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फेसबुक पोस्ट प्रतिबंधित होने पर यशपाल आर्य ने उठाए सवाल

देहरादून (उद संवाददाता)। उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने अपनी फेसबुक पोस्ट भारत में बार बार प्रतिबंधित होने का आरोप लगाते हुए सरकार और सोशल मीडिया मंच की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना और अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है। यशपाल आर्य ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि उनकी जिन पोस्टों को प्रतिबंधित किया गया, उनमें छात्रें, बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था और सरकार की नीतियों से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए गए थे। उन्होंने पूछा कि क्या अब सरकार की आलोचना करना भी अपराध माना जाने लगा है। उनका कहना था कि यदि जनता के सवाल और सरकार की आलोचना लोगों तक पहुंचने से रोक दी जाए तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि असहमति लोकतंत्र की आत्मा है और इसे अपराध की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आगे भी जनता के मुद्दों को उठाते रहेंगे और अपनी आवाज बुलंद करना जारी रखेंगे। यशपाल आर्य ने संबंधित सोशल मीडिया मंच से भी पारदर्शिता की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि किसी पोस्ट पर कार्रवाई की जाती है अथवा उसे किसी देश में प्रतिबंधित किया जाता है तो उसका स्पष्ट कारण और पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि लोगों का विश्वास बना रहे और यह स्पष्ट हो सके कि कार्रवाई किन आधारों पर की गई। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब कांग्रेस 17 जुलाई को देहरादून के परेड ग्राउंड में प्रस्तावित राहुल गांधी के श्छात्रें की गूंजश् कार्यक्रम की तैयारियों में जुटी है। कांग्रेस के अनुसार यह कार्यक्रम छात्रें और युवाओं के साथ सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि कार्यक्रम में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं, कॉलेज और विश्वविद्यालय के छात्र छात्रओं के साथ शिक्षा, रोजगार, भर्ती परीक्षाओं में देरी, पेपर लीक, बेरोजगारी और भविष्य से जुड़े विषयों पर संवाद होगा। कांग्रेस का दावा है कि यह पारंपरिक राजनीतिक सभा के बजाय प्रश्नोत्तर आधारित संवाद कार्यक्रम होगा, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र छात्रओं के शामिल होने की संभावना है।

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