करवा चौथ आज: सुहागिनों ने रखा निर्जला व्रत, उत्तराखंड में रात 7:57 से 8:03 बजे तक चंद्रोदय का अनुमान
देहरादून। पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना को लेकर सुहागिन महिलाओं ने आज करवा चौथ का व्रत रखा। सुबह से ही महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ व्रत की शुरुआत की। दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद अब महिलाओं को शाम की पूजा और चंद्रमा के दर्शन का इंतजार रहेगा। चांद को अर्घ्य देने, पूजा-अर्चना करने और पति के हाथों जल ग्रहण करने के बाद महिलाएं अपना व्रत खोलेंगी। करवा चौथ को लेकर महिलाओं में खास उत्साह देखने को मिलता है। इस अवसर पर महिलाएं सोलह शृंगार करती हैं, पारंपरिक परिधान पहनती हैं और करवा माता की पूजा कर परिवार की सुख-शांति की कामना करती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं एकत्र होकर करवा चौथ की कथा सुनती हैं और पूजा की पारंपरिक रस्में निभाती हैं।
उत्तराखंड में शहरवार चंद्रोदय का समय
करवा चौथ के व्रत में चंद्रोदय का विशेष महत्व है। चंद्रमा के दर्शन और पूजा के बाद ही व्रत खोलने की परंपरा निभाई जाती है। उत्तराखंड के अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय के समय में कुछ मिनटों का अंतर रहने का अनुमान है।उपलब्ध जानकारी के अनुसार, देहरादून में रात 8 बजकर 2 मिनट पर चांद निकलने का अनुमान है। हरिद्वार में चंद्रोदय रात 8 बजकर 3 मिनट पर हो सकता है। रुड़की और ऋषिकेश में रात 8 बजकर 2 मिनट पर चंद्रमा के दर्शन होने की संभावना है।वहीं, नैनीताल में रात 7 बजकर 59 मिनट पर चंद्रोदय का अनुमान है। टिहरी में रात 8 बजे चांद दिखाई देने की संभावना है। रुद्रप्रयाग और अल्मोड़ा में रात 7 बजकर 57 मिनट पर चंद्रोदय का समय बताया गया है।
प्रमुख शहरों में अनुमानित चंद्रोदय का समय:
- रुद्रप्रयाग: रात 7:57 बजे
- अल्मोड़ा: रात 7:57 बजे
- नैनीताल: रात 7:59 बजे
- टिहरी: रात 8:00 बजे
- देहरादून: रात 8:02 बजे
- रुड़की: रात 8:02 बजे
- ऋषिकेश: रात 8:02 बजे
- हरिद्वार: रात 8:03 बजे
शाम को होगी करवा माता की पूजा
करवा चौथ पर महिलाएं शाम के समय शुभ मुहूर्त में करवा माता की पूजा करती हैं। पूजा के दौरान करवा, दीपक, रोली, अक्षत, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री का उपयोग किया जाता है। परंपरा के अनुसार महिलाएं करवा चौथ की कथा सुनती हैं और अपने पति की लंबी उम्र तथा परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करती हैं।पूजा के बाद महिलाओं को चंद्रमा निकलने का इंतजार रहता है। चांद दिखाई देने पर महिलाएं छलनी से चंद्रमा और फिर अपने पति का चेहरा देखकर पूजा करती हैं। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत का पारण किया जाता है। हालांकि, पूजा और व्रत की कुछ परंपराएं परिवार तथा स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।
करवा चौथ पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट
करवा चौथ की पूजा के लिए मिट्टी या तांबे का करवा और उसे ढकने के लिए ढक्कन रखना जरूरी माना जाता है। इसके साथ पारंपरिक रीति के अनुसार सात या 13 सीकें, माता करवा तथा भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की तस्वीर या प्रतिमा रखी जाती है। पूजा के लिए दीपक, रुई की बत्ती, घी, धूपबत्ती, रोली, कलावा, अक्षत यानी साबुत चावल, ताजे फूल और फूलों की माला भी तैयार रखें।
पूजा में जल से भरा तांबे या पीतल का लोटा, करवा चौथ व्रत कथा की पुस्तक, मिठाई, फल और प्रसाद के साथ दक्षिणा भी रखी जा सकती है। परिवार की परंपरा के अनुसार पूजन सामग्री में कुछ अंतर हो सकता है।
सोलह शृंगार की सामग्री
करवा चौथ पर महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनकर सोलह शृंगार करती हैं। इसके लिए सिंदूर, मेहंदी, चूड़ियां, बिछिया, बिंदी, काजल, महावर और नेल पॉलिश सहित शृंगार का सामान तैयार रखा जाता है। इसके अलावा मंगलसूत्र, मांग टीका, चुनरी, नए वस्त्र, कंघी, शीशा और अन्य सुहाग सामग्री भी पूजा और शृंगार की तैयारी में शामिल की जाती है।
चंद्र दर्शन और अर्घ्य के लिए रखें ये सामान
करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन के बाद अर्घ्य देकर व्रत खोलने की परंपरा है। इसके लिए पूजा की थाली में छलनी, दीपक, रुई की बत्ती, रोली, अक्षत और कलावा रखें। चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए जल से भरा लोटा और पूजा के बाद ग्रहण करने के लिए मिठाई या प्रसाद भी तैयार रखें।
पूजा से पहले कर लें तैयारी
करवा चौथ की पूजा के लिए सभी सामग्री एक स्थान पर व्यवस्थित कर लें, ताकि पूजा के समय किसी वस्तु की कमी न हो। महिलाएं अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय रीति-रिवाज के अनुसार पूजा की तैयारी कर सकती हैं। पूजा की विधि और शुभ मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग का ध्यान रखना उचित रहेगा।
मौसम और स्थानीय परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा चांद का दीदार
चंद्रोदय का बताया गया समय खगोलीय अनुमान पर आधारित है। पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय भौगोलिक स्थिति, आसपास की ऊंची पहाड़ियों और बादलों के कारण चंद्रमा दिखाई देने में कुछ देरी हो सकती है। इसलिए महिलाओं को अपने क्षेत्र की स्थानीय परिस्थितियों का भी ध्यान रखना चाहिए।करवा चौथ का यह पर्व पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। पूरे दिन व्रत रखने के बाद महिलाएं चंद्रमा की पूजा कर अपने वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की कामना करेंगी।


