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धामी कैबिनेट की बैठक में 18 प्रस्तावों पर मुहर

मोटरयान नियमावली और मदरसा शिक्षा में बदलाव,वन आरक्षी और दरोगा भर्ती की आयु सीमा में हुआ संशोधन
देहरादून (उद संवाददाता)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेश के विकास और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए 18 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। सचिवालय में आयोजित कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान मुख्यमंत्री के सचिव शैलेश बगोली ने बताया कि सरकार ने उत्तराखंड मोटरयान संशोधन नियमावली 2026 को मंजूरी देने के साथ ही शिक्षा, वन, परिवहन और शहरी विकास से जुड़े कई अहम नीतिगत बदलावों को हरी झंडी दिखाई है। इस बैठक में लिए गए फैसलों का सीधा असर राज्य की कानून व्यवस्था, रोजगार और बुनियादी ढांचे पर पड़ेगा।परिवहन और प्रवर्तन के क्षेत्र में बड़े बदलाव करते हुए कैबिनेट ने उत्तराखंड मोटरयान संशोधन नियमावली 2026 को स्वीकृति दे दी है, जिसके तहत अब परिवहन विभाग के प्रवर्तन अधिकारी भी निर्धारित वर्दी में नजर आएंगे। वहीं परिवहन विभाग के बेड़े को विस्तार देने के लिए बसों की खरीद पर भी बड़ा फैसला हुआ है। दरअसल पूर्व में विभाग को 100 बसें खरीदने की अनुमति दी गई थी, लेकिन जीएसटी दर 28 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत होने के कारण अब बची हुई राशि का उपयोग करते हुए कुल 109 बसें खरीदी जाएंगी। इसके अलावा आबकारी नीति के अनुरूप वाणिज्य कर विभाग ने भी अपनी नियमावली में संशोधन कर व्यय दर को छह प्रतिशत निर्धारित करने की मंजूरी दी है।शिक्षा और भर्ती नियमों में भी सरकार ने दूरगामी परिणाम वाले संशोधन किए हैं। मदरसा शिक्षा को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अब प्रदेश के कक्षा 1 से 8 तक के 452 मदरसों को जिला स्तर से मान्यता दी जाएगी, जबकि कक्षा 9 से 12 तक के लगभग 52 मदरसों को अब उत्तराखंड बोर्ड से मान्यता लेनी अनिवार्य होगी। भर्तियों के संबंध में कैबिनेट ने स्पष्ट किया है कि अब चयन की प्रतीक्षा सूची केवल एक वर्ष के लिए ही वैध मानी जाएगी। वन सेवा नियमावली में संशोधन करते हुए वन दरोगा भर्ती के लिए आयु सीमा 21 से 35 वर्ष और वन आरक्षी के लिए 18 से बढ़ाकर 25 वर्ष कर दी गई है। साथ ही वन सीमा क्षेत्रें में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए नई नीति 2026 को मंजूरी दी गई है, जो न केवल आजीविका बढ़ाएगी बल्कि मानव-हाथी संघर्ष को कम करने में भी सहायक होगी।कुंभ मेले और विकास कार्यों को गति देने के लिए वित्तीय अधिकारों का भी सरलीकरण किया गया है। अब एक करोड़ तक के कार्यों की स्वीकृति मेला अधिकारी और पांच करोड़ तक की स्वीकृति मंडलायुक्त स्तर से मिल सकेगी। लोक निर्माण विभाग में श्डीश् श्रेणी के ठेकेदारों को राहत देते हुए उनके कार्य की सीमा एक करोड़ से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ रुपये कर दी गई है। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना का दायरा बढ़ाकर 21 अशासकीय कॉलेजों को शामिल किया गया है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के क्रम में विशेष शिक्षा शिक्षकों की अर्हता संबंधी नियमावली को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।

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