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लोकसभा चुनाव में दिग्गजों का भविष्य दांव पर

अनिल सागर
देहरादून। प्रदेश की पांच लोकसभा सीटो पर हो रहे चुनाव में भाजपा व कांगेस के कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है, भाजपा कांग्रेस के इन धुंरदरों का राजनैतिक भविष्य 2019 का लोकसभा चुनाव तय करेगा। जिसमें कांर्ग्रेस के पूर्व सीएम हरीश रावत व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भटट व पूर्व सीएम डा0 रमेश पोखरियाल निंशक, केन्द्रीय मंत्री अजय टम्टा एवं राज्य सभा सांसद प्रदीप टम्टा का राजनैतिक भविष्य जनता की मुट्ठी में छिपा है, प्रदेश की जनता किसे जमीन पर किसे आंसमा पर बैठाती है इसको लेकर सभी की निगाहे है। मोदी बनाम राहुल पर 2019 के लोकसभा चुनाव उत्तराऽण्ड के लिए भी काफी दिलचस्प हैं। चुनाव की इस वेला में उत्तराऽण्ड के धुंरदर पूर्व सीएम हरीश रावत, रमेश पोऽरियाल निंशक, बीजेपी अध्यक्ष अजय भटट व प्रीतम सिंह का राजनीतिक भविष्य दांव पर लगा है। नैनीताल लोकसभा सीट से जहां भाजपा से प्रदेश अध्यक्ष अजय भटट मैदान में है तो कांग्रेस से पूर्व सीएम हरीश रावत ताल ठोक रहें है, दोनों ही पार्टी धुंरधर नेता है, जिनकी पार्टी और जमीनी स्तर पर ऽासी पकड़ है, ऽास बात ये है कि दोनों ही मूल रूप अल्मोड़ा के रानीऽेत व भिकियासैण से ताल्लुक रऽते है, और दोनों को ही चुनाव में हार जीत का स्वाद पता है। अजय भटट जहां रानीऽेत विधानसभा से 2002 व मोदी लहर में 2017 का चुनाव हार चुके है तो कांग्रेस प्रत्याशी हरीश रावत भी अल्मोड़ा लोकसभा से चार बार लगातार भाजपा के बच्ची सिंह रावत से हार चुके हैं , इस लिहाज से दोनों को हार जीत के स्वाद का पता है और अब वर्तमान में नैनीताल सीट से दोनों आमने सामने है, इस चुनाव के नतीजे दोनों ही नेता का भविष्य तय करेंगे। भट्ट जहां वर्तमान में अपनी पार्टी के अध्यक्ष है ऐसे में अगर वह जीतते है तो सरकार बनने पर केन्द्रीय मन्त्रीमण्डल में उनकी दावेदारी मजबूत होगी। अगर नतीजे उनके पक्ष में नहीं आये तो प्रदेश अध्यक्ष के पद से भी हाथ धोना पड़ सकता है। इसी तरह कांग्रेस प्रत्याशी हरीश रावत के लिए भी चुनाव अहम है। प्रदेश अध्यक्ष से लेकर सीएम तक की जिम्मेंदारी संभाल चुके रावत के सामने कई चुनौतियां है। सीएम रहते दो विधानसभा किच्छा व हरिद्वार ग्रामीण से उनकी हार ने उनके राजनैतिक भविष्य को करारा झटका दिया था, वही कांग्रेस को मात्र 70 में से 11 सीटों पर संतोष करना पड़ा था। लेकिन लम्बे राजनैतिक अनुभवी रावत ने जनता से नाता बनाये रऽा और प्रदेश की सियासत में सक्रिय रहें और इसी का फायदा उन्हें नैनीताल से टिकट के रूप में मिला। अब उनकी हार जीत भी उनका अगला राजनैतिक भविष्य तय करेगी। टिहरी सीट से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह मैदान में है, उनका राजनैतिक कैरियर भी इस चुनाव पर टिका है, वैसे चकराता से चार बार लगातार विधायक बने प्रीतम दो बार कैबिनेट मंत्री भी रह चुके है, लेकिन इस चुनाव में उनका राजनैतिक कद कितना बढ़ेगा ये टिहरी की जनता पर निर्भर है, उनकी पकड़ जौनसार इलाके में है तो भाजपा प्रत्याशी माला राज्य लक्ष्मी शाह टिहरी की रियासत पर पकड़ रऽती है। वही हरिद्वार सीट पूर्व सीएम रमेश पोिऽरियाल निंशक का राजनैतिक भविष्य भी इस चुनाव में टिका है, पहाड़ से लेकर मैदान तक चुनाव लड़ने का अनुभव रऽने वाले निंशक को भी कर्णप्रयाग विधानसभा से वर्ष 2002 में हार का मुंह देऽना पड़ा था, जिसके बाद उन्होंने देहरादून की मैदानी सीट डोईवाला से चुनाव लड़ा और जीत कर मंत्रीमण्डल में शामिल हुये बाद में सीएम पद की जिम्मेंदारी संभाली। 2014 के लोकसभा चुनाव में हरीश रावत की पत्नी चुनावी मैदान में उतनी लेकिन हार गई। इस चुनाव में उनका मुकाबला कांग्रेस के अम्बरीश कुमार व बसपा प्रत्याशी से है, हरिद्वार सीट पर बसपा का कैडर बोट होने के कारण बसपा , कांग्रेस व भाजपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। पूर्व सीएम निंशक मजबुती से ताल ठोक रहें है, अगर वह इस चुनाव में जीते तो सरकार बनने पर मंत्रीमण्डल में मजबूत दावेदारी रऽते है अगर नतीजे उनके पक्ष में नही आये तो उनका राजनितिक भविष्य ऽतरे में है। वहीं अल्मोड़ा सीट पर भाजपा से केन्द्रीय मंत्री अजय टम्टा ताल ठोक रहे हैं यह चुनाव उनका राजनैतिक भविष्य भी तय करेगा। इस सीट पर कांग्रेस के प्रदीप टम्टा भाजपा को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। राज्य सभा सासंद प्रदीप टम्टा के लिए भी इस चुनाव के नतीजे अहम होंगे। फिलहाल 11 अप्रेल को मतदान है, अभी चुनाव प्रचार जोर पकड़ रहा है। सभी प्रत्याशी चुनावी समर में एक दूसरे को मात देने में लगे है।

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