आखिर रुद्रपुर का माहौल बिगाड़ने के पीछे किसकी भूमिका?
हादसे को मारपीट का रूप देकर शहर का माहौल बिगाड़कर कौन सेंकना चाहता था राजनीतिक रोटियां?
रुद्रपुर। एक सड़क हादसा आखिर देखते ही देखते मारपीट की घटना कैसे बन गया? हादसे और मारपीट की कहानी के पीछे आखिर कौन था? कौन इस पूरे मामले से राजनीतिक फायदा उठाना चाहता था और कौन रुद्रपुर के माहौल में अशांति फैलाकर शहर को तनाव की आग में झोंकने का प्रयास कर रहा था? ये सवाल अब इसलिए और गंभीर हो गए हैं क्योंकि पुलिस की प्रारंभिक जांच और घटनास्थल की सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद घटनाक्रम की तस्वीर ही बदल गई। जिस घटना को लेकर मारपीट का दावा किया जा रहा था उसमें सीसीटीवी में वाहन और स्कूटी की टक्कर दिखाई दे रही है लेकिन घायलों पर हमले का कोई दृश्य सामने नहीं आया।हादसे के बाद मामला बढ़ा और वाल्मीकि समाज तथा नगर निगम के पर्यावरण मित्रों ने सफाई कार्य का बहिष्कार कर निगम परिसर में धरना शुरू कर दिया। यानी एक सड़क हादसा धीरे-धीरे शहर की सफाई व्यवस्था और सार्वजनिक माहौल से जुड़े बड़े विवाद में बदल गया। लेकिन जैसे-जैसे पुलिस की जांच आगे बढ़ी और सीसीटीवी फुटेज सामने आई वैसे-वैसे कई सवाल भी खड़े होने लगे।घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज में वाहन और स्कूटी के बीच टक्कर होती दिखाई दे रही है। टक्कर के बाद घायलों पर किसी व्यक्ति द्वारा हमला किए जाने का कोई दृश्य सामने नहीं आया। पुलिस की प्रारंभिक जांच में भी मारपीट के तथ्य नहीं मिले हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब घटनास्थल की तस्वीर सड़क हादसे की ओर इशारा कर रही थी तो फिर इसे मारपीट का रूप देने की कहानी कहां से शुरू हुई?सीसीटीवी सामने आने के बाद धरना स्थल पर मौजूद लोगों के बीच भी यही सवाल चर्चा का विषय बन गया। आखिर हादसे को हमले का रूप देकर माहौल गरमाने की जरूरत क्यों महसूस हुई? किसने लोगों के सामने मारपीट की कहानी रखी और किस आधार पर इसे आगे बढ़ाया गया?मामले में एक सीधा सवाल यह भी है कि यदि घायलों पर हमला किया गया था तो घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज में उसका कोई दृश्य क्यों नहीं है? कैमरे में टक्कर की घटना दिखाई दे रही है लेकिन उसके बाद घायलों पर हमला किए जाने का कोई दृश्य सामने नहीं आता। यही बिंदु अब पूरे विवाद की दिशा बदलने वाला साबित हो रहा है।दूसरा सवाल यह उठ रहा है कि यदि स्कूटी को जानबूझकर टक्कर मारी गई थी तो टक्कर के बाद वाहन चालक मौके पर क्यों रुका? घटना के बाद की परिस्थितियां भी जांच की अहम कड़ी बन सकती हैं। हालांकि इन सवालों का अंतिम जवाब पुलिस की विस्तृत जांच और संबंधित लोगों के बयानों से ही सामने आएगा।मामले में यह तथ्य भी सामने आया है कि घायलों के उपचार के लिए अस्पताल में तत्काल ऑनलाइन भुगतान किया गया। ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि यदि पूरा घटनाक्रम जानबूझकर हमला करने की साजिश थी तो घायलों के उपचार के लिए तत्काल भुगतान क्यों किया गया? इस पहलू की भी निष्पक्ष जांच जरूरी है ताकि घटना की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके।
सफाई कर्मचारी संघ ने कहा—हमें गुमराह किया गया
सीसीटीवी और पुलिस की प्रारंभिक जांच के बाद नगर निगम के सफाई कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों का रुख भी बदलता दिखाई दिया। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि उन्हें हादसे की वास्तविकता बताए बिना मारपीट की कहानी सुनाकर गुमराह किया गया। पदाधिकारियों ने माना कि घटना की सच्चाई सामने आने के बाद उन्हें अहसास हुआ कि उनके सामने पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर नहीं रखी गई थी। उन्होंने इस पर अफसोस जताते हुए खुद को शर्मिंदा बताया और मंगलवार से काम पर लौटने की बात कही। पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम मोड़ तब आया जब सीसीटीवी फुटेज और पुलिस की प्रारंभिक जांच की जानकारी धरना स्थल तक पहुंची। वहां मौजूद लोगों के बीच भी यह सवाल उठने लगा कि आखिर हादसे को मारपीट का रूप क्यों दिया गया? जब सीसीटीवी में टक्कर दिखाई दे रही है और मारपीट का कोई दृश्य नहीं है तो फिर यह कहानी किसने और क्यों आगे बढ़ाई?
