प्रधानमंत्री मोदी ने कुमांऊनी और गढ़वाली बोलकर भरा जोश : ये उत्तराखण्ड के उत्कर्ष का कालखण्ड,ये बदलाव सबको साथ लेकर चलने की नीति का नतीजा
हमें पहाड़ी जिलों को हार्टीकल्चर सेंटर बनाने पर फोकस करना चाहिए
देहरादून (उद संवाददाता)। उत्तराखंड राज्य स्थापना के रजत जयंती समारोह में पीएम मोदी ने करोड़ों की लागत की परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री ने एक स्मारक डाक टिकट भी जारी किया। हजारों की भीड़ के बीच प्रधानमंत्री मोदी नेे गढ़वाली में अपना संबोधन शुरू कर लोगों में जोश भरा। अपने सम्बोधन में पीएम मोदी ने कहा कि नौ नवंबर का ये दिन एक लंबी तपस्या का फल है आज का दिन हम सभी को गर्व का अहसास करा रहा है। उत्तराखण्ड की देवतुल्य जनता ने वर्षों तक जो सपना देखा था, वो अटल जी की सरकार में 25 साल पहले पूरा हुआ था। और अब बीते पच्चीस वर्षों की यात्रा के बाद आज उत्तराखण्ड जिस उंचाई पर है उसे देखकर हर उस व्यक्ति का खुश होना स्वाभाविक है, जिसने इस खूबसूरत राज्य के निर्माण के लिए संघर्ष किया था। पीएम मोदी ने कहा कि जिन्हें पहाड़ से प्यार है जिन्हें उत्तराखण्ड की संस्कृति यहां की प्राकृति सुंदरता देवभूमि के लोगों से लगाव है उनका मन आज प्रफुल्लित है वो आनंदित हैं। पीएम मोदी ने कहा कि मुझे इस बात की भी खुशी है कि डबल इंजन की भाजपा सरकार उत्तराखण्ड के सामर्थ्य को नई उंचाई देने में जुटी है। पीएम मोदी ने कहा कि मैं इस रजत जयंती के इस अवसर पर उत्तराखण्ड के उन बलिदानियों को भी श्रद्धांजलि देता हूं जिन्होंने आंदोलन के दौरान अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। मैं उस वक्त के सभी आंदोलनकारियों का भी वंदन करता हूं अभिनंदन करता हूं। पीएम मोदी ने कहा कि उत्तराखण्ड से मेरा गहरा लगाव हूं। जब मैं स्पीरिचुअल जर्नी पर यहां आता था तो यहां पहाड़ों पर रहने वाले भाई बहनों का संघर्ष उनका परिश्रम कठि नाईयों को पार करने की उनकी ललक मुझे हमेशा प्रेरित करती थी। यहां बिताये हुए दिनों ने मुझे उत्तराखण्ड के असीम सामर्थ्य का साक्षात परिचय करवाया है। इसलिए ही जब बाबा केदार के दर्शन के बाद मैंने कहा कि ये देशक उत्तराखण्ड का है तो ये सिर्फ मेरे मुंह से निकला एक वाक्य नहीं था जब मैंने ये कहा तब मुझे पूरा भरोसा उत्तराखण्ड की जनता पर था। आज जब उत्तराखण्ड अपने 25 वर्ष पूरे कर रहा तो मेरा ये विश्वास और दृढ़ हो गया है कि ये उत्तराखण्ड के उत्कर्ष का कालखण्ड है। पीएम मोदी ने कहा कि 25 साल पहले जब उत्तराखण्ड नया नया बना था तब चुनौतियां कम नहीं थी, संसाधन सीमित थे। राज्य का बजट छोटा था, आय के स्रोत कम थे। और ज्यादातर जरूरतें केन्द्र की सहायता से पूरी होती थी। आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। यहां आने से पहले मैंने रजत जयंती समारोह पर शानदार प्रदर्शनी देखी। इसमें उत्तराखण्ड में 25 वर्षों की यात्रा की झलकियां है। ये 25 वर्षों की सफलता की गाथायें प्रेरित करने वाली हैं। 25 साल पहले उत्तराखण्ड का बजट सिर्फ 4 हजार करोड़ रूपये था। आज ये बढ़कर एक लाख करोड़ रूपये को पार कर चुका है। पच्चीस साल में उत्तराखण्ड में बिजली उत्पादन चार गुना अधिक हो गया है। पच्चीस वर्षों में उत्तराखण्ड में सड़कों की लम्बाई बढ़कर दोगुनी हो गयी है। यहां छह माह में चार हजार यात्राी हवाई जहाज से आते थे। आज एक दिन में चार हजार से ज्यादा यात्राी हवाई जहाज से आते हैं। इन पच्चीस सालों में इंजीनियरिंग कालेजों की संख्या दस गुना से अधिक बढ़ी है। पहले यहां सिर्फ एक मेडिकल कालेज था आज यहां दस मेडिकल कालेज है। पच्चीस साल पहले वैक्सीन कवरेज का दायरा सिर्फ 25 प्रतिशत भी नहीं था। 