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मछली ने मुंह खोला तो कांटा फंसा : राजनीतिक करियर में हरक सिंह भी ऐसे ही फंसते रहे

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डा. हरक सिंह रावत एक बार फिर अपने बयानों से सुर्खियों में
देहरादून। उत्तराखंड में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डा. हरक सिंह रावत एक बार फिर अपने बयानों से सुर्खियों में है। श्री रावत बीजेपी पर भ्रष्टचार के आरोप लगा रहे है और जब तक भाजपा की अंत्येष्ठि न कर ले जबतक माला नहीं पहनेंगे का संकल्प लेते दिखाई दे रहे है। अब बीजेपी से ज्यादा कांग्रेस अचंभित है कि एका एक हरक सिंह रावत ऐसे कैसे मुखर हो गए है। हरक सिंह का कहना है कि कॉर्बेट पाखरो मामले में सीबीआई ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है। हालांकि अन्य मामले उनपर चल रहे है। सीबीआई जांच का उनके साथ कई सालों का नाता रहा है, तिवारी शासन काल में राजस्व मंत्री रहते हुए उनपर जैनी मामले की जांच ही फिर क्लीन चिट मिली। इसके बाद कई और मामले हुए, कांग्रेस बीजेपी में रहते हरक सिंह ने जब जब मछली की तरह बड़ा मुंह खोला तब तब वे कांटे में फंसते चले गए। चार साल पहले बड़बोले पन्न ने हरक सिंह रावत को भाजपा से निकाल दिया गया, अपनी करणी पर वो खूब रोए भी क्योंकि उन्हें यकीन करना मुश्किल था कि उनके साथ बीजेपी ऐसा कर सकती है। जबकि उनपर स्वयं की हरकते और कॉर्बेट पाखरो मामले में आरोप लगे। बाद में हरक ने कांग्रेस ज्वॉइन कर ली किंतु उन्हें टिकट नहीं मिला । अब यह तो बात रही उत्तराखंड की राजनीति की, जो आए दिन किसी न किसी वजह से सुर्खियों में रहती ही है। मगर आज राजनीति से हटकर बात करेंगे। हरक सिंह रावत का विवादों से रिश्ताः हरक सिंह रावत के जीवन के उन पहलुओं के बारे में जिस वजह से वे विवादों में आए थे। एन डी तिवारी शासनकाल में वे जैनी प्रकरण से सबसे ज्यादा चर्चाओं में आए थे। पहली निर्वाचित सरकार को अनेकों बार अपने कैबिनेट मंत्री हरक सिंह चलते शर्मसार होना पड़ा था। हरक सिंह के राजनीतिक करियर में उनके ऊपर कई तरह के आरोप लगे हैं। 2003 में उन्हें जैनी प्रकरण में अपना मंत्री पद तक गंवाना पड़ा था। क्या था जैनी प्रकरण ? – 2003 में जैनी नाम की एक महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया था और यह कहकर सनसनी फैला दी थी कि उनके बच्चे का पिता हरक सिंह रावत है। दल्ली से लेकर देहरादून तक जैनी सेक्स प्रकरण ने पूरे सिस्टम को ही हिलाकर रख दिया था। नारायण दत्त तिवारी सरकार के गठन होने के एक साल बाद ही सरकार में राजस्व मंत्री हरक सिंह रावत पर असम की एक महिला इंदिरा देवराऊ उर्फ जैनी ने आरोप लगाया था कि हरक सिंह रावत ने उन्हें देहरादून स्थित अपने घर में काम दिलाने के बहाने रखा और उसके साथ बलात्कार किया। वह उनके बच्चे की मां बनी। इसके बाद उत्तराखण्ड की राजनीति में जैसे तूफान आ गया। विपक्ष ने इसका भरपूर फायदा उठाते हुए इस मुद्दे पर जमकर तिवारी सरकार की घेराबंदी कर दी। और मजबूरन हरक सिंह रावत को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। बाद में सीबीआई जांच में हरक सिंह रावत को क्लीन