विधानसभा के मंथन से निकला ‘आरक्षण का अमृत’
विधानसभा के विशेष सत्र में धामी सरकार की बड़ी सियासी पहल,छात्र संघ चुनाव में छात्रओं को दिया जाएगा पचास फीसदी आरक्षण
देहरादून। संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण के लिए लाया गया संविधान संशोधन प्रस्ताव गिरने के बाद से, सत्ता पक्ष एवं विपक्षी दलों द्वारा अपने आप को मातृशक्ति का सबसे बड़ा हिमायती साबित करने के लिए तमाम राजनीतिक दांवपेंच अपनाए जाकर जबरदस्त बयान बाजी का दौर जारी है। सत्ता पक्ष द्वारा यह स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है कि विपक्षी दल लोकसभा में महिलाओं को आरक्षण दिए जाने की राह में रोड़ा अटका रहे हैं, वहीं विपक्षी दल की मांग है कि वर्तमान संसदीय स्थिति के आधार पर ही महिला आरक्षण लागू कर दिया जाए। आरोप प्रत्यारोप के इसी सियासी दौर में उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार द्वारा विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित किया गया और लोकसभा में महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन प्रस्ताव गिराने के लिए विपक्षी दलों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया गया। आशा के अनुरूप उपरोक्त निंदा प्रस्ताव विगत रोज विधानसभा में बहुमत से पास हो गया । इस निंदा प्रस्ताव के द्वारा राज्य सरकार ने महिला आरक्षण के मसले पर अपना प्रबल समर्थन तो जाहिर कर ही दिया, साथ ही धामी सरकार ने उत्तराखंड में होने वाले छात्र संघ चुनाव में छात्रओं को पचास फीसदी आरक्षण दिए जाने की घोषणा करके एक बड़ी सियासी पहल भी कर दी है।नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर राज्य विधानसभा में आयोजित विशेष सत्र में शिक्षा मंत्री डॉ।धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड में भविष्य में होने वाले छात्र संघ चुनावों में छात्रओं को पचास फीसदी प्रतिशत प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। शिक्षा मंत्री के अनुसार, यदि महिलाओं को पर्याप्त अवसर दिया जाए तो वे नेतृत्व में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करती हैं, राज्य सरकार का संकल्प है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से आधी आबादी को उनका उचित अधिकार मिले। राज्य सरकार ने सहकारिता से लेकर शिक्षा क्षेत्र तक महिलाओं के लिए कई योजनाएं लागू कीं हैं, जिसका नतीजा यह सामने आया कि राज्य में सहकारी समितियों के चुनावों में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। उन्होंने कहा कि 33 फीसदी प्रतिनिधित्व देने से सहकारी समितियों के चुनाव में कुल 6486 निर्वाचित संचालकों में लगभग 39 प्रतिशत यानी 2517 महिलाएं विजेता रहीं, जबकि 668 समितियों में से 281 की कमान महिलाओं के हाथों में है। इसके अलावा राज्य में बालिकाओं को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा, मुफ्त पाठड्ढ पुस्तकें और ड्रेस उपलब्ध कराई जा रही है। सभी विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में बालिका शौचालय निर्माण का लक्ष्य पूर्ण किया जा चुका है। शिक्षा मंत्री के अनुसार प्रदेश में 39 कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रवास संचालित हैं, जहां मुफ्त शिक्षा दी जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि सुरक्षा, परिवहन, परामर्श एवं सह-शैक्षिक गतिविधियों के माध्यम से बालिकाओं का सर्वांगीण विकास किया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि उच्च शिक्षा में बालिकाओं का ड्रॉपआउट 12 प्रतिशत कम हुआ है और सकल नामांकन अनुपात 48 प्रतिशत तक पहुंच गया है। मातृशक्ति को सक्षम बनाने के दिशा में किए जा रहे सरकारी प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए शिक्षा मंत्री ने आगे बताया कि विद्या ज्योति छात्रवृत्ति और गौरा देवी कन्या धन योजना के माध्यम से बालिकाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। साथ ही, तीन विश्वविद्यालयों में महिला कुलपतियों की नियुक्ति कर महिला नेतृत्व को बढ़ावा दिया गया है।
