हरदा के निशाने पर सरकार: भाजपा नेता दुष्यंत गौतम को लेकर तीखी टिप्पणी : अंकिता प्रकरण से जुड़े सवालों और जिम्मेदारी को भुलाया नहीं जा सकता
सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए हरीश रावत ने टोल से लेकर एयरपोर्ट नामकरण तक उठाए कई मुद्दे, 2027 में बदलाव का किया दावा
देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर एक के बाद एक पोस्ट कर दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के टोल, जौलीग्रांट एयरपोर्ट के नामकरण, अंकिता भंडारी प्रकरण और प्रदेश की राजनीति को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। साथ ही अपनी धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा में मिले समर्थन को उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव में बदलाव का संकेत बताया।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर टोल व्यवस्था को लेकर रावत ने सवाल उठाते हुए कहा कि करीब 190 किलोमीटर की दूरी में पांच टोल प्लाजा होना आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए सवाल किया कि क्या एनएचएआई दो-तीन वर्षों में ही पूरी लागत वसूल करना चाहती है। रावत ने दावा किया कि भारी टोल खर्च के चलते कई लोग नए एक्सप्रेसवे के बजाय पुराने मार्ग से सफर करना पसंद कर रहे हैं। उन्होंने पूरे रूट पर तीन से अधिक टोल प्लाजा नहीं रखने की मांग की।
जौलीग्रांट एयरपोर्ट के नामकरण को लेकर भी पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में उनकी सरकार ने देहरादून एयरपोर्ट का नाम आदि गुरु शंकराचार्य के नाम पर रखने का फैसला किया था और इसका प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था। रावत के मुताबिक यह फैसला साधु-संतों और ज्योतिष पीठ के तत्कालीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की भावना के अनुरूप लिया गया था। उन्होंने मौजूदा सरकार से इस प्रस्ताव पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा।
अंकिता भंडारी हत्याकांड के संदर्भ में भी रावत ने भाजपा नेता दुष्यंत गौतम को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कई आरोप लगाते हुए संवैधानिक पद पर नियुक्ति को लेकर सवाल खड़े किए। साथ ही कहा कि अंकिता प्रकरण से जुड़े सवालों और जिम्मेदारी को भुलाया नहीं जा सकता तथा इस मामले में न्याय की मांग जारी रहेगी।
इस बीच हरीश रावत ने अपनी ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को मिले समर्थन को लेकर भी उत्साह जताया। उन्होंने जसपुर, काशीपुर, रामनगर, कालाढूंगी और हल्द्वानी में यात्रा के दौरान जुटे लोगों और वाहनों के काफिले की तस्वीरें साझा कीं। रावत ने कहा कि जनता का प्यार और विश्वास उनकी सबसे बड़ी पूंजी है।
उन्होंने इस जनसमर्थन को आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़ते हुए दावा किया कि जनता का यही विश्वास वर्ष 2027 में उत्तराखंड में राजनीतिक बदलाव का आधार बनेगा। रावत ने लिखा, “हर कदम जनसंवाद, हर दिल में विश्वास। जनता का प्यार ही 2027 में उत्तराखंड में बदलाव का मुख्य आधार बनेगा।”


