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महिला की मौत पर काटा हंमामा : द न्यूरो सर्जन सेंटर हॉस्पिटल के दस्तावेज पुलिस ने कब्जे में लिए

रुद्रपुर । आवास विकास स्थित सोलंकी न्यूरो सर्जन सेन्टर में उपचार के दौरान एक महिला की हुई मौत के पश्चात परिजनों द्वारा उपचार में लापरवाही का आरोप लगाकर जमकर हंगामा किया गया। मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस अधिकारियों ने दोनों पक्षों से वार्ता करने के बाद हॉस्पिटल का एंट्री रजिस्टर कब्जे में लेकर मामले की जांच पूरी होने तक नए मरीज की भर्ती पर रोक लगा दी। साथ ही हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों को उनकी इच्छानुसार उपचार करने को कहा। आज मृतका विशुका शिकरी के शव का चिकित्सकों के पैनल द्वारा पोस्टमार्टम द्वारा परिजनों के सुपुर्द किया गया। बताया जाता है कि यह हॉस्पिटल एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया। जब वहां भर्ती एक महिला की उपचार के दौरान मौत हो गयी जिसके बाद परिजनों सहित समाजसेवी लोगों ने जमकर हंगामा काटा। जिनको पुलिस ने समझाबुझा कर शान्त करने का काफी प्रयास किया परन्तु वह नहीं माने और धरने पर बैठ गये। उनकी मांग थी कि दोषी डाक्टर व स्टाफ को गिरफ्रतार किया जाये। इस मामले में मृतका के पुत्र ने डाक्टर के खिलाफ तहरीर दी है।राजेश शिकारी पुत्र रंजीत शिकारी मूल निवासी ग्राम आनन्दखेड़ा, दिनेशपुर ने ट्रांजिट कैम्प कोतवाल को दी गयी तहरीर में कहा है कि शारदा कालोनी डिबडिबा निवासी उसकी 45 वर्षीय माता विशुका शिकारी को 22 अगस्तकी प्रातः 10 बजे अचानक चक्कर आने लगे तो वह उन्हें आवास विकास स्थित डा. रणवीर सिंह सोलंकी के हास्पिटल द न्यूरो सर्जन सेन्टर में इलाज के लिये लेकर आये। डा. सोलंकी ने उसकी माता को देखकर कहा कि इनके दिमाग में सूजन आ गयी है, इनका एमआरआई कराना होगा। उसके बाद उन्होंने माता को वहां प्राइवेट वार्ड में भर्ती कर लिया। परन्तु माताजी के इलाज सही तरीके से न कर लापरवाही बरती गयी। शाम को डाक्टर घर चले गये। पीछे से स्टाफ ने मरीज का कोई ख्याल नहीं किया जिससे रात को उनकी माता की हालत बिगड गयी।शनिवार को करीब एक बजे माता का निधन हो गया। जब परिजनों ने डाक्टर से माता के देहान्त होने का सही कारण बताने को कहा तो डाक्टर व उनके स्टाफ ने उनके साथ अभद्रता की। पता चलते ही समाजसेवी सुशील गाबा विधायक तिलक राज बेहड़ आदि वहां पहुंच गये। हंगामे की खबर मिलने पर सीईओ प्रशांत कुमार, ट्रांजिट कैम्प थानाध्यक्ष मोहन चन्द्र पाण्डे,चौकी आवास विकास प्रभारी प्रकाश चंद्र, तहसीलदार दिनेश कुटौला आदि भी वहां आ गये। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री व किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़ व सुशील गाबा ने सीओ सिटी से इस मामले में उचित कानूनी कार्रवाई करने को कहा। इधर डा. सोलंकी का कहना है कि जब मरीज भर्ती किया गया तो उसका एक हिस्सा पैरालाइसिस था। दिमाग का एक हिस्सा डेमेज होने से नस बंद थी। जिससे मरीज को हार्ट अटैक होने से उसकी मौत हुई। उपचार में लापरवाही नहीं बरती गई। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है।

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