धूमधाम से मनाया करवा चौथ का पर्व: घंटों इंतजार के बाद लुकाछिपी के बीच हुआ चांद का दीदार
देहरादून। प्रदेशभर में करवा चौथ का पर्व पारंपरिक रीति-रिवाज और उत्साह के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना को लेकर दिनभर निर्जला व्रत रखा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती गीता धामी के साथ करवा चौथ का पावन पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों एवं हर्षाेल्लास के साथ मनाया।मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर समस्त प्रदेशवासियों को करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि करवा चौथ का पर्व हमारी समृद्ध भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों, अटूट विश्वास, प्रेम एवं समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति में ऐसे पर्व पारिवारिक रिश्तों को और अधिक मजबूत बनाने के साथ ही समाज में प्रेम, सद्भाव और आपसी विश्वास की भावना को सुदृढ़ करते हैं। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से सभी परिवारों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं खुशहाली की कामना की। वहीं सुबह से ही महिलाओं में पर्व को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। शाम को महिलाओं ने घरों और मंदिरों में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और करवा चौथ की कथा सुनी। इसके बाद सभी को चंद्रमा के दर्शन का इंतजार रहा। हालांकि कई क्षेत्रो में मौसम खराब होने और बारिश के चलते निर्धारित समय पर चांद दिखाई नहीं दिया। रात्रि आठ बजे चद्रोदय होने के बावजूद कई जगह आसमान में चांद निकलने के बाद बादलों के छिप गया। मौसम खराब होने से घंटों इंतजार के बाद चांद की लुकाछिपी के बीच दीदार हुआ। इससे महिलाओं का इंतजार और लंबा हो गया, लेकिन उनके उत्साह में कोई कमी नहीं आई।परंपरा के अनुसार चंद्रमा के दर्शन करने के बाद महिलाओं ने छलनी से चांद और अपने पति का दीदार किया। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा-अर्चना की और पति के हाथों जल ग्रहण कर अपना निर्जला व्रत खोला। करवा चौथ भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास और सुखी दांपत्य जीवन का प्रतीक माना जाता है।


