‘मुख्यमंत्री की फटकार’ के बाद भी ‘संजीदा’ नहीं हुआ एनएच
फटकार के बाद सड़क सुधारीकरण तो आरंभ हुआ पर हिचकोले खा रहे टेड़ा घाट पुल से एनएच ने फेरी आंखें
खटीमा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा बीते साल के नवंबर माह में खटीमा-मझोला राष्ट्रीय राजमार्ग के निरीक्षण के दौरान एनएच अधिकारियों को तगड़ी फटकार लगाने के बाद एनएच ने उपरोक्त मार्ग के मरम्मत का काम तो आरंभ किया, लेकिन टेड़ा घाट इलाके में किसी बड़ी दुर्घटना को दावत दे रहे पांच दशक पुराने जर्जर मोटर पुल से निगाहें पूरी तरह फेर ली है। उल्लेखनीय है कि खटीमा-मझोला राष्ट्रीय राजमार्ग पर करीब पांच दशकों से हाईवे पर सभी छोटे बड़े वाहनों का बोझ उठता चला आ रहा यह पुल वर्तमान में बेहद जर्जर हो चुका है। पुल के दोनों किनारे जहां क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, तो वहीं उनमें पड़ा गîक्का, कभी भी किसी बड़े सड़क हादसे का सबब बन सकता है। ज्ञात हो कि एनएच विभाग द्वारा आजकल खटीमा-मझोला राष्ट्रीय राजमार्ग के मरम्मत का कार्य किया जा रहा है, मगर उपरोक्त राजमार्ग पर ही स्थित इस जजर्र पुल की मरम्मत एनएच विभाग की ओर से ना किए जाने के कारण स्थानीय लोग किसी संभावित दुर्घटना को लेकर खासे आशंकित हैं ।स्थानीय निवासियों के अनुसार उपरोक्त पुल को बने करीब 50-60 साल हो गए हैं और अब यह पूरी तरह कमजोर हो चुका है। लिहाजा अब इसकी मरम्मत की दरकार है, क्योंकि जब भी कोई वाहन पुल से गुजरता है ,तो पुल बुरी तरह हिलने लगता है। हालात कुछ ऐसे हो चले हैं कि पुल के किनारे पर बने हिस्से पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं और समूचा पुल कई जगहों से टूटा पड़ा हुआ है। इतना ही नहींपुल से पहले सड़क के बीचो बीच एक जानलेवा गîक्का भी बन गया है ऐसे में बरसात के मौसम में इस पुल पर हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। बता दें कि खटीमा से उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाला यह पुल इस इलाके की लाइफ लाइन माने जाने वाले मार्ग की महत्वपूर्ण कड़ी है, लिहाजा सेना सड़क के नाम से पहचान रखने वाली इस सड़क पर बना यह पुल अगर किन्हीं कारणों से क्षतिग्रस्त होता है, तो हजारों लोगों के लिए आवागमन का संकट पैदा हो सकता है। मगर एनएच इस पुल की जर्जर हालत और आम लोगों के आवागमन के लिए उपरोक्त पुल की अपरिहायर्ता से फिलहाल पूरी तरह अनभिज्ञ नजर आ रहा है। हो सकता है किसी बड़े हादसे के बाद संबंधित विभाग की आंखें खुले या फिर मुख्यमंत्री की एक और फटकार पर। वह इसलिए क्योंकि खटीमा राज्य के मुख्यमंत्री का गृह नगर है और देर सवेर मुख्यमंत्री की नजर इस जर्जर पुल पर पड़नी ही है। जाहिर है कि उस समय नेशनल हाईवे ऑफ इंडिया के पास अपनी इस लापरवाही पर पर्दा डालने की कोई भी जायज वजह नहीं होगी ।
