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यूकेएसएसएससी परीक्षा मामले में बड़ा खुलासा : कुछ प्रश्नों के फोटो एक महिला असिस्टेंट प्रोफेसर तक पहुंचे, जिन्हें खालिद मलिक ने अपने मोबाइल से भेजे थे

देहरादून(उद संवाददाता)। स्नातक स्तरीय पदों के लिए उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएस एसएससी) द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षा को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाई गई सनसनीखेज खबरों की सच्चाई अब सामने आ चुकी है। सरकार को बदनाम करने और परीक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े करने के उद्देश्य से कुछ लोगों द्वारा प्रश्नपत्रें के फोटो वायरल करने की साजिश रची गई थी। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष गणेश सिंह मर्तोलिया ने मीडिया से बातचीत में पेपर लीक के दावे को खारिज कर मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने के आदेश दिये है।  प्रारम्भिक जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि वास्तव में किसी प्रकार का पेपर लीक नहीं हुआ, बल्कि यह मामला परीक्षा समाप्त होने के बाद सोशल मीडिया पर फैलाए गए भ्रामक प्रचार का है। जानकारी के अनुसार 21 सितम्बर को सुबह 11 बजे से स्नातक स्तरीय पदों के लिए ििलखत परीक्षा का आयोजन किया गया। दोपहर 1ः30 बजे परीक्षा समाप्त होने के बाद सोशल मीडिया पर अचानक कुछ स्क्रीनशॉट वायरल होने लगे, जिनमें यह दावा किया गया कि प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होते ही बाहर आ गया था। जबकि एसआईटी की प्रारम्भिक जांच में यह तथ्य सामने आया कि परीक्षा शुरू होने से पहले किसी भी जिले से पेपर लीक होने की कोई शिकायत नहीं थी। जांच में खुलासा हुआ कि परीक्षा के दौरान कुछ प्रश्नों के फोटो एक महिला असिस्टेंट प्रोफेसर तक पहुंचे, जिन्हें उनके परिचित खालिद मलिक ने अपने मोबाइल से भेजे थे। खालिद ने संदेश में यह जताया कि उसकी बहन प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही है और उसे उत्तर चाहिए। महिला ने केवल शैक्षणिक मदद के तौर पर उत्तर फोटो के माध्यम से भेज दिए। इसके बाद इन प्रश्नों के स्क्रीनशॉट्स को सहेजकर कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि वायरल किए गए इन स्क्रीनशॉट्स को जानबूझकर सनसनीखेज बनाकर प्रस्तुत किया गया और सरकार की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया। जबकि वस्तुतः यह केवल एक परीक्षा केंद्र से किसी व्यक्ति द्वारा प्रश्नपत्र के कुछ अंश फोटो खींचकर भेजने का मामला था, जिसे पेपर लीक का रूप देने की कोशिश की गई।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून द्वारा मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत विशेष जांच दल का गठन किया गया। एसआईटी की जांच में किसी संगठित गिरोह या पेपर लीक माफिया की संलिप्तता नहीं पाई गई। यह साफ हो चुका है कि सरकार और आयोग की परीक्षा प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित रही और प्रश्नपत्र का लीक होना असत्य है। सरकार ने इस घटना को परीक्षा व्यवस्था को बदनाम करने की सुनियोजित साजिश करार देते हुए साफ किया है कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर मुख्य अभियुक्तों की पहचान कर ली है और उनकी गिरफ्तारी के लिए टीमें भेज दी गई हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि सोशल मीडिया पर बिना किसी तथ्यात्मक पुष्टि के अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।इस पूरे प्रकरण ने यह साबित कर दिया है कि सरकार की परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित है। पेपर लीक के नाम पर फैलाए जा रहे दुष्प्रचार का कोई आधार नहीं है, बल्कि यह सिर्फ एक कोशिश थी जिससे युवा अभ्यर्थियों के बीच भ्रम पैदा हो और जनता का विश्वास परीक्षा प्रणाली से डगमगाया जा सके। सरकार ने दृढ़ता से कहा है कि ऐसे प्रयासों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा और दोषियों को कठोरतम दंड दिया जाएगा।

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