75 प्रतिशत से अधिक लोग बिना वैक्सीन की जिंदगी जीते थे। आज उत्तराखण्ड का करीब करीब हर गांव वैक्सीन कवेरज के दायरे में आ गया है। यानि जीवन के हर आयाम में उत्तराखण्ड के काफी प्रगति की है। पीएम मोदी ने कहा कि विकास की यह यात्रा अदभुत रही है। ये बदलाव सबको साथ लेकर चलने की नीति का नतीजा है। हर उत्तराखण्डी के संकल्प का नतीजा है। प्रधानमंत्री ने बीच बीच में कुमांउनी भाषा और गढ़वाली भाषा में भी सम्बोधन किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की विकास यात्रा को गति देने के लिए आज भी यहां कई परियोजनाओं का उदघाटन और शिलान्या किया गया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, और खेल से जुड़े ये प्रोजेक्ट यहां रोजगार के नये अवसर तैयार करेंगे। जमरानी और सौंग बांध परियोजनाएं देहरादून और हल्द्वानी शहर की पेयजल की समस्या को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी। इन सभी परियोजनाओं पर आठ हजार करोड़ से ज्यादा खर्च किये जायेंगे। पीएम मोदी ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार अब सेब और कीवी के किसानों को डिजिटल करेंसी से अनुदान देना शुरू कर रही है। इसमें आधुनिक टैक्नोलॉजी के माध्यम से आर्थिक मदद की पूरी ट्रैकिंग करना संभव हो रहा है। जो कि प्रशंसनीय है। पीएम ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड भारत के आध्यात्मिक जीवन की धड़कन है। गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ, जागेश्वर, आदि कैलाश जैसे कई अनगिनत तीर्थ हमारी आस्था के प्रतीक हैं। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इन पवित्र धामों की यात्रा पर आते हैं। उनकी यात्रा भक्ति का मार्ग खोलती है साथ ही उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था में नई उर्जा भरती है। पीएम ने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी का उत्तराखण्ड के विकास से गहरा नाता है। इसलिए आज राज्य में दो लाख करोड़ से अधिक की परियाजनाओं पर काम चल रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना प्रगति पर है। दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे लगभग तैयार है। गौरीकुण्ड, केदारनाथ और गोविंद घाट, हेमकुण्ड साहिब रोपवे का शिलान्यास हो चुका है। ये परियोजनाएं उत्तराखण्ड में विकास को नई गति दे रही हैं। उत्तराखण्ड ने 25 वर्षों में विकास की एक लंबी तैयार की है। अब सवाल ये है कि अगले 25 वर्षों में हम उत्तराखण्ड को किस उंचाई पर देखना चाहेंगे। पीएम मोदी ने कहा कि जब हमें ये पता होगा कि हमारा लक्ष्य क्या है तो वहां पहुंचने का भी रोड मैप भी उतनी ही तेजी से बनेगा। अपने लक्ष्यों पर चर्चा के लिए नौ नवंबर से बेहतर दिन क्या होगा? पीएम मोदी ने कहा कि उत्तराखण्ड का असली परिचय उसकी आध्यात्मिक शक्ति है। उत्तराखण्ड अगर ठान ले तो अगले कुछ ही वर्षों में खुद को स्पीरिचुअल कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड के रूप में स्थापित कर सकता हैं। यहां के मंदिर, आश्रम ध्यान और योग के सेंटर इन्हें हम ग्लोबल नेटवर्क से जोड़ सकते हैं। देश विदेश से लोग यहां वेलनेस के लिए आते हैं। यहां की जड़ी बूटियों और आयुर्वेदिक औषधियों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस क्षेत्र में उत्तराखण्ड ने पिछले कुछ वर्षों में तेजी से प्रगति की है। अब समय आ गया है कि उत्तराखण्ड की हर विधानसभा क्षेत्र में योग केन्द्र, आयुर्वेद केन्द्र, नेचुरोपैथी संस्थान, होम स्टे एक कंपलीट पैकेज की दिशा में हम सोच सकते हैं। यह विदेशी टूरिज्म को बढ़ावा देगा। पीएम मोदी ने कहा कि अब हमें उत्तराखण्ड में छिपी हुई संभावनाओं के विस्तार पर फोकस करने की आवश्यकता है। यहां हरेला, फुलदेई, भिटौली जैसे त्यौहारों का हिस्सा बनने के बाद पर्यटक उस अनुभव को हमेशा याद रखते हैं। यहां के मेले भी उतने ही जीवंत है। इनमें उत्तराखण्ड की आत्मा बसती है। यहां के स्थानीय मेलों और पवों को वर्ल्ड मैप पर लाने के लिए एक जिला एक मेला अभियान चलाया जा सकता है। उत्तराखण्ड के सभी पहाड़ी जिले फलों के उत्पादन में काफी पोटेिंशयल रखते हैं। हमें पहाड़ी जिलों को हार्टीकल्चर सेंटर बनाने पर फोकस करना चाहिए।

