October 31, 2026

Uttaranchal Darpan

Hindi Newsportal

रूद्रपुर में मुख्य रामलीला का हुआ शुभारंभ

रूद्रपुर । रूद्रपुर नगर की प्राचीनतम धार्मिक व सामाजिक परंपराओ की प्रतीक प्रभु श्री रामलीला मंचन का उद्घाटन बड़ी धूमधाम से मुख्य अतिथि मंदिर मनकामेश्वर कल्याण आश्रम, कल्याणी व्यू जी के महंत स्वामी श्रीनारायण चौतन्य महाराज जी नें फीता काटकर एवं प्रभु श्रीरामचन्द्र जी की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्जवलन कर एवं पुष्प अर्पित कर विधिवत शुभारंभ किया । शुभारंभ के पश्चात रामभजन गाये गये तथा मुख्य अतिथि महंत स्वामी श्रीनारायण चौतन्य ब्रहम्चारी महाराज नें उपस्थित श्रद्धालुओं, कमेटी पदाधिकारियों एंव सदस्यों सहित कलाकारों को संबोधित करते हुये कहा राम नाम की महिमा का वर्णन किया। उन्होनें कहा कि राम नाम बिना भाव के भी जपने से बड़े बड़े पापी तर गये। उन्होनें अनेको उदहारण देकर प्रभु नाम की महिमा का वर्णन किया। श्री रामलीला कमेटी, श्री रामनाटक क्लब एवं श्री सनातन धर्म युवा मंच के पदाधिकारियों एवं सदस्यों नें मुख्य अतिथि सहित सभी अतिथिगणों को फूलमाला, रामनाम का पटका तथा शाल ओढ़ाकर भेंटकर स्वागत किया। स्वागत संबोधन में श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष मनोज गाबा नें कहा कि सत्य सनातन संस्कृति की प्रतीक श्री रामलीला मंचन भारत की प्राचीन परंपरा है। आपसी प्रेम, सद्भाव, मर्यादित जीवन, परिवार संस्था की खूबसूरती, भाई-भाई केआपसी प्यार, पिता-पुत्र के बीच गहरे संबंध, राजपाट से उपर पिता की आज्ञा, विष्णुअवतार राम एवं रूद्रावतार हनुमान के आपसी मिलन से लेकर राम द्वारा लक्ष्मण को मरणासन्न रावण के पास शिक्षा हेतु भेजनें सहित सैंकड़ों प्रेरणादायक प्रसंग आज के आधुनिक युग को नवराह दिखा रहें है। प्रथम दिवस की लीला मंचन में दिखाया गया कि देवर्षि नारद हिमालय के एक शांत स्थान पर भगवान के ध्यान में लीन होकर कठोर तपस्या कर रहे थे। उनके तप के प्रभाव से देवराज इंद्र का सिंहासन डोलने लगा। इंद्र को आशंका हुई कि कहीं नारद उनकी गद्दी प्राप्त करने के लिए तप तो नहीं कर रहे। उन्होंने कामदेव को नारद की तपस्या भंग करने किंतु नारद की एकाग्रता अडिग रही। सभी प्रयास विफल होने पर कामदेव ने उनसे क्षमा माँगी। इस विजय से नारद के मन में अहंकार उत्पन्न हो गया कि उन्होंने काम पर विजय प्राप्त कर ली है। मोहवश आत्ममुग्ध नारद अपनी विजय का वर्णन करने ब्रह्मा जी, भगवान शंकर और श्रीहरि के पास पहुँचे। भगवान शंकर ने उन्हें यह प्रसंग श्रीहरि को न सुनाने की सलाह दी, किंतु नारद ने उनकी सीख अनसुनी कर दी। श्रीहरि ने अपने भक्त का अहंकार दूर करने के लिए लीला रची। लौटते समय नारद को एक सुंदर नगर दिखाई दिया, जहाँ राजकुमारी विश्वमोहिनी का स्वयंवर होने वाला था। राजकुमारी को देखकर नारद मोहित हो