धामी-पांडे की ‘नाव’ ने बदला तराई का राजनीतिक तापमान: कांग्रेस की उम्मीदों पर फिरा पानी
गूलरभोज/रुद्रपुर। जून की तपती गर्मी में जहां तराई का मौसम आसमान से आग उगल रहा है, वहीं शनिवार को गूलरभोज में घटे एक राजनीतिक घटनाक्रम ने क्षेत्र की सियासत का तापमान अचानक नीचे ला दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और गदरपुर विधायक अरविंद पांडे की एक साथ मौजूदगी, बौर जलाशय में बोटिंग और उसके बाद हुई मुलाकात ने भाजपा के भीतर चल रही खींचतान की चर्चाओं पर लगभग विराम लगा दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शनिवार को गूलरभोज स्थित बौर जलाशय पहुंचे, जहां उन्होंने आगामी अंतरराष्ट्रीय क्याकिंग एवं कैनोइंग प्रतियोगिता की तैयारियों का निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ गदरपुर विधायक अरविंद पांडे भी मौजूद रहे। निरीक्षण के बाद दोनों नेताओं ने एक साथ बौर जलाशय में बोटिंग की। मुख्यमंत्री ने स्वयं मोटर बोट का स्टीयरिंग संभाला, जबकि विधायक पांडे उनके साथ सवार रहे। राजनीतिक जानकारों की मानें तो पिछले साढ़े चार वर्षों के दौरान यह पहला अवसर था जब मुख्यमंत्री धामी और विधायक पांडे इतने सहज और सार्वजनिक रूप से एक साथ दिखाई दिए। पिछले एक वर्ष से दोनों नेताओं के संबंधों को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही थीं। कई मौकों पर विधायक पांडे के बयानों को लेकर यह संदेश देने की कोशिश की गई कि भाजपा के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। विपक्षी दल कांग्रेस भी समय-समय पर इन चर्चाओं को हवा देने का प्रयास करता रहा। हालांकि पिछले दिनों भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रदेश प्रभारी नितिन नवीन के देहरादून दौरे के दौरान दोनों नेताओं के बीच बढ़ती नजदीकियों के संकेत मिलने लगे थे, लेकिन शनिवार का घटनाक्रम उन संकेतों को खुला राजनीतिक संदेश देने वाला साबित हुआ। भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच इसे संगठनात्मक एकजुटता और समन्वय के रूप में देखा जा रहा है। बौर जलाशय में एक साथ बोटिंग के बाद मुख्यमंत्री धामी सीधे विधायक अरविंद पांडे के गूलरभोज स्थित आवास पहुंचे। करीब आधे घंटे तक दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में बातचीत हुई। हालांकि मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने इसे पूरी तरह निजी कार्यक्रम बताया और किसी राजनीतिक चर्चासे इनकार किया।
कांग्रेस की उम्मीदों पर फिरा पानी
रुद्रपुर। पिछले कई महीनों से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और विधायक अरविंद पांडे के रिश्तों को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही थीं। कांग्रेस भी भाजपा के भीतर कथित मतभेदों को मुद्दा बनाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश में थी। लेकिन गूलरभोज में शनिवार को जो तस्वीर सामने आई, उसने इन चर्चाओं को काफी हद तक विराम दे दिया। बौर जलाशय में धामी और पांडे की एक साथ बोटिंग, फिर विधायक आवास पर हुई मुलाकात ने भाजपा में एकजुटता का संदेश दिया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम से कांग्रेस का वह सियासी गणित कमजोर पड़ सकता है, जो भाजपा के अंदरूनी मतभेदों की संभावनाओं पर आधारित था। खासकर ऊधम सिंह नगर जिले की राजनीति में इस मुलाकात को भाजपा के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। आने वाले चुनावों के मद्देनजर यह तस्वीर विपक्ष की रणनीति पर भी असर डाल सकती है।
