रुद्रपुर के व्यापारी जगदीश कालड़ा का आकस्मिक निधन
जगदीश कालड़ा के नेत्रदान से दो नेत्रहीनों को मिलेगी रोशनी
रुद्रपुर। नगर के जाने-माने व्यापारी जगदीश कालड़ा का सोमवार शाम आकस्मिक निधन हो गया। उनकी अचानक तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 62 वर्षीय स्व. कालड़ा लंबे समय से दक्ष चौराहे पर स्क्रैप का व्यवसाय करते थे और अपने मिलनसार स्वभाव के कारण व्यापारिक व सामाजिक क्षेत्र में अच्छी पहचान रखते थे। उनके निधन की खबर फैलते ही नगर में शोक की लहर दौड़ गई। स्व. कालड़ा, आवास विकास के पूर्व पार्षद रमेश कालड़ा, व्यापारी राजकुमार कालड़ा, अशोक कालड़ा और राकेश कालड़ा के भाई थे। घटना के बाद परिवार में गहरा दुख व्याप्त है।उनका अंतिम संस्कार बुधवार प्रातः 9 बजे फुलसुंगी स्थित मुक्तिधाम में किया जाएगा। शहर के व्यापारियों और गणमान्य लोगों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। वहीं फुलसूंगी निवासी रमेश कालड़ा और राजकुमार कालड़ा के भाई जगदीश कालड़ा के देहावसान के पश्चात उनके परिवार ने मानवता की अनूठी मिसाल पेश की है। शोक की इस घड़ी में परिवार ने दिवंगत जगदीश कालड़ा की आंखों को दान करने का साहसी निर्णय लिया जिससे दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में रोशनी लौट सकेगी। परिवार ने बलदेव नारंग के माध्यम से भारत विकास परिषद से संपर्क किया जिसके बाद महाराजा अग्रसेन ग्लोबल चौरिटेबल ट्रस्ट रूद्रपुर के सहयोग से नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न हुई। भारत विकास परिषद के संजय कुमार ने इस पुनीत कार्य को संपन्न करवाया। परिजनों का कहना है कि दुख के समय में इस प्रकार का निर्णय लेना कठिन होता है लेकिन समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए परिवार ने सर्वसम्मति से यह अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। अब जगदीश कालड़ा की मृत्यु के बाद भी उनकी आंखें इस दुनिया को देख सकेंगी और उनके प्रियजनों की स्मृतियों में वे सदैव जीवित रहेंगे। नेत्रदान की प्रक्रिया भारत विकास परिषद रूद्रपुर शाखा के नेत्रदान संयोजक संजय और तकनीशियन मनीष रावत के सहयोग से पूरी हुई। इस दौरान अशोक कालड़ा, संतलाल कालड़ा, बॉबी टुटेजा, योगेश वाधवा, पंकज खेरा सहित कालड़ा परिवार के तमाम सदस्य और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। समाज के विभिन्न वर्गों ने इस महान कार्य के लिए शोकाकुल परिवार का आभार व्यक्त किया है और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है।
