बलिदानियों के सपनों का उत्तराखंड बनाना प्राथमिकताः धामी
मुख्यमंत्री ने शहीद स्मारक पर रामपुर तिराहा कांड के शहीदों को किया नमन
मुजफ्फरनगर/देहरादून (उद संवाददाता)। पृथक उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन के दौरान 2 अक्टूबर 1994 को हुए रामपुर तिराहा कांड में प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीदों की 32वीं पुण्यतिथि पर रविवार को मुजफ्फर नगर स्थित रामपुर तिराहा शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य अतिथि के रूप में शहीद स्मारक पहुंचकर पुष्पचक्र अर्पित किया और अमर बलिदानियों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। इस दौरान शहीदों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखा गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उत्तराखंड आंदोलनकारी, शहीद परिवारों के परिजन, जनप्रतिनिधि और क्षेत्रवासी मौजूद रहे। श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों और आंदोलनकारियों का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। रामपुर तिराहा की घटना भारतीय इतिहास की अत्यंत पीड़ादायक घटनाओं में से एक है। यह घटना उत्तराखंड राज्य आंदोलन के संघर्ष और बलिदान की गवाह है। उन्होंने कहा कि शहीदों के त्याग, तपस्या और बलिदान के बूते ही आज उत्तराखंड राज्य का अस्तित्व संभव हो सका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि शहीदों और आंदोलनकारियों के सपनों के अनुरूप सशक्त, समृद्ध और प्रगतिशील उत्तराखंड का निर्माण किया जाए। सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के विकास के साथ ही उत्तराखंड की पहचान और मूल स्वरूप को बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि देवभूमि की सांस्कृतिक धरोहर, पर्यावरण और परंपराओं के संरक्षण के लिए सरकार पूरी निष्ठा से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रें तक विकास की योजनाओं और मूलभूत सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल और रोजगार के क्षेत्र में लगातार काम किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और पर्वतीय क्षेत्रें से पलायन की समस्या को भी कम किया जा सके। सभा में उपस्थित अन्य वक्ताओं और वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों ने भी रामपुर तिराहा कांड के अमर शहीद रवींद्र रावत, सत्येंद्र चौहान, गिरीश भदरी, राजेश लखेड़ा, सूर्य प्रकाश थपलियाल, राजेश नेगी और अशोक कुमार के सर्वाेच्च बलिदान का पुण्य स्मरण किया। वक्ताओं ने कहा कि रामपुर तिराहा कांड की पीड़ा आज भी उत्तराखंडवासियों के मन में जीवित है। राज्य आंदोलनकारियों ने जिस उत्तराखंड की कल्पना की थी, उसे धरातल पर उतारना ही शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। श्रद्धांजलि सभा के दौरान शहीद परिवारों के परिजनों और आंदोलनकारियों में भी भावुकता का माहौल रहा। लोगों ने शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित कर बलिदानियों को नमन किया। वक्ताओं ने कहा कि राज्य निर्माण के लिए किए गए संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि युवा उत्तराखंड के निर्माण में शहीदों और आंदोलनकारियों के योगदान को समझ सकें। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, उत्तराखंड आंदोलनकारियों, शहीद परिवारों के परिजनों तथा बड़ी संख्या में क्षेत्रवासियों ने शहीद स्मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। दो मिनट का मौन रखकर अमर बलिदानियों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। श्रद्धांजलि सभा के दौरान पूरा परिसर शहीदों के अमर रहने के उद्घोष से गूंज उठा। वहीं इससे पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहादून में कचहरी परिसर स्थित शहीद स्थल पहुंचकर उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शहीदों के चित्रें पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके संघर्ष और बलिदान को नमन किया। यहां पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य के निर्माण के लिए आंदोलनकारियों ने संघर्ष, त्याग और बलिदान किया। उनके बलिदान से ही अलग उत्तराखण्ड राज्य का निर्माण संभव हुआ। राज्य निर्माण में उनके योगदान को सदैव स्मरण रखा जाएगा।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार राज्य आंदोलनकारियों और शहीद आंदोलनकारियों के परिजनों के सम्मान एवं कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। आंदोलनकारियों के सपनों के अनुरूप समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड का निर्माण ही शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।