गए और उससे विवाह की इच्छा करने लगे। उन्होंने श्रीहरि से उनका सुंदर रूप माँगा। भगवान ने नारद के हित में उन्हें वानर जैसा मुख दे दिया, जिसका नारद को आभास नहीं हुआ। स्वयंवर में नारद राजकुमारी द्वारा चुने जाने की आशा लगाए बैठे रहे, किंतु उसने श्रीहरि को वरमाला पहना दी। अपना मुख जल में देखकर नारद क्रोधित हो उठे। उन्होंने श्रीहरि को श्राप दिया कि उन्हें भी मनुष्य जन्म लेकर पत्नी का वियोग सहना पड़ेगा और वानरों की सहायता लेनी पड़ेगी। श्रीहरि ने श्राप स्वीकार किया और अपनी माया हटा ली। तब नारद को अपनी भूल का बोध हुआ। उनका अहंकार मिट गया और उन्होंने पश्चात्ताप करते हुए भगवान से क्षमा माँगी। इस दौरान श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष मनोज गाबा, महामंत्री एवं संचालन सुशील गाबा, महामंत्री सुशील गाबा, कोषाध्यक्ष सीए अमित गंभीर, समन्यवयक राजेश छाबड़ा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेश शर्मा, विजय अरोरा, हरीश अरोरा, महावीर आजाद, सचिव अमित अरोरा बोबी, राकेश सुखीजा, डायरेक्टर सुभाष खंडेलवाल, संदीप धीर, मंच सचिव विजय जग्गा, विजय विरमानी, जगदीश टंडन, रघुवीर अरोरा, अजय फुटेला, विजय फुटेला, सुरेश मदान, रमेश अनेजा, श्री रामनाटक क्लब के अध्यक्ष विशाल भुडडी, महामंत्री गौरव तनेजा, कोषाध्यक्ष सचिन, संरक्षक मोहन लाल भुडडी, सरपरस्त हरीश सुखीजा, प्रेम खुराना, राम कृष्ण कन्नौजिया, संजीव आनन्द, गुरशरण बब्बर शरणी, निर्देशक ;डायरेक्टर आशीष ग्रोवर आशू, गौरव राज बेहड़, मनोज गुंजाल, अनिल तनेजा, सचिव राजकुमार कक्कड़ एवं रगन अरोरा तथा मंच व्यवस्थापक मनोज अरोरा, सुभाष तनेजा, पंकज सुखीजा, सचिन आनन्द, नरेश छाबड़ा, पुलकित बांबा, सौरभ राज बेहड़, शिवम अनेजा, शिवम फुटेला, अनिल शर्मा, जुगनू, ममता दुबे, सुशीला शर्मा, प्रसादी दुबे, दीपा, ज्योति सेठ, आरोही आहूजा, सुमन सेठ, ज्योति सेठ, किरन सुखीजा, मोहित सुखीजा, गौरव जग्गा, सुमित आनंद, सचिन आनंद, मोहन अरोरा, वैभव भुडडी, रोहित खुराना, हर्षअरोड़ा, अभय भुडडी अमन गुंबर, राज ग्रोवर, गर्वित मुंजाल, नीतीश धीर, गोगी नरूला, इदरीस गोला, अक्ष अग्रवाल, दीपक गुप्ता, शिव अग्रवाल, अग्रिम सचदेवा, सक्षम दुआ, आयुष्मान सुशील गाबा, आशमन अरोरा, पुरु राज बेहड़ कनव गंभीर, ऐश तनेजा आदि उपस्थित थे। आज की लीला में नारद जी का पात्र अभिनय मनोज मुंजाल, देवराज इन्द्र वैभव भुडडी, कामदेव हर्ष अरोरा, ब्रहमा जी सिद्धान्त ग्रोवर, शंकर जी-रवि चोपड़ा, विष्णु भगवान – मनोज अरोरा, विश्वमोहिनी एवं लक्ष्मी जी कनव गंभीर, कालादेव – राम कृष्ण कन्नौजिया, पीला देव- रजत अरोरा, मंत्री गुरशरण बब्बर शरणी नें निभाया। संचालन श्री रामलीला कमेटी के मंच सचिव विजय जग्गा एवं मंच सचिव संदीप धीर नें संयुक्त रूप से किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *