ज्योलिकोट दूषित पेयजल प्रकरण पर मुख्य सचिव की कड़ी चेतावनी
अधिकारियों को 15 दिन में प्रमुख जलापूर्ति योजनाओं के भौतिक सत्यापन और जियो मैपिंग के निर्देश
देहरादून । ज्योलिकोट, नैनीताल में दूषित पेयजल की घटना को लेकर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने बुधवार को सचिवालय में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रकरण की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने घटना पर कड़ी नाराजगी जताते हुए पेयजल की गुणवत्ता और जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी घटना में प्रथम दृष्टया लापरवाही मिलने पर विभागाध्यक्षों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी और जिम्मेदारी तय की जाएगी। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में मजबूत फील्ड नेटवर्क होने के बावजूद ज्योलिकोट में दूषित पेयजल की स्थिति की जानकारी समय पर नहीं मिल सकी। शिक्षक, पटवारी, ग्राम पंचायत अधिकारी, टड्ढूबवेल ऑपरेटर सहित बड़ी संख्या में फील्ड कार्मिकों के नेटवर्क का प्रभावी उपयोग करते हुए सूचना और फीडबैक व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि किसी भी क्षेत्र में पेयजल की गुणवत्ता या स्वास्थ्य संबंधी समस्या की जानकारी तत्काल मिल सके। उन्होंने इस व्यवस्था की नियमित समीक्षा के भी निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने प्रदेशभर की प्रमुख जलापूर्ति योजनाओं की जियो मैपिंग और जीआईएस जियो रेफरेंसिंग कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जलापूर्ति व्यवस्था में स्रोत से उपभोक्ता तक पानी पहुंचने, भंडारण, पाइपलाइन, सीवर लाइन और क्रॉसिंग प्वाइंट सहित पूरे नेटवर्क की मैपिंग की जाए। अगले 15 दिनों में प्रमुख जलापूर्ति योजनाओं का भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश देते हुए उन्होंने स्रोत, स्टोरेज, पाइपलाइन, सीवर लाइन, क्रॉसिंग प्वाइंट और उपभोक्ता स्तर पर संभावित लीकेज की जांच करने को कहा। उन्होंने स्टोरेज टैंकों की सफाई की तिथि, क्लोरीनेशन का रिकॉर्ड, क्लोरीन की उपलब्धता और उपयोग तथा पानी में कॉलीफॉर्म सहित अन्य आवश्यक मानकों की जांच और नियमित रिकॉर्ड सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पेयजल और सीवरेज लाइनों के क्रॉसिंग प्वाइंट विशेष रूप से चिन्हित करने तथा पुराने पाइपों के स्थान पर नए पाइप लगाने सहित आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने को कहा। मुख्य सचिव ने पेयजल और सीवरेज लाइनों की जांच के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया तैयार कर उसका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इंदौर की घटना के बाद विस्तृत एसओपी जारी की गई थी। इसके बावजूद कहीं पेयजल दूषित होने की स्थिति सामने आती है तो यह देखा जाना चाहिए कि एसओपी का पालन किस स्तर पर नहीं हुआ और उसके कारण क्या रहे। उन्होंने प्रमुख पेयजल परियोजनाओं की नियमित निगरानी के निर्देश भी दिए। मुख्य सचिव ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, सतही जल के साथ प्रमुख शहरों में नियमित पेयजल गुणवत्ता की जांच की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रदेश के सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का आकस्मिक निरीक्षण कराने को भी कहा। स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए कि जहां भी दूषित पेयजल अथवा इस प्रकार की घटना सामने आए, वहां तत्काल स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजी जाए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक स्तर की व्यवस्थाओं को सक्रिय करते हुए डॉक्टरों की टीम को तैयार रखा जाए। अगले 15 दिनों में प्रदेशभर में आवश्यक स्वास्थ्य निगरानी और जांच की कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा निगरानी व्यवस्था की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि जिला स्तर पर गठित समितियां केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित न रहें। समितियां जमीनी स्तर के अधिकारियों के साथ विचार विमर्श कर अपने क्षेत्रों से नियमित सूचना और फीडबैक प्राप्त करें। यह व्यवस्था एक बार की कवायद के बजाय स्थायी निगरानी तंत्र के रूप में विकसित की जानी चाहिए। आवश्यकता के अनुसार स्थायी समिति गठित कर नियमित बैठकें आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने कहा कि विभागों को अपने सिस्टम को दुरुस्त करने के साथ संस्थागत अनुभव का भी उपयोग करना चाहिए। सेवानिवृत्त लाइनमैन और लंबे समय तक फील्ड में काम कर चुके अनुभवी कार्मिकों से पुराने नेटवर्क, पाइपलाइन, क्रॉसिंग और संवेदनशील स्थलों की जानकारी लेकर आवश्यक सुधार किए जाएं। बैठक में सचिव डॉ. रणवीर सिंह चौहान, डॉ. वी. षणमुगम, सदस्य सचिव प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड डॉ. पराग मधुकर धकाते, मुख्य महाप्रबंधक जल संस्थान डी.के. सिंह तथा वीडियो कॉन्Úेंसिंग के माध्यम से जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