चिट दे दी गई थी। इस सेक्स स्कैंडल का असर यह हुआ कि वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सत्ता खो दी। हालांकि डीएनए टेस्ट में क्लीन चिट मिलने पर हरक सिंह रावत अपना विधानसभा चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे और राज्य में बीजेपी की सरकार आने पर नेता प्रतिपक्ष बने। फिर हुआ सेक्स स्कैंडल : 2013 में एक बार फिर हरक सिंह रावत आरोपों से घिर गए और उनकी जमकर थू-थू हुई। हरक सिंह पर शारीरिक शोषण का आरोप लगा।मेरठ निवासी एक महिला ने हरक सिंह पर शोषण का आरोप लगाया था। उस वक्त हरक सिंह विजय बहुगुणा सरकार में मंत्री थे। फिर फरवरी 2014 में मेरठ की रहने वाली महिला ने दिल्ली के सफदरगंज थाने में हरक सिंह के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। बाद में दोनों पक्षों की कथित सहमति के बाद मामले को रफादफा कर दिया गया। 29 जुलाई 2016 में उक्त महिला ने फिर से हरक के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया। यह स्कैंडल जैनी कांड की तरह चर्चित तो नहीं हुआ। लेकिन हरक सिंह रावत ने इस घटनाक्रम को अपने ही कांग्रेस मित्रों की साजिश माना। खास तौर पर हरीश रावत गुट पर उन्होंने तीखे हमले किए। कांग्रेस से बगावतः 18 मार्च 2016 में हरक सिंह ने अन्य विधायकों के साथ हरीश रावत सरकार के खिलाफ बगावत की और भाजपा को ज्वॉइन कर लिया। विवादित रहने वाले हरक सिंह रावत स्टिंग ऑपरेशन की वजह से भी सुर्खियों में आए। 2016 में हरीश रावत सरकार को गिराने की साजिश में मुख्य भूमिका हरक सिंह की रही। बीजेपी में दिखाए रंग : उत्तराखंड में त्रिवेंद्र रावत सरकार में भी वो वन मंत्री, आरोग्यौर अन्य विभागों के मंत्री बने और लगातार विवादों में रहे। प्रेशर पॉलिटिक्स करने में हरक सिंह माहिर आए दिन बीजेपी के मुख्यमंत्रियों को परेशान करते रहे। अब एक बार फिर से रावत ने इसी प्रेशर पॉलिटिक्स के जरिए धामी सरकार पर दबाव डालना चाहा मगर यहां उनकी दाल नहीं गली उल्टा भाजपा ने उनको बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसी दौरान उनकी कॉर्बेट प्रकरण की फाइल खुल गई। सीबीआई, ई डी ने उन्हें पांच सालों तक व्यस्त रखा । सुर्खियों से कांग्रेस नेता असहज : हरक सिंह रावत कॉर्बेट प्रकरण से सीबीआई से क्लीन चिट मिलने की बात कर रहे है और बीजेपी पर हमलावार तो हो रहे है। लेकिन बीजेपी से ज्यादा असहज कांग्रेस के नेता हो रहे है। कल तक हरक सिंह रावत एक साइड लाइन नेता थे एकाएक कांग्रेस नेताओं से माइक छीन कर, बीजेपी पर प्रहार करके Úंट लाइन में आकर बैठ गए। कांग्रेस में यशपाल आर्य, हरीश रावत, प्रीतम सिंह, भुवन कापड़ी प्रदेश अध्यक्ष करन मेहरा सब अब इस बात से परेशान हैं कि कैसे हरक सिंह रावत को किनारे धकेला जाए ? बीजेपी हरक सिंह को फूंका हुआ कारतूस मानती है और उनके बयानों को हल्कापन मान रही है। जबकि कांग्रेस में उन्हीं के साथी नेता उन्हें पटखनी देने की तैयारी कर रहे है। बरहाल हरक सिंह रावत उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर से मुखर हो रहे है देखना अब ये है कि वो कब कौन से कांटे में फंसते है।

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