October 25, 2026

Uttaranchal Darpan

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कांग्रेस की न्याय यात्रा निकली लेकिन जनता नदारद

आम आदमी से दूरी बरकरार; 2027 के दावेदारों ने समर्थक जुटाकर दिखाई ताकत

रुद्रपुर। उत्तराखंड में सत्ता परिवर्तन का नारा बुलंद करने निकली कांग्रेस की न्याय यात्रा ऊधमसिंह नगर में अपने दावों की कसौटी पर कमजोर नजर आई। भाजपा सरकार के खिलाफ जनता को लामबंद करने और आम आदमी के मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरने का दावा करने वाली यात्रा में आम जनमानस की भागीदारी सीमित रही। खटीमा से जसपुर तक जगह-जगह स्वागत हुए लेकिन इनमें आम जनता के बजाय कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं के समर्थकों की मौजूदगी अधिक दिखाई दी। जनआंदोलन जैसी व्यापक भागीदारी का अभाव यात्रा की प्रमुख कमजोरी बनकर सामने आया। खटीमा से शुरू होकर रुद्रपुर काशीपुर और जसपुर तक पहुंची यात्रा में फूल-मालाओं आतिशबाजी और समर्थकों के जरिए स्वागत किया गया। हालांकि जिस यात्रा को जनता की आवाज बनाने का दावा किया गया था उसमें आम लोगों की सक्रिय भागीदारी नजर नहीं आई। स्वागत कार्यक्रमों के बीच नेताओं का काफिला आगे बढ़ता रहा लेकिन आम लोगों के बीच रुककर उनकी समस्याएं सुनने और उन्हें अभियान से जोड़ने की प्रभावी तस्वीर सामने नहीं आई।

यात्रा में प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शामिल रहे। स्वागत स्थलों पर नेता यात्रा वाहन पर सवार नजर आए और उनके साथ निजी कारों का काफिला चलता रहा। इससे यह सवाल उठा कि जनता से सीधा संवाद क्या केवल स्वागत स्थलों तक ही सीमित रह गया। कांग्रेस ने महंगाई बेरोजगारी भ्रष्टाचार और अंकिता भंडारी प्रकरण जैसे मुद्दे उठाकर भाजपा सरकार को घेरने की कोशिश की लेकिन सीमित भागीदारी ने इन मुद्दों के जनप्रभाव पर सवाल खड़े कर दिए।

यात्रा में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों का रंग भी साफ दिखाई दिया। विभिन्न सीटों के दावेदार अपने समर्थकों के साथ स्वागत करते और अपनी राजनीतिक ताकत दिखाते नजर आए। इससे यात्रा जनता को जोड़ने के अभियान से अधिक स्थानीय नेताओं के लिए अपनी मौजूदगी और संगठन में प्रभाव प्रदर्शित करने का मंच बनती दिखी। भाजपा सरकार के खिलाफ एकजुट लड़ाई का संदेश देने के बीच दावेदारों की प्रतिस्पर्धा ने पार्टी के भीतर की राजनीतिक तस्वीर भी उजागर की।

रुद्रपुर में आतिशबाजी और नेताओं के काफिले ने आयोजन को राजनीतिक चमक जरूर दी लेकिन स्वागत और जनसमर्थन के बीच अंतर साफ नजर आया। किसी यात्रा की सफलता का पैमाना केवल स्वागत स्थलों या समर्थकों की मौजूदगी नहीं बल्कि आम लोगों की भागीदारी उनकी समस्याओं की सुनवाई और उनके भीतर पैदा हुआ भरोसा होता है। ऊधमसिंह नगर में कांग्रेस की यात्रा इस कसौटी पर अपेक्षित प्रभाव छोड़ती नहीं दिखी।

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