शैलजा की चिट्टी के बाद भी हरदा की ‘धन्यवाद जनसंवाद यात्र’ में उमड़ा जनसैलाब: आईसीयू से निकलकर जनता के बीच आया हूं’
उधमसिंहनगर(उद ब्यूरो)। उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की अंदरूनी सियासत एक बार पिफर गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत की ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को पार्टी हाईकमान की आपत्ति के बावजूद सोमवार को जसपुर से आगे बढ़ाया गया। यात्रा में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, विधायक, पूर्व विधायक और बड़ी संख्या में समर्थक शामिल हुए। जगह-जगह कार्यकर्ताओं ने रावत का फूल-मालाओं और आतिशबाजी के साथ स्वागत किया।हरीश रावत ने सोमवार को जसपुर से यात्रा की शुरुआत की। उनके साथ विधायक प्रीतम सिंह, तिलक राज बेहड़, हरीश धामी, मनोज तिवारी, आदेश चौहान, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, द्वाराहाट विधायक मदन सिंह बिष्ट, पूर्व विधायक ललित पफर्स्वाण, हिमेश खर्कवाल और पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा समेत कई नेता नजर आए। यात्रा जसपुर से काशीपुर, रामनगर और कालाढूंगी होते हुए देर रात हल्द्वानी पहुंची। यहां स्वराज आश्रम में विधायक सुमित हृदयेश सहित पार्टी के वरिष्ठ पदाकिधारियों ने उनका स्वागत किया। यात्रा के दौरान रावत ने कहा कि वह गंभीर बीमारी के बाद स्वस्थ होकर उत्तराखंड लौटे हैं और जनता के साथ-साथ देवी-देवताओं के आशीर्वाद के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए लोगों के बीच पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि कई दिनों तक मेदांता अस्पताल के आईसीयू में रहने के बाद उन्हें नया जीवन मिला है। रावत ने यह भी कहा कि उनके सामने उत्तराखंड के स्वाभिमान और बदलाव की बड़ी चुनौती है। उन्होंने ईडी और भाजपा को लेकर भी अपने तेवर जाहिर किए और कहा कि उनके आत्मसम्मान को कुरेदा गया है और वह इससे भी लड़ेंगे। शैलजा की आपत्ति के बाद रावत की यात्रा में कांग्रेस के कई नेताओं की मौजूदगी ने पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। हरीश रावत की यात्रा को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी और एआईसीसी महासचिव कुमारी शैलजा ने उन्हें पत्र लिखकर यात्रा आगे नहीं बढ़ाने का आग्रह किया था। शैलजा ने कहा था कि यात्रा को लेकर न तो उनसे और न ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष से चर्चा की गई। उन्होंने रावत के कुछ हालिया बयानों पर भी नाराजगी जताते हुए चुनाव से पहले पार्टी में एकजुटता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया था। हाईकमान की आपत्ति के बावजूद रावत ने यात्रा जारी रखी। हालांकि पूरे सपफर के दौरान उन्होंने प्रदेश प्रभारी की चिट्टी पर सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की। रावत ने यात्रा को पार्टी का कार्यक्रम मानने से भी इनकार किया। जसपुर विधायक आदेश चौहान ने यात्रा का बचाव करते हुए इसे जनता से संवाद और उनका धन्यवाद करने का कार्यक्रम बताया। उन्होंने कहा कि रावत बीमारी से उबरने के बाद जनता के बीच जा रहे हैं।यात्रा में नेताओं और कार्यकर्ताओं की भीड़ को रावत के राजनीतिक प्रभाव और संगठन के भीतर उनके समर्थन के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि रावत लगातार पार्टी में गुटबाजी या बगावत की बात से इनकार करते रहे हैं। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव अब ज्यादा दूर नहीं हैं। ऐसे में कांग्रेस के सामने एक ओर भाजपा सरकार के खिलाफ चुनावी मुद्दों को धार देने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर नेतृत्व, कार्यक्रमों और चुनावी रणनीति को लेकर तालमेल बनाए रखना भी जरूरी है। हरीश रावत लंबे समय से उत्तराखंड कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। उनकी राजनीतिक सक्रियता और जनसंपर्क कार्यक्रमों को लेकर पार्टी नेतृत्व की असहजता ऐसे समय सामने आई है, जब कांग्रेस 2027 के चुनाव की तैयारी में जुटने वाली है। उत्तराखंड कांग्रेस के लिए यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2027 के विधानसभा चुनाव अब ज्यादा दूर नहीं हैं। पार्टी को जहां सरकार के खिलापफ चुनावी मुद्दों को धार देने की तैयारी करनी है, वहीं संगठन के भीतर नेतृत्व, कार्यक्रमों और चुनावी रणनीति को लेकर तालमेल भी कायम रखना होगा। दूसरी ओर रावत लगातार जनता के बीच अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं और कांग्रेस को मजबूत करने की बात कर रहे हैं।



समर्थकों ने पारंपरिक वेशभूषा में रावत का अभिनंदन किया
काशीपुर। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा के काशीपुर पहुंचने पर स्टेडियम चौक, खरमासी, रमपुरा और धनौरी में क्षेत्रवासियों ने उनका जोरदार स्वागत किया। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के साथ सल्ट क्षेत्र से पहुंचे उनके समर्थकों ने पारंपरिक वेशभूषा में रावत का अभिनंदन किया।रावत ने स्वागत के लिए क्षेत्रवासियों और सल्ट से पहुंचे अपने समर्थकों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि जिस आत्मीयता, उत्साह और गर्मजोशी के साथ लोगों ने उनका स्वागत किया, उससे वह अभिभूत हैं। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान उमड़ रही भीड़ और लोगों का अपार स्नेह उनके लिए बेहद भावुक करने वाला है। जनता का विश्वास, अपनापन और आशीर्वाद ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।


