October 10, 2026

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मानव तस्करी पर छह राज्यों की पुलिस ने बनाई साझा रणनीति

पंतनगर । मानव तस्करी की रोकथाम, पीड़ितों के सुरक्षित बचाव और पुनर्वास के साथ दोषियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए उत्तराखंड पुलिस ने पंतनगर स्थित गांधी हॉल सभागार में राज्य स्तरीय मानव तस्करी सम्मेलन आयोजित किया। गृह मंत्रालय के दिशा निर्देशों के तहत आयोजित सम्मेलन में उत्तराखंड सहित पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, बिहार और उत्तर प्रदेश के कुल 134 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें पुलिस अधिकारी, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और केंद्रीय एजेंसियों के प्रतिनिधि, सरकारी विभागों के अधिकारी, अभियोजन अधिकारी, गैर सरकारी संगठनों तथा बाल कल्याण समितियों के सदस्य शामिल रहे। सम्मेलन में अपर पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था वी. मुरुगेशन, पुलिस महानिरीक्षक प्रशिक्षण अनंत शंकर ताकवाले, पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं परिक्षेत्र निवेदिता कुकरेती, पुलिस उपमहानिरीक्षक अपराध एवं कानून व्यवस्था धीरेंद्र गुंज्याल और ऊधमसिंह नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति सहित चार जनपदों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और पुलिस अधीक्षक शामिल हुए। इसके अलावा पुलिस उपाधीक्षक, विभिन्न जनपदों की मानव तस्करी रोधी इकाइयों के नोडल अधिकारी और प्रभारी तथा अन्य पुलिसकर्मी भी उपस्थित रहे। सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए अपर पुलिस महानिदेशक वी. मुरुगेशन ने कहा कि मानव तस्करी गंभीर और संगठित अपराध है। इससे निपटने के लिए केवल पुलिस की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि सभी संबंधित विभागों और एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय जरूरी है। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने, कानूनी प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन करने और पीड़ितों के पुनर्वास पर विशेष जोर दिया। सम्मेलन में मानव तस्करी की रोकथाम से जुड़ी चुनौतियों, अपराधियों के बदलते तौर तरीकों और अंतरराज्यीय तथा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पहचान पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों में उत्तराखंड पुलिस के 21 राजपत्रित और 73 अराजपत्रित अधिकारी, अन्य राज्यों के छह पुलिस अधिकारी, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और केंद्रीय एजेंसियों के चार राजपत्रित अधिकारी तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के आठ कार्मिक शामिल रहे। इसके अलावा सिविल प्रशासन, अभियोजन, श्रम और बाल कल्याण विभागों के 14 अधिकारियों तथा गैर सरकारी संगठनों और बाल कल्याण समितियों के आठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

 


सम्मेलन में सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक एवं एनडीआरएफ और टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान से जुड़े विशेषज्ञ पी.एम. नायर, बनबसा स्थित एसडब्ल्यूआरसी के संस्थापक एवं सचिव जनक बहादुर चन्द, मदद फाउंडेशन के संस्थापक और बाल संरक्षण विशेषज्ञ राजेश मणि, जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन के राष्ट्रीय संयोजक एवं शक्ति वाहिनी के संस्थापक रविकान्त, संयुक्त निदेशक विधि जी.सी. पंचोली और सहायक अभियोजन अधिकारी अपर्णा अवस्थी सहित अन्य विशेषज्ञों ने विचार रखे। विशेषज्ञों ने आधुनिक विवेचना तकनीकों, साक्ष्य आधारित जांच, प्रभावी अभियोजन, पीड़ितों की समय पर पहचान और बचाव के बाद उनके संरक्षण एवं पुनर्वास की प्रक्रिया मजबूत बनाने के सुझाव दिए। उन्होंने पुलिस और अभियोजन के बीच बेहतर तालमेल, साक्ष्यों के व्यवस्थित संकलन तथा कानूनी प्रक्रिया का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी चर्चा की। सम्मेलन में कहा गया कि मानव तस्करी के मामलों में केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। अपराधियों के नेटवर्क, उनकी कार्यप्रणाली और नए तौर तरीकों की पहचान कर उनके खिलाफ समन्वित कार्रवाई जरूरी है। इसके लिए विभिन्न राज्यों की पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और संबंधित विभागों के बीच सूचनाओं का त्वरित आदान प्रदान तथा संदिग्ध गतिविधियों की समय पर पहचान पर जोर दिया गया। पीड़ित केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने पर भी विशेष चर्चा हुई। बच्चों और अन्य संवेदनशील वर्गों की समयबद्ध पहचान, सुरक्षित बचाव, बाल कल्याण समिति और सक्षम प्राधिकरणों के समक्ष प्रस्तुत करने तथा कानूनी और सामाजिक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर बल दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि पीड़ितों की गरिमा और सुरक्षा बनाए रखते हुए उनके प्रति संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसके लिए पुलिस, सरकारी विभागों, बाल कल्याण संस्थाओं और गैर सरकारी संगठनों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। सम्मेलन में हरिद्वार पुलिस ने दो महत्वपूर्ण मामलों की जानकारी साझा की। पहले मामले में 13 वर्षीय अपहृत बालिका को बिहार से सकुशल बरामद कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। दूसरे मामले में अपहृत चार माह के शिशु को सुरक्षित बरामद किया गया। इन दोनों मामलों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, त्वरित जांच और अंतरराज्यीय समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इन मामलों के माध्यम से बताया गया कि संवेदनशील घटनाओं में शुरुआती घंटों के दौरान सक्रियता, वैज्ञानिक विवेचना और विभिन्न पुलिस इकाइयों के बीच समन्वय पीड़ितों की सुरक्षित बरामदगी में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। पंतनगर में आयोजित सम्मेलन को विभिन्न राज्यों की पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, सरकारी विभागों और गैर सरकारी संगठनों के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया। सम्मेलन के समापन सत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 11 पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

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