October 15, 2026

Uttaranchal Darpan

Hindi Newsportal

‘कथित वीआईपी को राजभवन भेजना उत्तराखंड के मुंह पर तमाचा’: कांग्रेस

अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच को लेकर कांग्रेस फिर मुखर, राजभवन कूच
देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच और कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर भाजपा सरकार पर हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच, कथित वीआईपी की भूमिका सार्वजनिक करने और सिक्किम के राज्यपाल पद पर दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति वापस लेने की मांग उठाई। वहीं कांग्रेस नेताओं ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी का खुलासा करने की मांग को लेकर राजभवन कूच किया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने राजभवन गेट के सामने धरने पर बैठकर दुष्यंत कुमार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि अंकिता भंडारी का मामला उत्तराखंड की अस्मिता और स्वाभिमान से जुड़ा है।
पत्रकार वार्ता में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रीतम सिंह, हरक सिंह रावत और महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला सहित अन्य नेता मौजूद रहे। नेताओं ने आरोप लगाया कि हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका से जुड़े सवालों का अब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। कांग्रेस ने कहा कि जब तक इस मामले में पूरी पारदर्शिता नहीं आती, पार्टी पीड़ित परिवार के साथ खड़ी रहेगी।
ज्योति रौतेला बोलीं- पीड़ित परिवार का संघर्ष जारी रहेगा
महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने आरोप लगाया कि अंकिता को न्याय दिलाने के लिए उसके माता-पिता लगातार संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि कथित वीआईपी को लेकर आरोपों के बीच ऐसी नियुक्ति से कई सवाल खड़े होते हैं।
रौतेला ने कहा कि कांग्रेस अंकिता के माता-पिता के साथ खड़ी है और जब तक गौतम की नियुक्ति वापस नहीं ली जाती, तब तक इस मुद्दे को उठाती रहेगी।

गणेश गोदियाल ने जांच पर उठाए सवाल: अंकिता ने वीआईपी के साथ जाने के लिए दबाव बनाए जाने की बात कही थी
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पहलू की जांच को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है और मामले को भटकाने की कोशिश हुई।
गोदियाल ने अंकिता और उसके मित्र पुष्प के बीच हुई कथित बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि अंकिता ने वीआईपी के साथ जाने के लिए दबाव बनाए जाने की बात कही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय मामले से जुड़े तथ्यों को लेकर भ्रम फैलाया गया और कथित वीआईपी के सवाल को गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने सोशल मीडिया पर उर्मिला सनावर और उनके पति, पूर्व विधायक, की ओर से लगाए गए आरोपों का भी उल्लेख किया। गोदियाल ने मांग की कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और किसी भी व्यक्ति को राजनीतिक संबंधों के आधार पर संरक्षण न मिले। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उत्तराखंड यात्राओं का जिक्र करते हुए कहा कि इस मामले पर उनकी चुप्पी को लेकर भी सवाल उठते हैं। गोदियाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए प्रदेशवासियों से अंकिता को न्याय दिलाने के लिए आगे आने की अपील की। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि घटनास्थल पर सबूत नष्ट करने के उद्देश्य से बुलडोजर चलाया गया था। ये आरोप कांग्रेस नेताओं की ओर से लगाए गए हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
‘अंकिता ने उत्तराखंड की अस्मिता के लिए प्राण दिए’: हरीश रावत
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड ने उत्तराखंड की अस्मिता और स्वाभिमान को गहरी चोट पहुंचाई। उन्होंने कहा कि अंकिता ने कथित दबाव के आगे झुकने के बजाय अपने प्राण गंवाए और उसका संघर्ष प्रदेश की बेटियों की गरिमा तथा सुरक्षा से जुड़ा सवाल बन गया।रावत ने कहा कि यह केवल एक परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि उन तमाम माता-पिताओं की चिंता का विषय है जो अपनी बेटियों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर आशंकित रहते हैं। दिल्ली के इंडिया गेट पर अंकिता के माता-पिता के धरने और उन्हें हिरासत में लिए जाने की खबर का उल्लेख करते हुए रावत ने कार्रवाई की निंदा की। उन्होंने कहा कि परिवार लंबे समय से न्याय की मांग कर रहा है और उसकी आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए।

सिटिंग जज की निगरानी में जांच की मांग
हरीश रावत ने कहा कि कांग्रेस ने मामले की सीबीआई जांच उच्च न्यायालय के किसी मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि सीबीआई कथित वीआईपी की भूमिका की जांच किस दिशा में कर रही है और इस संबंध में अब तक क्या प्रगति हुई है। रावत ने कहा कि जांच एजेंसी को स्पष्ट करना चाहिए कि कथित वीआईपी के पहलू पर क्या कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने इसे उत्तराखंड के सम्मान से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि कथित वीआईपी को राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर नियुक्त किया जाना प्रदेश के स्वाभिमान पर चोट के समान है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *