Uttaranchal Darpan

Hindi Newsportal

कांग्रेस में ठुकराल की नई पारी से बदलेगा 2027 का चुनावी समीकरण

रूद्रपुर (उद संवाददाता)। रूद्रपुर के तेजतर्रार नेता और दो बार के पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल लंबी जद्दोजहद और कयासबाजियों के बाद अंततः कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। ठुकराल की कांग्रेस में इस धमाकेदार एंट्री ने जहां भाजपा के रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है, वहीं खुद कांग्रेस के भीतर भी विरोध और समर्थन की नई लहर पैदा कर दी है। ठुकराल का यह कदम आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए बेहद निर्णायक माना जा रहा है। राजकुमार ठुकराल का सियासी सफर काफी उतार -चढ़ाव भरा रहा है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा द्वारा टिकट काटकर शिव अरोरा को मैदान में उतारे जाने के बाद ठुकराल ने बगावती तेवर अपनाते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ा था। हालांकि वह चुनाव हार गए थे, लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर लगभग 27 हजार वोट हासिल कर उन्होंने अपनी व्यक्तिगत लोक प्रियता और मजबूत जनाधार का लोहा मनवाया था। पिछले चार वर्षों से उनके भाजपा में घर वापसी या कांग्रेस में शामिल होने की चर्चाएं लगातार फिजाओं में तैरती रहीं। निकाय चुनाव के दौरान उन्होंने मेयर पद के लिए ताल ठोकी थी, लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के व्यक्तिगत आग्रह पर उन्होंने कदम पीछे खींच लिए थे। उस समय माना जा रहा था कि उनकी भाजपा में वापसी तय है, लेकिन पार्टी के भीतर सक्रिय विरोधी गुट उनकी एंट्री रोकने में सफल रहा। दूसरी ओर, कांग्रेस की राह भी ठुकराल के लिए आसान नहीं थी। उनके कुछ कथित पुराने ऑडियो वायरल होने के कारण पार्टी आलाकमान असमंजस में था। विशेष रूप से 2022 में कांग्रेस प्रत्याशी रहीं मीना शर्मा ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। मीना शर्मा अभी भी ठुकराल की जॉइनिंग के सख्त खिलाफ हैं और उन्होंने संकेत दिए हैं कि यदि ठुकराल पार्टी में आए तो वह भाजपा का दामन थाम सकती हैं। स्थानीय स्तर पर भी कुछ अन्य कांग्रेस नेता ठुकराल के आने से सहज महसूस नहीं कर रहे हैं। ऐसे में ठुकराल के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के भीतर के इस असंतोष को शांत करना और पुराने कार्यकर्ताओं के साथ सामंजस्य बिठाना होगा। सियासी जानकारों का मानना है कि यदि कांग्रेस आलाकमान नाराज नेताओं को मनाने में सफल रहता है, तो ठुकराल भाजपा के लिए बड़ी मुसीबत बन सकते हैं। जमीन से जुड़े नेता के रूप में पहचाने जाने वाले ठुकराल पिछले चार वर्षों से बिना किसी पद या पार्टी के होने के बावजूद जनता के मुद्दों पर लगातार मुखर रहे हैं। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रें में उनकी पकड़ काफी गहरी मानी जाती है। अब जबकि उनका 2027 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा है, रूद्रपुर का आगामी मुकाबला बेहद दिलचस्प होने के आसार हैं। फिलहाल, ठुकराल की इस ‘सियासी पारी’ ने जिले की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
रुद्रपुर में फिर दोहराया गया इतिहास
रुद्रपुर। शहर की राजनीति में एक बार फिर इतिहास खुद को दोहराता नजर आ रहा है। पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल होने के साथ ही पुराने राजनीतिक घटनाक्रम की यादें ताजा हो गई हैं। इससे पहले भी रुद्रपुर की राजनीति में ऐसा ही बड़ा बदलाव देखने को मिल चुका है।दरअसल, क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ नेता तिलक राज बेहड़ ने भी अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत भारतीय जनता पार्टी से की थी। उत्तराखंड राज्य गठन से पहले वे भाजपा से विधायक चुने गए थे। लेकिन राज्य बनने के बाद वर्ष 2002 में प्रदेश में पहले विधानसभा चुनाव हुए भाजपा ने उनका टिकट काट दिया, तो उन्होंने नाराज होकर कांग्रेस का दामन थाम लिया। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा, जीत हासिल की और कांग्रेस सरकार में स्वास्थ्य मंत्री भी बने। अब लगभग उसी तरह का घटनाक्रम राजकुमार ठुकराल के साथ देखने को मिला है। ठुकराल ने भी अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत भाजपा से की थी और 2012 व 2017 में पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए। हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उनका टिकट काट दिया।टिकट कटने के बाद ठुकराल ने उस समय कांग्रेस जॉइन नहीं की, बल्कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतर गए। हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद करीब चार वर्षों तक वे किसी भी राजनीतिक दल से दूर रहे।अब ठुकराल ने कांग्रेस का हाथ थामकर अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत कर दी है। उनके इस फैसले को तिलक राज बेहड़ के पुराने कदम से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे रुद्रपुर की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव आने की संभावना जताई जा रही है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ठुकराल का कांग्रेस में शामिल होना सीधे तौर पर 2027 के विधानसभा चुनाव से जुड़ा कदम है। संभावना जताई जा रही है कि वे आगामी चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतर सकते हैं।रुद्रपुर में भाजपा से कांग्रेस तक का यह राजनीतिक सफर कोई नया नहीं है, लेकिन ठुकराल की एंट्री ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यहां की राजनीति में समीकरण कभी भी बदल सकते हैं। अब सभी की नजर 2027 के विधानसभा चुनाव पर टिकी है, जहां यह ‘दोहराया गया इतिहास’ क्या नया परिणाम देता है, यह देखना दिलचस्प होगा।
ठुकराल की राह में अपनों की ही चुनौतियां
रूद्रपुर। कांग्रेस में शामिल होने के बावजूद ठुकराल के लिए आगे की राह आसान नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के भीतर से ही मिल रही है। 2022 की कांग्रेस प्रत्याशी मीना शर्मा ने उनके खिलाफ सीधा मोर्चा खोल रखा है और उनके भाजपा में जाने की अटकलें तेज हैं। इसके अलावा, कई अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेता भी ठुकराल के आने से नाखुश हैं। ठुकराल के लिए अब यह परीक्षा की घड़ी है कि वह कैसे इस आंतरिक कलह को शांत कर पाते हैं और पार्टी को एकजुट कर आगामी चुनाव के लिए तैयार कर पाते हैं। यदि वह ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो कांग्रेस को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *