‘क्रांतिवीर’ से बनाई अलग पहचान : नाना पाटेकर को तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, चार फिल्मफेयर और दो फिल्मफेयर मराठी पुरस्कार मिले
चार दशक से ज्यादा का शानदार फिल्मी सफर: वर्ष 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया
विश्वनाथ पाटेकर, जिन्हें पूरी दुनिया नाना पाटेकर के नाम से जानती है, भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली और बहुमुखी कलाकारों में शामिल थे। उन्होंने हिंदी के साथ-साथ मराठी सिनेमा और थिएटर में भी अपनी अलग पहचान बनाई। नाना पाटेकर उन अभिनेताओं में शामिल रहे, जिन्होंने अपने गंभीर, दमदार और चुनौतीपूर्ण किरदारों से भारतीय सिनेमा में अलग पहचान बनाई। ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘तिरंगा’, ‘अब तक छप्पन’, ‘अपहरण’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने खास तौर पर याद किया। नाना पाटेकर की खासियत यह रही कि उन्होंने एक ही तरह के किरदारों तक खुद को सीमित नहीं रखा। गंभीर भूमिकाओं से लेकर एक्शन, ड्रामा और कॉमेडी तक उन्होंने अलग-अलग शैलियों में अपनी अभिनय क्षमता दिखाई। उनकी संवाद अदायगी और पर्दे पर प्रभावशाली मौजूदगी उनकी पहचान बनी। अपने लंबे फिल्मी करियर में नाना पाटेकर को तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, चार फिल्मफेयर पुरस्कार और दो फिल्मफेयर मराठी पुरस्कार मिले। वर्ष 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया। अपने अभिनय और यादगार किरदारों के जरिए उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी खास जगह बनाई। नाना पाटेकर ने 1978 में आई फिल्म ‘गमन’ से हिंदी सिनेमा में कदम रखा। शुरुआती दौर में उन्होंने कई मराठी और हिंदी फिल्मों में काम किया। वर्ष 1988 में मीरा नायर की फिल्म ‘सलाम बॉम्बे!’ में उनके अभिनय को काफी सराहना मिली। इसके बाद 1989 में आई ‘परिंदा’ ने उनके करियर को नई ऊंचाई दी।

‘परिंदा’ से मिली बड़ी पहचान
‘परिंदा’ में नाना पाटेकर ने एक खतरनाक गैंगस्टर का किरदार निभाया था। उनके दमदार अभिनय ने दर्शकों और समीक्षकों दोनों का ध्यान खींचा। इसके बाद उन्होंने ‘अंकुश’, ‘प्रतिघात’, ‘प्रहार’, ‘तिरंगा’ और ‘क्रांतिवीर’ जैसी फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं।1994 में रिलीज हुई ‘क्रांतिवीर’ उनके करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक रही। इस फिल्म में उनके अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी संवाद अदायगी और पर्दे पर प्रभावशाली उपस्थिति उनकी पहचान बन गई थी।
गंभीर किरदारों से कॉमेडी तक बनाई अलग पहचान
नाना पाटेकर ने अपने लंबे करियर में लगभग हर तरह के किरदार निभाए। ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘अब तक छप्पन’, ‘अपहरण’ और ‘राजनीति’ जैसी फिल्मों में उन्होंने गंभीर और चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।वहीं, ‘वेलकम’ और ‘वेलकम बैक’ जैसी फिल्मों में उनके हास्य अभिनय ने भी दर्शकों को खूब प्रभावित किया। यही विविधता उन्हें अपने दौर के दूसरे अभिनेताओं से अलग बनाती थी।


