जेनी ने डीजीपी को सौंपा पत्र, सीबीआई जांच से असंतुष्ट जेनी ने निष्पक्ष जांच की लगाई गुहार
देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित जैनी प्रकरण ने एक बार फिर प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी है। जेनी उर्फ इंदिरा देवी ने पुलिस महानिदेशक डीजीपी को पत्र सौंपकर पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज करने और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। जैनी उर्फ इंदिरा देन्जी की शिकायत के बाद देहरादून पुलिस ने मामले की जांच एक महिला अधिकारी को सौंप दी है। पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता की ओर से पुलिस मुख्यालय को भेजा गया प्रार्थना पत्र देहरादून पुलिस को प्राप्त हुआ था। इसमें जैनी ने पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत पर वर्ष 2003 में दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए देहरादून एसएसपी प्रमेन्द्र डोभाल ने इसकी जांच महिला अधिकारी एवं सीओ डोईवाला वंदना वर्मा को सौंपी है। उन्हें शिकायत की जांच कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।महिला ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2003 में जब वह महज 16 वर्ष की थी, तब हरक सिंह रावत ने उसके साथ दुष्कर्म किया था। उसका दावा है कि इस घटना के बाद वह एक बेटे की मां बनी, जो अब 23 वर्ष का है। शनिवार को आयोजित प्रेस कॉन्Úेंस में जेनी ने अपने साथ हुए कथित घटनाक्रम को विस्तार से बताया। उसने कहा कि वह अक्तूबर 2002 में देहरादून आई थी। उस समय उसकी उम्र करीब 16 वर्ष थी। देहरादून के प्रिंस चौक स्थित एक एसटीडी बूथ पर काम करने के दौरान उसकी मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से हुई, जिसने उसे टिहरी गढ़वाल की एक संस्था में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। महिला का आरोप है कि नौकरी के बहाने उसे यमुना कॉलोनी स्थित हरक सिंह रावत के सरकारी आवास पर ले जाया गया, जहां वह करीब दो महीने रही। जेनी के मुताबिक, उस समय उसे हिंदी भाषा की भी ठीक से समझ नहीं थी। उसने आरोप लगाया कि सरकारी आवास में रहने के दौरान उसके साथ दुष्कर्म किया गया। इतना ही नहीं, उसे सरकारी वाहन से मसूरी और अन्य स्थानों के होटलों में भी ले जाया जाता था। महिला का दावा है कि हरक सिंह रावत उस समय सत्ता में प्रभावशाली पद पर थे, जिसके चलते उसे कहीं से मदद नहीं मिली। प्रेस कॉन्Úेंस में भावुक होते हुए जेनी ने आरोप लगाया कि गर्भवती होने के बाद उसे मानसिक चिकित्सालय में रखा गया। वहां उसके साथ क्या-क्या हुआ, इसकी पीड़ा आज भी उसके मन में है। उसने बताया कि उसे धमकाकर वहां से बाहर निकाला गया और कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी करवाए गए। महिला के अनुसार, सीबीआई की टीम उससे मिलने मानसिक चिकित्सालय में केवल एक बार आई थी। उसने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से उसका नाम लिए जाने के बाद उसने दोबारा देहरादून आकर अपनी बात रखने का फैसला किया। जेनी ने कहा कि वह उत्तराखंड में तीसरी बार न्याय की गुहार लगाने पहुंची है। पहले हुई सीबीआई जांच से वह संतुष्ट नहीं है और अब पूरे मामले की नए सिरे से निष्पक्ष जांच चाहती है। उसने डीजीपी से अपनी शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। जेनी से जब पूछा गया कि इतने साल बाद क्यों आई तो कहा कि हरक के डर से नहीं आ पाई थी। हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जब जेनी प्रकरण के बारे में बात की तो मुझे न्याय की उम्मीद जगी। फिर पता चला कि कई नेता मेरा नाम, डीएनए टेस्ट लेकर बयानबाजी कर रहे हैं। इसलिए यहां आई हूं। किसी के कहने से नहीं आई। गौरतलब है कि वर्ष 2003 में सामने आया जैनी प्रकरण उत्तराखंड राज्य गठन के शुरुआती वर्षों के सबसे चर्चित राजनीतिक और सामाजिक विवादों में शामिल रहा है। उस समय एनडी तिवारी सरकार में हरक सिंह रावत राजस्व मंत्री थे। असम की रहने वाली जेनी ने आरोप लगाया था कि उसके बच्चे के जैविक पिता हरक सिंह रावत हैं और उन्होंने उसका यौन शोषण किया है।


