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आईएमपीसीएल का निजीकरण संसाधनों पर कब्जे की साजिशः हरीश रावत

रामनगर। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मोहान स्थित आईएमपीसीएल फैक्ट्री पहुंचकर निजीकरण के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार के साथ ही खरीददार कंपनी पर तीखा हमला बोला है। कर्मचारियों के धरने को अपना समर्थन देते हुए उन्होंने कहा कि आईएम पीसीएल एक लाभ कमाने वाली संस्था है, जिसे महज निजी हितों के लिए बेचा जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आईएमपी सीएल केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि कुमाऊं की पहचान और आर्थिक मजबूती का प्रतीक है। उन्होंने दावा किया कि दो हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति वाली इस कंपनी को खरीदने वाली संस्था केवल एक Úंट कंपनी है, जिसके पीछे बड़े आर्थिक समूहों के हित जुड़े हैं। रावत ने कहा कि यह कंपनी महज साल-डेढ़ साल की मेहमान है, जिसके बाद किसी नए नाम और नई व्यवस्था के जरिए इसे मुनाफा केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।उनका स्पष्ट आरोप है कि खरीददार का उद्देश्य फैक्ट्री चलाना नहीं, बल्कि इसकी कीमती जमीन और संसाधनों पर कब्जा करना है। हरीश रावत ने जोर देकर कहा कि रामनगर, सल्ट, गुजरू और अल्मोड़ा के लिए यह संस्थान रोजगार का सबसे बड़ा आधार है। उन्होंने इसे बचाने के लिए एक व्यापक जन-आंदोलन का आ“वान करते हुए कहा कि यह केवल कर्मचारियों की नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड के स्वाभिमान और भविष्य की लड़ाई है। आगामी 2027 विधानसभा चुनावों को लेकर रावत ने बड़ा दावा किया कि राज्य में राजनीतिक माहौल बदल रहा है। उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा और पौड़ी की हालिया रैलियों में उमड़ी भीड़ और कार्यकर्ताओं का उत्साह यह संकेत दे रहा है कि प्रदेश में कांग्रेस की लहर चलने वाली है। भाजपा पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक आते ही भाजपा द्वारा दायित्वों का बंटवारा करना उनकी हार के डर को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल को जनता के बदलते मूड का आभास हो चुका है, इसलिए वे पद बांटकर कार्यकर्ताओं को साधने की कोशिश कर रहे हैं।

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