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देहरादून(उद ब्यूरो)। उत्तरकाशी में आए एवलांच के बाद रेस्क्यू कार्य में लगी टीमों ने 26 पर्वतारोहियों के शव बरामद कर लिए हैं। 3 लोग अब भी लापता बताए जा रहें हैं। शुक्रवार को सुबह फिर एक बार रेस्क्यू ऑपरेशन शुरु किया गया था। गुलमर्ग से आई हाई एल्टीटयूज वॉरफेयर रेस्क्यू की टीम कल ही घटनास्थल पर पहुंच चुकी थी। उसने और अन्य टीमों ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरु किया। इस रेस्क्यू के दौरान कुछ अन्य शव बरामद किए गए। अब तक कुल 26 शव बरामद हो चुके हैं। इनमें से कई शवों को उत्तरकाशी लाया जा चुका है। खराब मौसम लगातार चुनौती बना हुआ है। बारिश और बर्फबारी के चलते बचाव कार्य में मुश्किलें आ रहीं हैं। मौसम विभाग ने शनिवार को भी अलर्ट घोषित किया है। शुक्रवार को भी मौसम के प्रतिकूल रहने के कारण द्रौपदी का डांडा क्षेत्र से बरामद किए गए प्रशिक्षुओं के शवों को उत्तरकाशी नहीं लाया जा सका। केवल सुबह के दौरान वायु सेना के हेलीकाप्टर के जरिये चार शवों को रेस्क्यू किया गया। 22 शव अभी एडवांस बेस कैंप में हैं। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने कहा कि शनिवार को भी अलर्ट घोषित है। अगर मौसम अनुकूल रहा तभी हेली सेवा के जरिये शवों का रेस्क्यू किया जाएगा। वहीं शवों को उत्तरकाशी पहुंचाए जाने में हो रही देरी को लेकर विभिन्न राज्यों से उत्तरकाशी पहुंचे स्वजन खासे परेशान हैं। मौसम भी इन स्वजन के धैर्य की परीक्षा ले रहा है। वायुसेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के साथ ही गुलमर्ग के हाई एल्टीटयूज वॉरफेयर स्कूल की विशेष प्रशिक्षित टीम राहत कार्यों में लगाई गई है। हेलिकॉप्टर्स की लैंडिग के लिए विशेष हेलीपैड भी बनाया गया है। वहीं पर्वतारोहियों के परिजन निम से नाराज हैं। मृतकों के परिजनों ने मातली हैलीपैड पर पहुंचे लापता पर्वतारोहियों के परिजनों ने जिला प्रशासन और निम प्रशासन पर ठीक-ठीक जानकारी नहीं देने का आरोप लगाया है। मृतकों के परिजनों ने पूछा है कि जब मौसम खराब होने की चेतावनी थी तो लोगों को पर्वतारोहण के लिए क्यों भेजा गया। जानकार बता रहें हैं कि अब किसी के बचने की उम्मीद न के बराबर बची है। लगातार हो रही बर्फबारी से फंसे लोगों को सकुशल निकालना संभव नहीं हो पाएगा। आशंका जताई जा रही है कि अधिकतर पर्वतारोही किसी क्रेवॉश यानी गहरी खाई में फंस गए हैं और वहां से निकल नहीं पा रहें हैं। लगातार पड़ती बर्फ उन्हें ऊपर से ढंकती जा रही है। ऐसे में किसी का बच पाना मुश्किल है। हिमाचल प्रदेश के शिमला में नारकंडा के शिवम कैंथला के परिवार पर द्रौपदी का डांडा हिमस्खलन हादसे का पहाड़ बनकर टूटा है। इकलौते बेटे शिवम कैंथला की मौत से उसके परिवार का रो-रो के बुरा हाल है। जिस कलेजे के टुकड़े से घर में चारों तरफ खुशी चहकती रहती थी, वह सिर्फ यादों में सिमटकर रह गया है। शिवम के पिता संतोष कैंथला को जब हादसे की खबर मिली तो वह अपनी रिश्तेदारों के साथ 4 अक्टूबर की रात को ही उत्तरकाशी पहुंच गए थे। वह बेटे शिवम कैंथला को सकुशल गांव ले जाने आए थे। परंतु तकदीर का खेल देखिए जिस बेटे के लिए पिता ने बड़े-बड़े सपने देखे थे, उस बेटे की अर्थी लेकर पिता को गांव लौटना पड़ा। हिमाचल प्रदेश के नारकंडा गांव के सेब बागवान संतोष कैंथला का शिवम कैंथला इकलौता बेटा था। जो उत्तरकाशी के द्रौपदी का डांडा हिमस्खलन की चपेट में आए प्रशिक्षु पर्वतारोही दल का सदस्य था। गत 4 अक्टूबर की सुबह 8ः00 बजे शिवम कैंथला सहित पूरा दल द्रौपदी का डंडा आरोहण करने ही वाला था। 100 मीटर पहले भारी हिमस्खलन हुआ और दल के 29 सदस्य क्रेवास के अंदर दब गए। जिनमें शिवम कैंथला भी दबा। शिवम कैंथला की पिता को एक चमत्कार की उम्मीद थी कि उनका बेटा सहित दल के अन्य सदस्य सकुशल लौट आएंगे, पर ऐसा नहीं हुआ। शुक्रवार को हर्षिल से उत्तरकाशी लाए गए चार शवों में से दो शव की शिनाख्त पहले ही हो चुकी थी। उक्त दो शव एवरेस्टर सविता कंसवाल और नवमी रावत के थे। जबकि दो अन्य शवों की शिनाख्त शिवम कैंथला और अजय बिष्ट के रूप में हुई। इकलौते बेटे की मौत से शिवम के पिता संतोष फूट-फूट कर रोने लगे। इस भावुक पल में हर आंख भर आई।

 

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