October 29, 2026

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रुद्रपुर के एचबी हॉस्पिटल में नीडल स्कोप से होगी हड्डियों और जोड़ों की जांच निःशुल्क जांच

30-31 अक्टूबर को विशेष चिकित्सा शिविर, फ्रांस के विशेषज्ञों के सहयोग से आधुनिक तकनीक से की जाएगी हड्डियों और जोड़ों की जांच

रुद्रपुर (उद संवाददाता)। हड्डियों, जोड़ों, रीढ़ की हड्डी और मांसपेशियों से संबंधित समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के लिए एचबी हॉस्पिटल में 30 और 31 अक्टूबर को विशेष चिकित्सा शिविर आयोजित किया जाएगा। अब तक दूरबीन विधि से मरीजों की जांच की जाती थी। अब इससे भी एडवांस नीडल तकनीक से जांच की जायेगी। रूद्रपुर में इस तरह का यह पहला जांच शिविर है। जिसमें इंजेक्शन की नीडल पर लगे कैमरे की मदद से रोग के बारे में जानकारी ली जायेगी। उसके बाद उपचार किया जाएगा। डॉ. हिमांशु बंसल के नेतृत्व में आयोजित होने वाले इस शिविर में फ्ांस से आए चिकित्सा विशेषज्ञों के सहयोग से मरीजों की जांच और चिकित्सकीय मूल्यांकन किया जाएगा। शिविर में मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श देने के साथ आधुनिक उपचार विकल्पों की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी। शिविर में आधुनिक और कम चीरा लगाने वाली चिकित्सा तकनीकों पर विशेष जोर रहेगा। मरीजों की समस्या और चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार उनकी जांच कर उपचार के उपयुक्त विकल्प सुझाए जाएंगे। शिविर का प्रमुख आकर्षण 7 स्टार नीडलस्कोप तकनीक होगी, जिसके माध्यम से चुनिंदा मामलों में शरीर के प्रभावित हिस्सों की आंतरिक संरचनाओं को सीधे देखकर जांच और उपचार संबंधी निर्णय लेने में सहायता मिल सकती है। नीडलस्कोप तकनीक में इंजेक्शन की सुई के भीतर लगे सूक्ष्म कैमरे की मदद से प्रभावित हिस्से को सीधे देखने की सुविधा मिल सकती है। पारंपरिक प्रक्रियाओं में शरीर के भीतर जोड़ों या अन्य संरचनाओं तक पहुंचने के लिए विशेष उपकरणों और छोटे चीरे की आवश्यकता हो सकती है। वहीं, नीडलस्कोप तकनीक में सुई के समान छोटे प्रवेश मार्ग से संबंधित हिस्से को देखने की संभावना रहती है। इससे चुनिंदा प्रक्रियाओं में प्रभावित अंगों की स्थिति का आकलन करने और लक्षित उपचार की योजना बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका उपयोग मरीज की स्थिति, चिकित्सकीय जरूरत और उपलब्ध तकनीकी सुविधाओं के आधार पर ही किया जाएगा। डॉ. हिमांशु बंसल ने बताया कि शरीर के भीतर की संरचनाओं को देखने के लिए अब तक कई प्रक्रियाओं में लेप्रोस्कोप या आर्थ्राेस्कोप जैसे उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। कमर दर्द के मरीजों में डिस्क या नसों के आसपास तथा घुटने के भीतर इंजेक्शन लगाने के दौरान चिकित्सकों को प्रभावित स्थान तक पहुंचने के लिए अल्ट्रासाउंड अथवा सी आर्म एक्सरे जैसी तकनीकों की मदद लेनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि नीडलस्कोप में सुई के भीतर कैमरा होने से कुछ प्रक्रियाओं के दौरान संबंधित हिस्से को सीधे देखने की सुविधा मिल सकती है। इससे नसों, डिस्क, घुटने के भीतर, लिगामेंट और अन्य संबंधित संरचनाओं के आसपास की स्थिति का आकलन करने में सहायता मिल सकती है। चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार इस तकनीक का उपयोग करते हुए इंजेक्शन लगाने की प्रक्रिया को अधिक सटीक बनाने की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है। डॉ. बंसल के अनुसार, इस तकनीक को भारत में पहली बार रुद्रपुर के माध्यम से शुरू करने की पहल की जा रही है। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा तकनीकों का उद्देश्य मरीजों को बेहतर जांच और उपचार के विकल्प उपलब्ध कराना है। हालांकि, प्रत्येक मरीज के लिए इस तकनीक की उपयोगिता उसकी चिकित्सकीय स्थिति और उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर तय की जाएगी। डॉ. हिमांशु बंसल ने कहा कि शिविर का उद्देश्य मरीजों तक उन्नत चिकित्सा ज्ञान और आधुनिक उपचार विकल्पों की जानकारी पहुंचाना है। हड्डियों, जोड़ों, रीढ़ की हड्डियों और मांसपेशियों से संबंधित समस्याओं का मूल्यांकन कर मरीजों को उनकी स्थिति के अनुरूप परामर्श दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी आधुनिक तकनीक के उपयोग में मरीज की सुरक्षा, सही निदान और उपचार की उपयुक्तता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। एचबी हॉस्पिटल, रुद्रपुर में आयोजित होने वाले विशेष चिकित्सा शिविर में परामर्श और पंजीकरण के लिए मरीज अस्पताल से संपर्क कर सकते हैं। शिविर के लिए संपर्क नंबर 9897080188 और 9411167108 जारी किए गए हैं। शिविर में हिîóयों, जोड़ों, रीढ़ की हड्डी और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं के लिए विशेषज्ञ परामर्श तथा आधुनिक उपचार विकल्पों की जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

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