विष्णुगाड-पीपलकोटी टनल हादसा: मुआवजे और हादसे की जांच को लेकर मजदूरों में आक्रोश, मंत्री का घेराव
मदन कौशिक ने लिया रेस्क्यू अभियान का जायजा, रेस्क्यू अभियान जारी
चमोली। विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टेल रेस टनल में 13 अगस्त को हुए हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान जारी है। इसी बीच मृतकों के परिजनों को 5 लाख और घायलों को 1 लाख की अनुग्रह राशि दिए जाने संबंधी THDC के पत्र की जानकारी सामने आने के बाद मजदूरों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया।शनिवार को मौके पर पहुंचे आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक को परियोजना के श्रमिकों के विरोध का सामना करना पड़ा। आक्रोशित श्रमिकों ने मंत्री का घेराव करते हुए मृतकों के परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने और हादसे की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। काफी देर तक मौके पर हंगामे की स्थिति बनी रही।मजदूरों के विरोध के बाद मंत्री ने परियोजना की कंपनी THDC को मुआवजे के संबंध में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही जांच पूरी होने तक परियोजना का कार्य बंद रखने के निर्देश दिए गए। इसके बाद श्रमिक शांत हुए। हादसे के बाद टनल के अंदर फंसे श्रमिकों की तलाश के लिए रेस्क्यू अभियान लगातार चलाया जा रहा है। बचाव दल टनल के भीतर सर्च ऑपरेशन के साथ-साथ जमा पानी को बाहर निकालने में जुटे हैं।शनिवार को रेस्क्यू अभियान के दौरान श्रमिक देवनाथ को टनल से बाहर निकाला गया, लेकिन चिकित्सकों ने स्वास्थ्य जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रशासन के अनुसार हादसे में कुल 22 श्रमिक प्रभावित हुए हैं। इनमें से 12 श्रमिकों को बाहर निकाला जा चुका है, जबकि आठ श्रमिकों की मौत हो चुकी है और दो श्रमिक अभी लापता हैं।आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने शनिवार को घटनास्थल पर पहुंचकर बचाव अभियान की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों और रेस्क्यू टीमों से अभियान की प्रगति की जानकारी ली।मंत्री ने सभी उपलब्ध संसाधनों और मशीनरी के बेहतर समन्वय के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि टनल में फंसे प्रत्येक श्रमिक की जान बेहद महत्वपूर्ण है और सरकार की प्राथमिकता सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालना है।फिलहाल दो लापता श्रमिकों की तलाश जारी है। वहीं, मुआवजे और हादसे की जांच को लेकर श्रमिकों और स्थानीय लोगों का आक्रोश इस घटना के बाद एक बड़ा मुद्दा बन गया है।

