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सांसद अजय भट्ट ने लोकसभा में उठाई उत्तराखंड के ‘भूतिया गांवों’ को पुनर्जीवित करने की मांग

नई दिल्ली/रुद्रपुर । नैनीताल ऊधमसिंह नगर संसदीय क्षेत्र के सांसद और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री अजय भट्ट ने लोकसभा में शून्य काल के दौरान उत्तराखंड के निर्जन हो चुके गांवों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सदन में राज्य के खाली हो चुके गांवों, जिन्हें ‘घोस्ट विलेज’ या भूतिया गांव कहा जाता है, के पुनर्स्थापन के लिए केंद्र सरकार से एक विशेष नई योजना बनाने की मांग की है।सांसद अजय भट्ट ने सदन को अवगत कराया कि उत्तराखंड में प्रवासन आयोग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 1700 से अधिक गांव पूरी तरह निर्जन हो चुके हैं। उन्होंने वर्ष 2011 की जनगणना का हवाला देते हुए बताया कि उस समय 1048 गांव गैर-आबाद श्रेणी में थे, लेकिन अब यह संख्या तेजी से बढ़ी है। अजय भट्ट ने भावुक होते हुए कहा कि जिन गांवों में कभी शादी-ब्याह के शगुन गीत गूंजते थे और त्योहारों पर लोक संस्कृति की छटा बिखूरती थी, आज वहां सन्नाटा पसरा है। पलायन के कारण घर सुनसान पड़े हैं और उपजाऊ खेत बंजर हो चुके हैं। मानवीय बसावट खत्म होने से ये गांव अब बाघ, तेंदुए, भालू और अन्य जंगली जानवरों का विचरण केंद्र बन गए हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना की सराहना करते हुए सांसद ने कहा कि इस पहल से सीमावर्ती गांवों की सुरक्षा और कनेक्टिविटी मजबूत हुई है, जिससे वहां पलायन रुक रहा है। उन्होंने इसी तर्ज पर मध्य हिमालयी क्षेत्रों के लिए भी एक नई योजना की आवश्यकता जताई ताकि रोजगार और सुविधाओं के अभाव में शहर जा चुके लोग वापस अपने गांवों की ओर लौट सकें। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि ‘रिवर्स पलायन’ को बढ़ावा देने के लिए ठोस नीति बनाई जाए ताकि उत्तराखंड की समृ( संस्कृति और सामरिक महत्व के इन गांवों को फिर से आबाद किया जा सके।

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