मांगों को लेकर आशा वर्करों ने किया प्रदर्शन
रुद्रपुर (उद संवाददाता)। आशाओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने, न्यूनतम वेतन लागू करने और उनके शोषण पर रोक लगाने सहित विभिन्न मांगों को लेकर ऐक्टू से संबद्ध उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन ने शनिवार को गल्ला मंडी में धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान सभा कर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई गई। आशा वर्कर्स ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन मुख्य चिकित्सा अधिकारी के माध्यम से भेजकर मांगों पर शीघ्र कार्रवाई करने की अपील की। सभा को संबोधित करते हुए यूनियन की प्रदेश उपाध्यक्ष रीता कश्यप ने कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार के दस वर्ष पूरे हो चुके हैं और पुष्कर सिंह धामी भी मुख्यमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। इस दौरान आशा वर्कर्स कई बार अपनी समस्याएं सरकार के सामने रख चुकी हैं, लेकिन उनकी मांगों पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आशाओं को बंधुआ मजदूर की तरह काम करा रही है। स्वास्थ्य विभाग का हर काम आशाओं के जिम्मे डाल दिया जाता है, लेकिन मेहनताने के नाम पर उन्हें मात्र 3300 रुपये प्रोत्साहन राशि और कुछ कार्यों पर कमीशन दिया जाता है। यह राशि न्यूनतम वेतन से भी काफी कम है। उन्होंने मांग की कि आशाओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा देकर न्यूनतम वेतन का लाभ दिया जाए। यूनियन की जिलाध्यक्ष ममता पानू ने कहा कि वर्ष 2021 में आशाओं की हड़ताल के बाद तत्कालीन वार्ता में मुख्यमंत्री ने उनका मानदेय 11,500 रुपये करने का वादा किया था, लेकिन पांच वर्ष बीतने के बावजूद यह वादा पूरा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सरकार अखबारों में आशाओं के लिए बड़ी-बड़ी घोषणाएं करती है, लेकिन धरातल पर उनकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। आशाओं को मुफ्त में काम करने वाला श्रमिक समझ लिया गया है। उनके लिए न पेंशन की व्यवस्था है और न ही बीमा का पर्याप्त लाभ। उन्होंने कहा कि आशाएं गर्भवती महिलाओं की देखभाल के लिए दिन-रात अपनी जिम्मेदारी निभाती हैं और कई बार जोिखम उठाकर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाती हैं। इसके बावजूद उन्हें न उचित मेहनताना मिलता है और न सम्मान। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई बार आशाओं को मिलने वाली राशि छह-छह महीने तक नहीं दी जाती। ऐसी स्थिति में उनके सामने आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। ऐक्टू की जिला सचिव एवं यूनियन की उपसचिव अनिता अन्ना ने कहा कि भाजपा सरकार का रवैया मजदूर विरोधी है। सरकार ऐसे कानून बना रही है, जिनसे मजदूरों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में काम करने के बावजूद आशाओं को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। इस शोषण के खिलाफ सभी आशाओं को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। उन्होंने 22 नवंबर को आयोजित होने वाली विशाल रैली को सफल बनाने का आ“वान किया, ताकि आशाएं अपने हक की मांग मजबूती से उठा सकें। भाकपा माले के जिला सचिव ललित मटियाली ने प्रदर्शन को समर्थन देते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की नियुक्ति और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसके बावजूद आशाओं पर काम का बोझ बढ़ाया जा रहा है और छोटी-छोटी बातों पर उनकी छंटनी कर दी जाती है। उन्होंने आशाओं की मांगों को जायज बताते हुए सरकार से उन्हें तत्काल पूरा करने की मांग की। प्रदर्शन में गदरपुर ब्लॉक अध्यक्ष काजल मिस्त्री, पूर्व जिला सचिव कुलविंदर कौर, जिला उपाध्यक्ष बबीता कश्यप, सुषमा, रेनू, गीता, परमजीत, सुखविंदर, रेखा, पूजा शर्मा सहित सैकड़ों आशा वर्कर्स मौजूद रहीं।


