ दिलायी। रिसर्च फेलो श्रुति जोशी एवं अनुज जॉन नें फ़ील्ड टेस्टिंग किट से जल नमूनें की भौतिक-रासायनिक व जीवाणुओं के जाँच की क्रिया-विधि छात्र-छात्राओं को समझाया। यहाँ प्रधानाचार्य मनोज कांडपाल, उप-प्रधानाचार्य सुरेंद्र प्रताप, अनुज कुमार जॉन, श्रुति जोशी, कार्यक्रम समन्यवक इंदरजीत सिंह, शिक्षक प्रदीप चावला, सचिन बजाज, दीपक जोशी, लवीना रॉय, केवल कंबोज, हीना नेगी सहित 120 से ज्यादा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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