पांच साल… कई कीर्तिमान : पुष्कर सिंह धामी ने लगातार पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा कर रचा नया इतिहास
उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए अपने निर्णायक नेतृत्व से गढ़ी नई गाथा
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लगातार पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा कर नया इतिहास रच दिया है। राज्य गठन के बाद वह सबसे लंबे समय तक लगातार मुख्यमंत्री रहने वाले पहले नेता बन गए हैं। यह उपलब्धि केवल एक राजनीतिक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि उस दौर का प्रतीक मानी जा रही है जिसमें उत्तराखंड ने विकास, निवेश, सांस्कृतिक अस्मिता और जनकल्याण के क्षेत्रें में कई महत्वपूर्ण कदम देखे। भले ही विपक्ष सरकार की नीतियों और फैसलों पर सवाल उठाता रहा हो, लेकिन यह भी तथ्य है कि धामी सरकार ने अपने कार्यकाल में कई ऐसे निर्णय लिए, जिन्होंने उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना। नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगा विरोधी कानून, महिलाओं को सरकारी नौकरियों में क्षैतिज आरक्षण, अतिक्रमण के खिलाफ अभियान और निवेश को बढ़ावा देने जैसे निर्णय सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में गिने जाते हैं। राज्य में निवेश आकर्षित करने के लिए आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए, जिनमें कई परियोजनाओं पर काम भी शुरू हो चुका है। रोजगार सृजन, आधारभूत ढांचे के विस्तार, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन क्षेत्र में भी सरकार ने अनेक योजनाओं को गति देने का प्रयास किया। धामी सरकार ने ष्विकल्प रहित संकल्पष् के मूल मंत्र के साथ विकास और जनकल्याण को प्राथमिकता देने का दावा किया। भाजपा का कहना है कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड आज देश के अग्रणी राज्यों में अपनी अलग पहचान बना रहा है। भाजपा ने इसे उत्तराखंड के विकास का ष्स्वर्णिम कालखंडष् बताया है और धामी के कार्यकाल का मूल्यांकन वर्षों से नहीं, बल्कि उनके ऐतिहासिक निर्णयों से याद रखा जाएगा। हालांकि, पांच वर्ष पूरे होने के साथ मुख्यमंत्री के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। अगले विधानसभा चुनाव से पहले एंटी इनकंबेंसी की धार को कम करना, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना, भ्रष्टाचार पर और प्रभावी अंकुश लगाना, जनसुविधाओं का विस्तार और मानसून के दौरान आपदा प्रबंधन को और मजबूत बनाना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताएं होंगी। आने वाले कुछ महीने मुख्यमंत्री धामी के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि सरकार अपने घोषित संकल्पों को धरातल पर उतारने में सफल रहती है तो यह कार्यकाल केवल एक रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उत्तराखंड की विकास यात्रा में एक निर्णायक अध्याय के रूप में भी याद किया जाएगा।
हैट्रिक की दहलीज पर धामी,तीसरे कार्यकाल की ओर मजबूत कदम

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश का नेतृत्व कर रहे हैं। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि चुनाव धामी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। ऐसे में यदि भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटती है तो धामी लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने वाले उत्तराखंड के पहले नेता बनकर नया राजनीतिक इतिहास रच सकते हैं। हाल के विभिन्न राजनीतिक सर्वेक्षणों में भी मुख्यमंत्री धामी की लोकप्रियता और स्वीकार्यता मजबूत दिखी है। सर्वे संकेत देते हैं कि भाजपा के लिए प्रदेश में सबसे भरोसेमंद चेहरा अभी भी पुष्कर सिंह धामी ही हैं। यही कारण है कि संगठन और सरकार, दोनों स्तरों पर पार्टी का पूरा भरोसा उनके नेतृत्व पर कायम है। हालांकि, 2027 की चुनावी चुनौती आसान नहीं होगी। एंटी इनकंबेंसी, रोजगार, आपदा प्रबंधन, भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण और विकास योजनाओं को और तेजी से धरातल पर उतारना सरकार के सामने बड़ी प्राथमिकताएं होंगी। इन चुनौतियों को सफलतापूर्वक पार करना ही धामी के तीसरे कार्यकाल का रास्ता तय करेगा। यदि भाजपा 2027 में फिर सत्ता हासिल करती है, तो पुष्कर सिंह धामी केवल चुनावी जीत ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड की राजनीति में लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने का ऐतिहासिक कीर्तिमान भी अपने नाम कर सकते हैं।
