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विपक्ष के हंगामे के बीच नौ विधेयक पारित : भराड़ीसैंण में चल रहा विधानसभा सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

भराड़ीसैंण (उद संवाददाता)।गैरसैंण की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में चल रहा उत्तराखण्ड विधानसभा का मानसून सत्र बुधवार को विपक्ष के तीखे विरोध और भारी हंगामे के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। विधानसभा का चार दिवसीय मानसून सत्र डेढ़ दिन में ही खत्म कर दिया गया। लगातार दो दिन तक विपक्ष की ओर से जारी शोर-शराबे के बावजूद सरकार ने नौ महत्वपूर्ण विधेयक और 5,315-89 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट सदन से पारित करा लिया। सोमवार से शुरू हुए सत्र का माहौल पहले ही दिन से तनावपूर्ण रहा। कार्यवाही स्थगित होने के बाद विपक्षी विधायकों ने सदन परिसर में रात भर धरना जारी रखा और बुधवार सुबह भी वे अपनी मांगों पर अड़े रहे। विपक्ष का आरोप था कि सरकार कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर पूरी तरह विफल रही है, इसलिए नैनीताल के जिलाधिकारी का तत्काल तबादला किया जाए, एसएसपी को निलंबित किया जाए और कांग्रेस नेताओं पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं। विपक्षी नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य बार-बार खड़े होकर कानून- व्यवस्था पर चर्चा कराने की मांग करते रहे, जबकि सत्ता पक्ष ने कार्यवाही आगे बढ़ाने की कोशिश की। नतीजा यह हुआ कि कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही और प्रश्नकाल दूसरे दिन भी नहीं हो सका। इसी अफरातफरी के बीच सरकार ने अपनी विधायी योजनाओं को अंजाम दिया। सदन में उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश श्री बद्रीनाथ तथा केदारनाथ मंदिर अधिनियम 1939) (संशोधन) अध्यादेश 2025, उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता एवं विधि विरुद्ध प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक 2025, समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड (संशोधन) अध्यादेश 2025,उत्तराखंड पंचायती राज (संशोधन) अध्यादेश 2025,उत्तराखंड ग्राम पंचायत क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत (स्थान और पदों का आरक्षण और आवंटन) नियमावली 2025,उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक,उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक 2025,उत्तराखंड लोकतंत्र सेनानी सम्मान विधायक 2025,उत्तराखंड साक्षी संरक्षण (नीरसन) विधेयक पास कराए गए। इन विधेयकों में कई संवेदनशील प्रावधान शामिल किए गए हैं। उदाहरण के तौर पर, अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक के अंतर्गत राज्य में एक प्राधिकरण गठित होगा, जिससे मदरसों को भी औपचारिक मान्यता दी जाएगी। समान नागरिक संहिता संशोधन में लिव-इन-रिलेशनशिप के दुरुपयोग पर सजा को और सख्त किया गया है, जबकि धर्मांतरण कानून में जबरन धर्म परिवर्तन कराने वालों को उम्रकैद तक की सजा देने का प्रावधान किया गया है। लगातार बढ़ते शोर-शराबे और गतिरोध के चलते अंततः विधानसभा अध्यक्ष ने मानसून सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी। इस तरह दूसरा दिन भी पहले दिन की तरह हंगामे की भेंट चढ़ गया और विपक्ष व सत्ता पक्ष के बीच टकराव की तस्वीर ग्रीष्मकालीन राजधानी की विधानसभा से साफ झलकी।



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