फिर टली बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले की सुनवाई : फैसले की उम्मीद में हाई अलर्ट पर था बनभूलपुरा
अब 17 सितंबर को हो सकती है सुनवाई
हल्द्वानी (उद संवाददाता)। बनभूलपुरा के रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई एक बार फिर टल गई। मामले की अगली संभावित सुनवाई अब 17 सितंबर 2026 को होगी। बुधवार को सुनवाई को लेकर बनभूलपुरा में भी प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क रही। संभावित फैसले को देखते हुए क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित किया गया था और चप्पे चप्पे पर पुलिस बल तैनात किया गया था। हालांकि, सुनवाई टलने के बाद लोगों की नजरें अब 17 सितंबर को होने वाली संभावित सुनवाई पर टिक गई हैं। सुप्रीम कोर्ट में लंबित अब्दुल मतीन सिद्दीकी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में नौ सितंबर की कार्यवाही के बाद केस स्टेटस में मामले को लंबित दर्शाया गया है। इसमें 17 सितंबर को अगली संभावित लिस्टिंग की तारीख दर्ज की गई है। नौ सितंबर को मामला सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष सूचीबद्ध हुआ था। इस दौरान दायर अर्ली हियरिंग आवेदन का निस्तारण कर दिया गया, जबकि मूल सिविल अपील अभी लंबित है। बनभूलपुरा में बुधवार को संभावित सुनवाई और फैसले को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती के साथ संवेदनशील स्थानों पर निगरानी रखी गई। लोगों के बीच भी सुनवाई को लेकर दिनभर चर्चा बनी रही। सुनवाई टलने के बाद प्रशासन और पुलिस ने राहत की सांस ली, जबकि स्थानीय लोगों की निगाहें अब अगली संभावित तारीख पर हैं। यह मामला हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के आसपास रेलवे और राज्य सरकार की भूमि पर कथित अतिक्रमण हटाने से जुड़ा है। वर्षों से चल रहे इस विवाद में बड़ी संख्या में परिवारों के प्रभावित होने का मामला अदालत के समक्ष है। सुप्रीम कोर्ट के फरवरी 2026 के आदेश के अनुसार विवाद हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के आसपास रेलवे और राज्य सरकार की भूमि से कथित अनधिकृत कब्जेदारों को हटाने से संबंधित है। अदालत के समक्ष करीब 30-040 हेक्टेयर सार्वजनिक भूमि, 4,365 मकानों और 50 हजार से अधिक आबादी का आंकड़ा रखा गया था। बाद में रेलवे की ओर से परियोजना के लिए करीब 30-65 हेक्टेयर भूमि आवश्यक होने की जानकारी भी अदालत के सामने रखी गई। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जमीन खाली कराने के साथ ही प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के पहलू को भी महत्वपूर्ण माना है। फरवरी में अदालत ने उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन करने में सहायता देने के लिए पुनर्वास शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने परिवारवार पात्रता और सामाजिक आर्थिक स्थिति की रिपोर्ट भी मांगी थी। इस विवाद की महत्वपूर्ण कड़ी जुलाई 2024 की सुनवाई रही थी। उस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे और राज्य सरकार को यह स्पष्ट करने के निर्देश दिए थे कि रेलवे लाइन के स्थानांतरण और आवश्यक ढांचे के लिए वास्तव में कितनी भूमि की जरूरत है। साथ ही कितने परिवार प्रभावित होंगे और उनके पुनर्वास के लिए क्या व्यवस्था की जा सकती है, इसका भी आकलन करने को कहा गया था। अब बुधवार की सुनवाई टलने के बाद 17 सितंबर की संभावित तारीख महत्वपूर्ण हो गई है। इस दिन होने वाली सुनवाई में मामले की आगे की दिशा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के रुख पर सभी की निगाहें रहेंगी।


