चर्चित जैनी प्रकरण ने एक बार फिर लिया नया मोड़ : बेटे की दोबारा DNA जांच कराने की उठाई मांग,हरक सिंह रावत पर जैनी के गंभीर आरोप
16 वर्ष की उम्र में दुष्कर्म किए जाने का लगाया आरोप, वर्ष 2003 में हुई DNA जांच की प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
जैनी का दावा- बेटे का ब्लड सैंपल नहीं लिया गया था, तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर भी दबाव बनाने का लगाया आरोप
देहरादून। उत्तराखण्ड की राजनीति से जुड़े चर्चित जैनी प्रकरण ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। जैनी (इंद्राणी देवड़ी) नाम की महिला ने कांग्रेस नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत पर गंभीर आरोप लगाते हुए अपने बेटे की दोबारा DNA जांच कराने की मांग की है। महिला का दावा है कि जब वह महज 16 वर्ष की थीं, तब उनके साथ दुष्कर्म किया गया था। उनके इन आरोपों के सामने आने के बाद प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। जैनी ने वर्ष 2003 में हुई DNA जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि उस समय उनके बेटे का ब्लड सैंपल ही नहीं लिया गया था। उनका कहना है कि जांच की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं थीं, जिसके चलते वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ सकी।महिला ने यह भी दावा किया है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार की ओर से उन पर दबाव बनाया गया और पूरे मामले में चुप रहने के लिए मजबूर किया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
दोबारा DNA जांच की मांग
जैनी ने अब एक बार फिर अपने बेटे की DNA जांच कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक के माध्यम से दोबारा DNA परीक्षण कराया जाना चाहिए, ताकि वर्षों पुराने इस मामले से जुड़े तथ्यों की वास्तविकता सामने आ सके।उनका मानना है कि निष्पक्ष एवं वैज्ञानिक जांच से लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान निकल सकता है। उन्होंने वर्ष 2003 में हुई जांच को लेकर अपनी आपत्तियां भी सामने रखी हैं।
राजनीतिक हलकों में फिर तेज हुई चर्चा
जैनी के ताजा आरोपों के बाद उत्तराखण्ड की राजनीति में यह मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। मामले को लेकर विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक हलकों में प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।इस प्रकरण में अब दोबारा DNA जांच की मांग महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, जैनी की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। वहीं, हरक सिंह रावत और अन्य संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी शेष है।फिलहाल इस पूरे मामले में सभी की निगाहें आगे होने वाली कानूनी एवं जांच संबंधी कार्रवाई पर टिकी हैं। वर्षों पुराने इस प्रकरण में निष्पक्ष जांच, वैज्ञानिक साक्ष्य और सभी संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आने के बाद ही वास्तविक तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


