राज्यपाल गुरमीत सिंह ने पांच साल में जनसेवा और सहभागिता से छोड़ी अमिट छाप : सीमांत क्षेत्रों का भ्रमण कर लोगों की समस्याओं और अपेक्षाओं को करीब से समझा
रिवर्स पलायन से महिला सशक्तीकरण तक पांच मिशनों पर रहा फोकस, सीमांत गांवों से विश्वविद्यालयों तक विकास को दी गति
देहरादून। उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने अपने पांच वर्षों के कार्यकाल में प्रदेश की जनता के बीच एक विशिष्ट पहचान बनाई। एक अनुशासित सैन्य अधिकारी की कर्तव्यनिष्ठा और संवेदनशील अभिभावक के वात्सल्य का अनूठा संगम उनके व्यक्तित्व में दिखाई दिया। यही विशेषता उन्हें लोकभवन की औपचारिक सीमाओं से आगे ले गई और आम लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया। उन्होंने 15 सितंबर 2021 को उत्तराखंड के राज्यपाल का पदभार संभाला था। उनके कार्यकाल में रिवर्स पलायन, बागवानी एवं जैविक खेती, महिला सशक्तीकरण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और तकनीकी नवाचार के साथ-साथ मौन पालन, सुगंधित पौधों की खेती, होमस्टे, स्वयं सहायता समूहों, मिलेट्स और स्टार्टअप को प्रोत्साहन देने पर विशेष जोर दिया गया।
सीमांत गांवों से लोकभवन तक सीधा संवाद
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सीधे संवाद को प्राथमिकता दी। वह माणा गांव में रात्रि प्रवास करने वाले पहले राज्यपाल बने। वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत उन्होंने सीमांत क्षेत्रों का भ्रमण कर वहां रहने वाले लोगों की समस्याओं, जरूरतों और अपेक्षाओं को करीब से समझा। उपलब्ध विवरण के अनुसार, प्रदेश के 57 वाइब्रेंट विलेज में से 32 गांवों का उन्होंने स्वयं भ्रमण किया। इन दौरों के माध्यम से सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं, आजीविका के अवसरों और स्थानीय विकास से जुड़े विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया।युवाओं के भविष्य, महिलाओं की आत्मनिर्भरता और पूर्व सैनिकों के कल्याण से जुड़े विषय भी उनके कार्यकाल की प्राथमिकताओं में शामिल रहे। लोकभवन में आमजन की पहुंच और संवाद को बढ़ावा देने की पहल ने राज्यपाल की संस्था को लोगों की समस्याओं और अपेक्षाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विश्वविद्यालयों में शोध और नवाचार को बढ़ावा
शिक्षा के क्षेत्र में राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को शोध, नवाचार और स्थानीय समस्याओं के समाधान से जोड़ने पर जोर दिया। इसी क्रम में ‘वन यूनिवर्सिटी-वन रिसर्च’ की पहल को प्रोत्साहित किया गया, जिसके तहत प्रत्येक विश्वविद्यालय को विशिष्ट क्षेत्रीय एवं वैश्विक समस्याओं पर केंद्रित शोध कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया।इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आधुनिक तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देने पर भी जोर रहा। प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए जन-जागरूकता अभियान को उन्होंने एक महत्वपूर्ण सामाजिक उद्देश्य के रूप में आगे बढ़ाया।
आधुनिक सोच के साथ आध्यात्मिक जुड़ाव
लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) के व्यक्तित्व में आधुनिक तकनीक के प्रति रुचि के साथ आध्यात्मिकता और हिमालय की सांस्कृतिक विरासत के प्रति गहरा लगाव भी दिखाई दिया। देवभूमि की धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक पहचान के प्रति उनका जुड़ाव उनके सार्वजनिक जीवन का अहम पक्ष रहा। शिव के उपासक राज्यपाल ने लोकभवन में शिव मंदिर का निर्माण भी कराया।उनकी धर्मपत्नी एवं प्रथम महिला गुरमीत कौर ने भी सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाई। उन्होंने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और महिला समूहों के साथ संवाद कर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने तथा सामाजिक गतिविधियों में आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यकाल की पहचान बनी जनसेवा और सहभागिता
राज्यपाल के रूप में गुरमीत सिंह के पांच वर्षों के कार्यकाल में सीमांत क्षेत्रों के भ्रमण, युवाओं को प्रोत्साहन, महिला सशक्तीकरण, उच्च शिक्षा में शोध और तकनीकी नवाचार जैसे विषयों को विशेष महत्व मिला। सैन्य जीवन से मिले अनुशासन और सार्वजनिक जीवन में संवाद की प्राथमिकता ने उनके कार्यकाल को विशिष्ट पहचान दी। उत्तराखंड में उनके कार्यकाल को लोकभवन और आमजन के बीच संवाद बढ़ाने, सीमांत क्षेत्रों की समस्याओं को समझने तथा शिक्षा, तकनीक और सामाजिक विकास से जुड़े मुद्दों को प्रोत्साहित करने के प्रयासों के लिए याद किया जाएगा।


