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उत्तराखंड में सीएम ने बुलाई सर्वदलीय बैठक: मरीजों की जांच और उपचार में देरी से फैल रहा है कोरोना

देहरादून। उत्तराखंड में पिछले साल के मुकाबले अधिक तीव्रता से बढ़ रहे कोरोना मरीजों के आकड़ो और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार लगातार स्थिति पर चर्चा कर रही है। इसी सिलसिले में सीएम तीरथ सिंह रावत ने शुक्रवार को अहम कदम उठाया है। उन्होंने कोरोना संकट पर चर्चा के लिए और उससे निपटने में राज्य के अन्य राजनीतिक दलों से भी सहयोग की अपेक्षा की है। इसको लेकर सीएम तीरथ सिंह रावत ने आज शाम सर्वदलीय बैठक बुलाई है, जिसमें विपक्षी दलों से कोरोना से निपटने में उनके सुझावो के साथ ही टीकाकरण, टेस्टिंग के जरिये कोरोना के प्रकोप से निपटने को लेकर चर्चा की जाएगी। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिये सामूहिक आयोजन पर पाबंदी लगाने के साथ ही व्यवसथाओ को लेकर सरकार हर संभव प्रयास कर रही है।वहीं स्वास्थ्य विभाग को गुरुवार को 345 नए डाक्टर मिल गए हैं। जल्द ही इन्हें अस्पतालों में तैनाती दी जाएगी। मुख्यमंत्राी तीरथ सिंह रावत ने कहा कि कोविड के बीच इन डाक्टरों के मिलने से राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं और भी सुदृढ़ होंगी। मुख्यमंत्राी ने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार विस्तार प्रदान किया जा रहा है। देहरादून। राज्य में कोरोना के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। कोरोना के कारण उत्तराखंड में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। लगातार मामले बढ़ने से अस्पतालो में बेड फुल हो चुके हैं। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य स्तरीय विशेषज्ञ समिति ने सरकार को कई अहम सुझाव दिए हैं। संक्रमण के बढ़ते मामले को देखते हुए प्रदेश में शाम छह बजे से लेकर सुबह छह बजे तक के रात्रि कफ्र्यू, शादी, सार्वजनिक समारोह में अधिकतम 50 लोगों की ही अनुमति देने और जांच बढ़ाने की संस्तुुति की है। प्रदेश सरकार ने हाल ही में 20 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। इस समिति की रिपोर्ट के अनुसार मरीजों की जांच और उपचार में देरी और क्लस्टर मामलों के संक्रमण के कारण संक्रमितों में इजाफा हुआ। समिति ने रेमडेसिविर इंजेक्शन का अधिक प्रयोग न करने की सलाह दी है और कोविड उपचार में संशोधन किया है। इसके साथ ही इस बात की आशंका भी जताई है कि इस दौर का वायरस अलग है। कोरोना फैलने की वजह जांच और उपचार में देरी,क्लस्टर मामलों के कारण बढ़ा संक्रमण,रोगियों को उच्च स्तर पर उपचार देने में देरी,दूसरे दौर का वायरस पहले से अलग बताया जा रहा है। विशेषज्ञ समिति का कहना है कि दूसरे दौर में 50 से कम उम्र के लोगों में मृत्यु दर अधिक है। पहले ऐसा नहीं था। यह जीनोम सिक्वेसिंग में बदलाव के कारण भी हो सकता है और वायरस के अधिक फैलाव के कारण भी। आइवरमेक्टिन टेबलेट पहले दिन मेें एक बार तीन दिन के लिए दी जा रही थी। अब इस टेबलेट को दिन में दो बार तीन दिन के लिए दिए जाने का सुझाव दिया गया है। रेमडेसिविर की भारी कमी है। यह पाया गया है कि इसके उपयोग से मृत्यु दर पर अधिक फर्क नहीं पड़ता। मध्यम संक्रमण दृ जहां आक्सीजन स्तर 94 प्रतिशत हो और संक्रमण आठ से दस दिन पुराना हो, वहां इस दवा का उपयोग किया जाए। सार्वजनिक स्थानों, समारोहों आदि में अधिकतम 50 लोग हों। जल्द से जल्द रोग की पहचान की जाए, उपचार और रिफरल, फ्लू ओपीडी शुरू की जाएं, कोविड टेस्टिंग बढ़ाई जाए। रिपोर्ट का इंतजार किए बिना लक्षण वाले रोगियों का उपचार हो। टीकाकरण अभियान और तेज किया जाए। रात्रि कफ्र्यू शाम छह बजे से सुबह छह बजे तक का हो,मृत्यु दर का आडिट नियमित रूप से किया जाए।

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