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सिडकुल घोटाले की एसआईटी जांच के आदेश से मची खलबली

देहरादून। जीरो टॉलरेंस की नीति पर सरकार चलाने का खम भरने वाली प्रदेश की त्रिवेंद्र सरकार ने एक और बड़ा एक्शन लिया है। एनएच 74 भूमि मुआवजा घोटाले के बाद अब त्रिवेंद्र सरकार ने एक बार फिर भ्रष्टाचार का गढ़ बन चुके जनपद यूएसनगर में सामने आये करोड़ों के भ्रष्टाचार की जांच कराने के लिये पुलिस महानिदेशक को एसआईटी गठित कर पूरे मामले का पर्दाफाश कर भ्रष्टाचारियों पर कार्यवाही करने के आदेश दे दिये है। माना जा रहा है कि एसआईटी जांच में कई तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारी भी जांच के लपेटे में आ सकते हैं। वर्ष 2012 में प्रदेश में विजय बहुगुणा के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी, जबकि 2014 में हरीश रावत की ताजपोशी के बाद बहुगुणा की विदाई हुई और वर्ष 2017 तक हरीश के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार रही। ऐसे में माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव से पहले एसआईटी की जांच मामले को किस करवट ले जाएगी, यह कहना मुश्किल है। जांच में यदि बड़े नामों का खुलासा हुआ तो कांग्रेस को घेरने के लिए भाजपा को बड़ा मौका हाथ लग सकता है। वहीं दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री बिजय बहुगुणा के अब भाजपा के पाले में आने के बाद भाजपा में भी बेचैनी है। उल्लेखनीय है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस यानी विजय बहुगुणा और हरीश रावत सरकार के दौरान जनपद ऊधमसिंह नगर के रूद्रपुर समेत अन्य औद्योगिक क्षेत्र में कराये गये निर्माण कार्यों के साथ ही नियुक्तियों के लिये सरकारी खजाने की जमकर बंदरबांट की गई। इसमें तथाकथित रूप से अपने करीबियों को विभिन्न पदों पर नौकरी दिलाने,सिडकुल भूमि को चहेतों के जरिये विकसित करने के साथ ही यूपी निर्माण निगम को दिये गये ठेकों में भी भारी अनियमित्तायें बरती गई। इतना ही नहीं बिना निर्माण कार्य शुरू कराये बगैर ही करोड़ों रूपये का भुगतान तक एडवांस में करा दिया गया। वहीं वर्ष 2016 में भी कई नेताओं को स्थायी नौकरी दी गई। घोटाले का खुलासा होने पर मीडिया ने जब इस मामले को प्रमुखता से उठाया तो प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा की सरकार ने गोपनीय जांच करायी थी। सरकार ने सिडकुल में 2012 से 2017 तक हुए निर्माण कार्य और नियुक्तियों की जांच कराने के आदेश दिये हैं। गृह विभाग ने पुलिस महानिदेशक से इस मामले की जांच के लिए आईजी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में एसआईटी गठित कर एक माह में रिपोर्ट देने को कहा है। उल्लेखनीय है कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद कांग्रेस शासनकाल में हुए रुद्रपुर स्थित सिडकुल में करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ था। मामला संज्ञान में आने के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सिडकुल का स्पेशल ऑडिट करवाने के निर्देश दिए थे। तब ऑडिट में करोड़ों का घपला सामने आया था। ऑडिट के दौरान पता चला कि सिडकुल में यूपी निर्माण निगम द्वारा कराये गये कई कार्य मानकों पर खरे नहीं पाये गए। इसके अलावा सिडकुल क्षेत्र के बाहर भी कार्य कराये गये। प्राथमिक जांच में मामला सही पाये जाने पर सिडकुल के एक वरिष्ठ अधिकारी संजय रावत को निलंबित किया गया था। मामले में सिडकुल के तत्कालीन प्रबंध निदेशक पर भी उंगली उठी थी। इसको देखते हुए मुख्य सचिव स्तर से मामले की जांच को कहा गया था। उसके बाद लंबे समय से मामला ठंडे बस्ते में पड़ा था। मंगलवार को गृह विभाग की ओर से सिडकुल में 2012 से लेकर 2017 तक अवस्थापना सुविधाओं के निर्माण, नियुक्तियों व अन्य मामलों की जांच के लिए एसआईटी गठित करने के निर्देश दिये हैं। शासन की ओर से पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी को पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में एसआईटी गठित कर एक माह में जांच कर रिपोर्ट शासन को देने के निर्देश दिये गये हैं।

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