हादसे को मारपीट का रूप देने के पीछे आखिर कौन था?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक सड़क हादसे को मारपीट का रूप देने से किसका फायदा था? कौन इस मामले को तूल देकर राजनीतिक लाभ हासिल करना चाहता था? क्या किसी ने जानबूझकर शहर का माहौल गर्म करने की कोशिश की या फिर गलत सूचना और गलतफहमी के कारण मामला इतना बढ़ गया? इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है। लेकिन पुलिस की प्रारंभिक जांच और सीसीटीवी फुटेज ने मामले की दिशा जरूर बदल दी है। अब पुलिस के सामने यह पता लगाना जरूरी है कि हादसे के बाद सबसे पहले मारपीट की कहानी किसने शुरू की और उसे आगे बढ़ाने में किन लोगों की भूमिका रही।
पुलिस की असली परीक्षा अब शुरू
इस पूरे मामले में पुलिस की वास्तविक परीक्षा अब शुरू हुई है। केवल यह स्पष्ट करना कि हादसा हुआ या मारपीट नहीं हुई पर्याप्त नहीं होगा। पुलिस को यह भी पता लगाना होगा कि घटना के बाद गलत सूचना किसने फैलाई और यदि जानबूझकर किसी ने हादसे को मारपीट का रूप देकर शहर का माहौल खराब करने का प्रयास किया तो उसके पीछे कौन लोग थे। रुद्रपुर जैसे शहर में किसी घटना को गलत तरीके से पेश कर तनाव पैदा करने का प्रयास किसी भी स्तर पर गंभीर विषय है। इसलिए जरूरी है कि पुलिस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और गहन जांच करे। सच्चाई सामने आए और यदि किसी ने जानबूझकर शहर को तनाव की आग में झोंकने का प्रयास किया है तो उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। सवाल यह है कि आखिर हादसे को मारपीट की कहानी में बदलकर रुद्रपुर का माहौल बिगाड़ने का प्रयास किसने किया और इसके पीछे उसका मकसद क्या था?
सभी चाहते हैं अभिषेक और उनके परिजनों को मिले न्याय
रुद्रपुर। मार्ग दुर्घटना में घायल अभिषेक कुमार और उनके परिवार को न्याय मिले यह मंशा धरना दे रहे लोगों समेत समाज के सभी लोगों की थी। हर कोई चाहता था कि अभिषेक जल्द स्वस्थ हों और दुर्घटना के जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई हो। लेकिन जिस घटना की वास्तविकता सड़क हादसे की थी उसे मारपीट की घटना के रूप में पेश किए जाने से समाज में तनाव बढ़ने लगा। मारपीट की बात कहकर समाज को गुमराह किया जा रहा था जबकि घटनास्थल की सीसीटीवी फुटेज और पुलिस की प्रारंभिक जांच हादसे की ओर इशारा कर रही थी। यही वजह रही कि एक हादसा धीरे-धीरे तनावपूर्ण विवाद में बदलता चला गया।
