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फिर खड़ा हो सकता है सियासी तूफान : गौरव भाटिया को उत्तराखंड का अतिरिक्त “वरिष्ठ महाधिवक्ता” नियुक्त कर दिया !

मोहित डिमरी ने उठाए भाजपा सरकार पर गंभीर सवाल
देहरादून। उत्तराखंड में बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में शामिल कथित वीआईपी की सीबीआई जांच की संस्तुति हो चुकी है। हांलाकि अब तक सीबीआई ने कोई बड़ा एक्शन नहीं लिया है । इस मामले में सोशल मीडिया पर एक महिला अभिनेत्री ने बीजेपी के पूर्व विधायक की ऑडियो वायरल कर बीजेपी के वरिष्ठ नेता पर सनसनीखेज आरोप लगाये थे। जिससे राज्य में विपक्षी दल व सामाजिक वर्ग से जुड़े लोग सरकार की मंशा पर सवाल उठाते रहे है। इसी बीच अब एक बड़ा चौकाने वाला मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि अंकिता हत्याकांड में जिस बेजेपी नेता पर आरोप लगाये गये है उनके निजी वकील को अब राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अतिरिक्त (वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता) नियुक्त कर दिया है। सरकार के इस कदम से एक बार फिर सियासी तूफान खड़ा हो सकता है। अंकिता भंडारी के न्याय की लड़ाई अब एक नए मोड़ पर आ गई है। सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश के अनुसार ‘मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति’ के संस्थापक संयोजक मोहित डिमरी ने भाजपा सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। डिमरी ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में उत्तराखंड सरकार द्वारा की गई एक महत्वपूर्ण नियुक्ति को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को कटघरे में खड़ा किया है। मामला भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया को उत्तराखंड सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में ‘वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता’ नियुक्त किए जाने से जुड़ा है। मोहित डिमरी का आरोप है कि यह नियुक्ति अंकिता भंडारी केस में कथित ‘वीआईपी’ का नाम बचाने की कोशिशों का एक हिस्सा हो सकती है। डिमरी ने इस नियुक्ति को लेकर सवाल किया है कि क्या भाजपा सरकार को सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखने के लिए उत्तराखंड का कोई काबिल और वरिष्ठ वकील नहीं मिला? डिमरी ने कहा राज्य के प्रतिभाशाली वकीलों को दरकिनार कर बाहरी व्यक्ति को यह जिम्मेदारी देना राज्य का अपमान है? डिमरी ने कहा अंकिता भंडारी केस में दुष्यंत गौतम का नाम ऑडियो वायरल होने के बाद सामने आया था, गौरव भाटिया उन्हीं के निजी वकील के तौर पर दिल्ली हाई कोर्ट में पेश हुए थे। डिमरी ने कहा क्या दो महीने बाद उन्हें सरकारी पद दिया जाना, उसी ‘पैरवी’ का इनाम है? मोहित ने सवाल किया कि सीएम धामी ‘देवभूमि’ की बेटियों की सुरक्षा की बात करते हैं, लेकिन जब संदिग्धों के वकील को सरकारी पद से नवाजते हैं, तो जनता के बीच क्या संदेश जाता है? क्या सरकार की प्राथमिकता अंकिता को न्याय दिलाना है या रसूखदारों को बचाना? उन्होंने आगे कहा कि यह सिर्फ अंकिता भंडारी का मामला नहीं है, यह उत्तराखंड की हर बेटी के सम्मान का सवाल है।

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